त्वरित लिंक्स
Civil services
16 views
भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986' (Environment (Protection) Act, 1986) और इसके अंतर्गत विहित शक्तियों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 को वर्ष 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के तुरंत बाद और संयुक्त राष्ट्र की स्टॉकहोम मानव पर्यावरण संगोष्ठी (1972) के निर्णयों को कार्यान्वित करने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 253 के तहत संसद द्वारा अधिनियमित किया गया था।
- 2. इस अधिनियम के तहत केंद्र सरकार को देश में पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा और सुधार करने तथा प्रदूषण को रोकने, नियंत्रित करने और कम करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करने की व्यापक शक्तियाँ प्राप्त हैं, जिसमें किसी भी उद्योग, संचालन या प्रक्रिया को विनियमित या प्रतिबंधित करना भी शामिल है।
- 3. इस अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा स्थापित 'राष्ट्रीय तटीय जोन प्रबंधन प्राधिकरण' (NCZMA) और इसके अधीन राज्य प्राधिकरणों को देश के तटीय क्षेत्रों में तटीय विनियमन जोन (CRZ) अधिसूचना के उल्लंघन से संबंधित मामलों में स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने या आपराधिक अभियोजन शुरू करने की शक्ति प्राप्त है, और इसके आदेशों के विरुद्ध किसी भी सिविल न्यायालय में वाद दायर किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 को भोपाल गैस आपदा (1984) के पृष्ठभूमि में और जून 1972 में स्टॉकहोम में आयोजित मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के निर्णयों को लागू करने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 253 के तहत अधिनियमित किया गया था, जो अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने के लिए संसद को कानून बनाने की शक्ति देता है। कथन 2 सही है: इस अधिनियम की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार को देश में पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा और सुधार करने तथा प्रदूषण को रोकने, नियंत्रित करने और कम करने के लिए 'सभी आवश्यक उपाय' करने की अत्यधिक व्यापक और सर्वोपरि शक्तियाँ प्रदान की गई हैं। कथन 3 गलत है: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 19 के अनुसार, इस अधिनियम के तहत या इसके नियमों के अधीन बनाए गए प्राधिकरणों द्वारा किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अदालत में शिकायत दर्ज करने से पहले केंद्र सरकार या उसके द्वारा प्राधिकृत प्राधिकारी को 60 दिनों का लिखित नोटिस देना अनिवार्य होता है। इसके अलावा, इस अधिनियम की धारा 22 के तहत पर्यावरण संरक्षण अधिनियम या इसके तहत बनाए गए नियमों के तहत लिए गए किसी भी निर्णय या किए गए कार्य के संबंध में सिविल न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट रूप से 'वर्जित' (Barred) किया गया है, अर्थात सिविल न्यायालयों में वाद दायर नहीं किया जा सकता है।
Related Questions
→
जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार किस अनुच्छेद के अंतर्गत आता है?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' (केंद्र-राज्य विधायी संबंध - अनुच्छेद 245 से 255) तथा विधायी शक्तियों के वितरण के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार संसद को पूरे या भारत के किसी भी भाग के लिए कानून बनाने की अधिकारिता प्राप्त है, और संसद द्वारा बनाया गया कोई भी कानून इस आधार पर अवैध नहीं ठहराया जाएगा कि उसका एक्स्ट्रा-टेरिटोरियल ऑपरेशन (अतिरिक्त-क्षेत्रीय प्रभाव) है।
2. यदि समवर्ती सूची (Concurrent List) के किसी विषय पर संसद द्वारा बनाया गया कानून और राज्य के विधानमंडल द्वारा बनाया गया कानून एक-दूसरे के विपरीत या असंगत होते हैं, तो अनुच्छेद 254 के तहत हमेशा संसद का कानून ही प्रभावी होगा, भले ही राज्य का कानून राष्ट्रपति की विचारार्थ सुरक्षित रखा गया हो और उसे राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त हो चुकी हो।
3. अनुच्छेद 249 के प्रावधानों के अंतर्गत, यदि राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से यह संकल्प पारित कर देती है कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी भी विषय पर कानून बनाए, तो संसद उस विषय पर पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए विधि बना सकती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम दो वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'जैविक ऑक्सीजन मांग' (BOD) और 'रासायनिक ऑक्सीजन मांग' (COD) तथा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर इनके प्रभावों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैविक ऑक्सीजन मांग (BOD) किसी जलीय निकाय में उपस्थित सूक्ष्मजीवों (जैसे बैक्टीरिया) द्वारा कार्बनिक पदार्थों के जैव-रासायनिक ऑक्सीकरण के लिए आवश्यक घुले हुए ऑक्सीजन की मात्रा को दर्शाती है, और BOD का उच्च स्तर जलीय निकाय में उच्च प्रदूषण स्तर और कम घुली हुई ऑक्सीजन (DO) का संकेत देता है।
2. रासायनिक ऑक्सीजन मांग (COD) के मापन में जल में उपस्थित केवल जैव-अपघटनीय (Biodegradable) कार्बनिक पदार्थों के ऑक्सीकरण के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा का ही आकलन किया जाता है, जबकि अजैव-अपघटनीय (Non-biodegradable) कार्बनिक यौगिकों को इसमें शामिल नहीं किया जाता है।
3. किसी भी प्रदूषित जल के नमूने के लिए रासायनिक ऑक्सीजन मांग (COD) का मान सदैव उसकी जैविक ऑक्सीजन मांग (BOD) के मान से अधिक होता है, क्योंकि रासायनिक ऑक्सीडेंट (जैसे पोटेशियम डाइक्रोमेट) जल में उपस्थित जैव-अपघटनीय और अजैव-अपघटनीय दोनों प्रकार के कार्बनिक पदार्थों को ऑक्सीकृत कर देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline - NIP) और 'पीएम गति शक्ति' (PM GatiShakti) राष्ट्रीय मास्टर प्लान के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) एक अंतर-मंत्रालयी कार्यदल द्वारा तैयार की गई एक पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्तपोषित करना है, जिसमें कुल अनुमानित व्यय का सबसे बड़ा हिस्सा ऊर्जा (Energy) क्षेत्र के लिए आवंटित किया गया है।
2. 'पीएम गति शक्ति' राष्ट्रीय मास्टर प्लान को multimodal connectivity के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में लॉन्च किया गया है, जिसके तहत देश के सभी आर्थिक क्षेत्रों और अवसंरचना परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन में विभिन्न मंत्रालयों तथा राज्य सरकारों के बीच समन्वय स्थापित किया जाता है।
3. 'पीएम गति शक्ति' योजना केवल सड़क, रेलवे और विमानन जैसे परिवहन के केंद्रीय मंत्रालयों तक सीमित है और इसमें ग्रामीण विकास, कृषि तथा पर्यावरण से जुड़े राज्य-स्तरीय बुनियादी ढांचे के डेटा को शामिल नहीं किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1905 के 'स्वदेशी आंदोलन' (Swadeshi Movement) और उसके विभिन्न आयामों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय के विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित एक ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक घोषणा की गई थी, तथा इस आंदोलन के दौरान ही पहली बार बड़े पैमाने पर विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग का, विशेष रूप से 'वंदे मातरम्' को आंदोलन के गीत के रूप में अपनाते हुए, प्रसार किया गया।
2. इस आंदोलन का दायित्व केवल शहरों और बौद्धिक वर्ग तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसने बंगाल के ग्रामीण इलाकों के किसानों, कारीगरों, महिलाओं और विशेष रूप से मुस्लिम कृषक वर्ग को भी बड़े पैमाने पर अपनी ओर आकर्षित किया और वे सभी इस राष्ट्रीय धारा में सक्रिय रूप से सम्मिलित हुए।
3. स्वदेशी आंदोलन के परिणामस्वरूप देश में स्वदेशी उद्योगों, वस्त्र मिलों, बैंकों, बीमा कंपनियों और राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिला, जिसके तहत बंगाल नेशनल कॉलेज की स्थापना की गई और इसके प्रथम प्राचार्य के रूप में अरबिंदो घोष ने पदभार संभाला।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.