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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूमध्यरेखीय जलवायु प्रदेश' (Equatorial Climatic Region) और उससे संबंधित भौगोलिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भूमध्यरेखीय जलवायु क्षेत्र मुख्य रूप से भूमध्य रेखा के दोनों ओर 5° से 10° उत्तर और दक्षिण अक्षांशों के मध्य पाया जाता है, जहाँ वर्ष भर उच्च तापमान और उच्च सापेक्षित आर्द्रता के साथ प्रतिदिन दोपहर के बाद संवहन वर्षा (Convectional rainfall) होना इस क्षेत्र की प्रमुख विशेषता है।
- 2. इस क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में वर्षा और तापमान की अनुकूल दशाएँ होने के बावजूद यहाँ की मिट्टी (जैसे लेटराइट मृदा) अत्यधिक लीचिंग (Leaching) प्रक्रिया के कारण तेजी से पोषक तत्वों से वंचित हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर स्थायी कृषि के लिए अनुपयुक्त होता है और यहाँ 'स्थानांतरित कृषि' (Shifting Cultivation) प्रचलित है।
- 3. इस क्षेत्र में पाए जाने वाले उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों (Tropical Rainforests) में पादपों की विभिन्न प्रजातियाँ एक ही स्थान पर मिश्रित रूप से उगती हैं, और यहाँ सूर्य के प्रकाश के लिए तीव्र प्रतिस्पर्धा के कारण पौधे कई स्पष्ट क्षैतिज परतों (Canopy layers) का निर्माण करते हैं, जिनमें धरातल पर घनी झाड़ियाँ उगती हैं क्योंकि सूर्य का प्रकाश बिना किसी बाधा के सीधे वन तल तक पहुँच जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भूमध्यरेखीय जलवायु क्षेत्र सामान्यतः भूमध्य रेखा के दोनों ओर 5° से 10° उत्तर और दक्षिण अक्षांशों के बीच विस्तृत होता है। यहाँ सूर्य की किरणें वर्ष भर लगभग लंबवत पड़ती हैं, जिससे उच्च तापमान रहता है और दैनिक तापांतर कम होता है। अत्यधिक वाष्पीकरण और संवहन धाराओं के कारण प्रतिदिन दोपहर के बाद '4 बजे की वर्षा' (4 o'clock rainfall) जैसी संवहन वर्षा यहाँ की आम विशेषता है। कथन 2 सही है: अत्यधिक वर्षा और उच्च तापमान के कारण मिट्टी के पोषक तत्व पानी के साथ घुलकर नीचे चले जाते हैं, जिसे 'लीचिंग' या निक्षालन कहते हैं। इसके कारण भूमध्यरेखीय क्षेत्रों की मिट्टी (विशेषकर लेटराइट) बहुत उपजाऊ नहीं रहती है, जिससे यहाँ स्थायी कृषि कठिन होती है और यहाँ स्लैश-एंड-बर्न (Slash and burn) या स्थानांतरित कृषि की जाती है। कथन 3 गलत है: भूमध्यरेखीय वर्षावनों में कैनोपी (वितान) इतनी घनी होती है कि सूर्य का प्रकाश सीधे वन तल (Forest floor) तक नहीं पहुँच पाता है। इसके परिणामस्वरूप, वन तल पर बहुत कम वनस्पति या झाड़ियाँ उगती हैं, और धरातल अपेक्षाकृत खुला होता है, न कि घना। इसलिए तीसरा कथन गलत है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संघीय न्यायपालिका' (Union Judiciary) अर्थात् उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के अधिकारक्षेत्र और शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय के 'मूल आरंभिक अधिकारक्षेत्र' (Original Jurisdiction) के दायरे में वे विवाद आते हैं जो केंद्र सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच, या एक तरफ केंद्र सरकार और कोई राज्य तथा दूसरी तरफ एक या अधिक राज्यों के बीच, या दो या अधिक राज्यों के बीच उत्पन्न होते हैं, तथापि इस अधिकारक्षेत्र में रियासतों के समय से चली आ रही किसी संधि या समझौते से उत्पन्न विवाद भी पूर्णतः शामिल होते हैं।
2. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है, जिसके अंतर्गत यदि कानून या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न होता है जो सार्वजनिक महत्व का है, तो राष्ट्रपति उस पर उच्चतम न्यायालय की राय मांग सकता है, और ऐसी स्थिति में उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य होता है।
3. उच्चतम न्यायालय एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) है, जिसका अर्थ यह है कि उसके निर्णय और अभिलेख सर्वदा साक्ष्य के रूप में रखे जाते हैं और उनकी प्रामाणिकता पर किसी भी न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है, साथ ही उसे अपने अवमान के लिए दंडित करने की शक्ति भी प्राप्त है जिसमें संसद की अनुमति के बिना किसी को भी कारावास की सजा देना शामिल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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लोकसभा की संरचना संविधान के किस अनुच्छेद में दी गई है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' (मूल अधिकार - अनुच्छेद 12 से 35) तथा 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) एवं 'संविधान संशोधन की शक्ति' (Article 368) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय के बहुमत के निर्णय द्वारा यह प्रतिपादित किया गया था कि संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है, जिसमें मूल अधिकार भी शामिल हैं, किंतु संसद 'संविधान की मूल संरचना' (Basic Structure) को नष्ट या क्षीण नहीं कर सकती है।
2. संविधान का अनुच्छेद 13 (2) यह स्पष्ट रूप से प्रावधानित करता है कि राज्य ऐसी कोई विधि नहीं बनाएगा जो भाग III द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती है या न्यून करती है, तथा इस खंड के उल्लंघन में बनाई गई प्रत्येक विधि उल्लंघन की मात्रा तक शून्य (Void) होगी, और इसके अंतर्गत 'विधि' (Law) शब्द में संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए अधिनियमों के अलावा अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम और रूढ़ि या प्रथा (Custom or Usage) भी शामिल हैं।
3. गोलकनाथ वाद (1967) में उच्चतम न्यायालय ने यह ऐतिहासिक निर्णय दिया था कि संसद को मूल अधिकारों में संशोधन करने की कोई शक्ति नहीं है, और मूल अधिकार 'दिव्य रूप से पवित्र' (Transcendental and Immutable) हैं, जिसे पलटने के लिए ही संसद ने 24वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 पारित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' (National Green Tribunal Act, 2010) के अंतर्गत स्थापित 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (NGT) की शक्तियों, अधिकार क्षेत्र और सीमाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को भारत के संविधान के 'अनुच्छेद 21' के अंतर्गत प्रदत्त जीवन के अधिकार के तहत स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को लागू करने का वैधानिक जनादेश प्राप्त है, और यह अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के कड़े प्रक्रियात्मक नियमों से बंधा नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है।
2. NGT अधिनियम की धारा 14 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि अधिकरण के समक्ष किसी भी पर्यावरण से जुड़े विवाद या आवेदन को उस कारण के उत्पन्न होने की तारीख से 'छह महीने' की अवधि के भीतर दायर किया जाना अनिवार्य है, किंतु अधिकरण के पास यह विवेकाधीन शक्ति (Discretionary Power) है कि वह पर्याप्त कारणों से संतुष्ट होने पर इस अवधि को अधिकतम 'अतिरिक्त साठ दिन' (60 days) तक बढ़ा सकता है।
3. 'वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980' और 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' को NGT के वैधानिक क्षेत्राधिकार की पहली अनुसूची (Schedule I) में शामिल किया गया है, किंतु 'वन अधिकार अधिनियम, 2006' (Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers Act, 2006) को इसके क्षेत्राधिकार से पूर्णतः बाहर रखा गया है, जिसके कारण वनवासियों के अधिकारों से जुड़े मामलों की सुनवाई NGT द्वारा नहीं की जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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प्लास्टिक रीसाइक्लिंग पर 3rd वैश्विक सम्मेलन (GCPRS 2026) कहाँ आयोजित किया गया?
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