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भारतीय इतिहास और कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था, वास्तुकला और राजस्व प्रणाली से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सल्तनत काल में अलाउद्दीन खिलजी द्वारा प्रशासनिक नियंत्रण और राजस्व सुधारों के तहत 'बिसवा' (Biswa) पद्धति को पैमाइश (Measurement) के आधार पर भू-राजस्व निर्धारण का मुख्य पैमाना बनाया गया था, जिसके अंतर्गत कुल उपज का आधा हिस्सा (50 प्रतिशत) राज्य के लगान के रूप में नकद या अनाज के रूप में वसूला जाता था।
  2. 2. फिरोज शाह तुगलक के शासनकाल में सल्तनत वास्तुकला में एक नई विशेषता का विकास हुआ, जिसमें इमारतों की दीवारों को बाहर की ओर ढलानदार (Sloping walls) बनाना शामिल था, जो मुख्य रूप से तुगलक वास्तुकला की एक विशिष्ट पहचान बन गई, और इस शैली की सबसे उत्कृष्ट शुरुआत गयासुद्दीन तुगलक के मकबरे से होती है।
  3. 3. सल्तनत काल में राजस्व व्यवस्था के अंतर्गत 'खराज' (Kharaj) गैर-मुस्लिम प्रजा से लिया जाने वाला एक प्रकार का भू-राजस्व कर था, जबकि 'उश्र' (Ushr) केवल मुस्लिम किसानों द्वारा अपनी भूमि की पैदावार पर दिया जाने वाला धार्मिक कर था, और युद्ध में लूटे गए माल का चार-पंजी (80 प्रतिशत) हिस्सा राज्य के कोष में तथा एक-पंचमांश (20 प्रतिशत) हिस्सा सैनिकों में बांटा जाता था।

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: अलाउद्दीन खिलजी ने कृषि सुधारों के अंतर्गत भूमि की पैमाइश (Measurement) को अनिवार्य बनाया और 'बिसवा' पद्धति को भू-राजस्व निर्धारण का आधार बनाया। उसने दोआब क्षेत्र में भू-राजस्व की दर को बढ़ाकर उपज का 50 प्रतिशत (आधा हिस्सा) कर दिया था। कथन 2 सही है: तुगलक कालीन वास्तुकला की प्रमुख विशेषता 'ढलानदार दीवारें' (Sloping walls - Batter) थीं, जो रक्षात्मक दृष्टिकोण से बनाई जाती थीं। गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा इस वास्तुकला शैली का एक उत्कृष्ट और प्रारंभिक उदाहरण है। कथन 3 असत्य है: शरियत के नियमों के अनुसार युद्ध में लूटे गए माल (गनीमत) का चार-पंचमांश (80 प्रतिशत) हिस्सा सैनिकों में बांटा जाता था और एक-पंचमांश (20 प्रतिशत) हिस्सा (खुम्स) राज्य के कोष में जमा होता था, जबकि प्रश्न में इसके विपरीत उल्लेख किया गया है।
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