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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XII' के अंतर्गत 'वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद' (Finance, Property, Contracts and Suits) के प्रावधानों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 266 के अनुसार भारत और प्रत्येक राज्य की 'संचित निधि' (Consolidated Fund) से कोई भी धन विधि की प्राधिकृत प्रक्रिया के बिना नहीं निकाला जा सकता है, और इस निधि में केंद्र या राज्य द्वारा प्राप्त सभी राजस्व, जुटाए गए सभी ऋण और ऋणों की अदायगी में प्राप्त धन जमा किया जाता है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 267 के तहत संसद और राज्य विधानमंडल को कानून द्वारा क्रमशः 'भारत की आकस्मिकता निधि' (Contingency Fund of India) और 'राज्य की आकस्मिकता निधि' (Contingency Fund of State) की स्थापना करने की शक्ति दी गई है, जिन्हें राष्ट्रपति या राज्यपाल के व्यय आधिपत्य में रखा जाता है और इनसे संसद या राज्य विधानमंडल की पूर्व स्वीकृति के बिना भी अप्रत्याशित खर्चों के लिए अग्रिम धन दिया जा सकता है।
  3. 3. संघ और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों (Net Proceeds) के वितरण के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 275 के अंतर्गत 'वित्त आयोग' (Finance Commission) का प्रावधान किया गया है, जो एक स्थायी संवैधानिक निकाय है और प्रत्येक चार वर्ष की समाप्ति पर या उससे पहले राष्ट्रपति द्वारा गठित किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 266 के अनुसार, भारत की संचित निधि और राज्यों की संचित निधि की स्थापना की गई है। इन निधियों से बिना कानून की प्राधिकृत प्रक्रिया के एक भी रुपया नहीं निकाला जा सकता। केंद्र और राज्यों के सभी कर, राजस्व, ऋण और वसूली गई राशि इसी निधि में जमा होती है। कथन 2 सही है: संविधान के अनुच्छेद 267 के अंतर्गत संसद (भारत की आकस्मिकता निधि अधिनियम, 1950 के माध्यम से) और राज्य विधानमंडलों को आकस्मिकता निधि स्थापित करने की शक्ति दी गई है। यह निधि राष्ट्रपति या संबंधित राज्यपाल के распоря (disposal) में होती है, जिससे किसी अप्रत्याशित आपदा या खर्च के लिए बाद में संसद/विधानमंडल की स्वीकृति लेकर धनराशि निकाली जा सकती है। कथन 3 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत 'वित्त आयोग' (Finance Commission) का गठन किया जाता है, न कि अनुच्छेद 275 के तहत (अनुच्छेद 275 कुछ राज्यों को केंद्र से सहायता अनुदान/Grants-in-aid से संबंधित है)। इसके अलावा, वित्त आयोग कोई स्थायी निकाय नहीं है, बल्कि यह एक 'अस्थायी अर्ध-न्यायिक संवैधानिक निकाय' है जिसका गठन प्रत्येक पाँच वर्ष की समाप्ति पर या उससे पहले राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है, चार वर्ष पर नहीं।
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