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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' (मूल अधिकार - अनुच्छेद 12 से 35) के अंतर्गत प्रदत्त 'समानता के अधिकार' (अनुच्छेद 14-18) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान का अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समता (Equality before law) और विधियों के समान संरक्षण (Equal protection of the laws) दोनों की गारंटी देता है, जिसमें 'विधि के समक्ष समता' की अवधारणा ब्रिटिश मूल की है और इसका अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति के पक्ष में विशिष्ट विशेषाधिकारों का अभाव, जबकि 'विधियों के समान संरक्षण' का विचार अमेरिकी संविधान से लिया गया है जिसका तात्पर्य समान परिस्थितियों वाले व्यक्तियों के बीच समान व्यवहार से है।
  2. 2. संविधान का अनुच्छेद 15 राज्य को किसी भी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान या इनमें से किसी के भी आधार पर कोई भेदभाव करने से रोकता है, और इसके अंतर्गत राज्य को यह शक्ति भी प्राप्त है कि वह सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए नागरिकों के वर्गों की उन्नति के लिए या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए विशेष उपबंध (जैसे शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिए आरक्षण) बना सके, भले ही वे संस्थाएं निजी हों, अनुदानित हों या गैर-अनुदानित (अल्पसंख्यक संस्थाओं को छोड़कर)।
  3. 3. संविधान का अनुच्छेद 18 राज्य को सेना या विद्या संबंधी सम्मान के सिवाय अन्य कोई भी उपाधि प्रदान करने से रोकता है, तथा भारत का कोई भी नागरिक किसी विदेशी राज्य से बिना राष्ट्रपति की सहमति के कोई भी उपाधि स्वीकार नहीं कर सकता है, किंतु यदि कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है और वह भारत सरकार के अधीन किसी लाभ या विश्वास के पद को धारण करता है, तो वह राष्ट्रपति की सहमति के बिना किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि प्राप्त कर सकता है।

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: अनुच्छेद 14 में 'विधि के समक्ष समता' (Equality before law) का विचार ब्रिटिश विधि के शासन (Rule of Law) से लिया गया है, जिसका नकारात्मक अर्थ यह है कि कानून के समक्ष कोई भी व्यक्ति सर्वोच्च नहीं है और किसी के पास विशेष विशेषाधिकार नहीं हैं। वहीं, 'विधियों के समान संरक्षण' (Equal protection of the laws) का विचार अमेरिकी संविधान से प्रेरित है, जिसका सकारात्मक अर्थ है कि समान परिस्थितियों वाले लोगों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 15(4) और 15(5) के तहत राज्य को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) के लिए शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के संबंध में विशेष प्रावधान करने की शक्ति प्राप्त है। 93वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा जोड़े गए अनुच्छेद 15(5) के तहत निजी शिक्षण संस्थाओं (चाहे वे सहायता प्राप्त हों या गैर-असहायता प्राप्त, सिवाय अल्पसंख्यक संस्थानों के) में भी इनके लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है। कथन 3 गलत है: संविधान का अनुच्छेद 18(3) यह स्पष्ट करता है कि भारत का कोई नागरिक या ऐसा व्यक्ति जो भारत का नागरिक नहीं है किंतु भारत सरकार के अधीन किसी लाभ या विश्वास के पद को धारण करता है, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति के बिना किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि (Title) स्वीकार नहीं कर सकता है। अतः कोई विदेशी नागरिक भी जो भारत में लाभ का पद धारण करता है, राष्ट्रपति की अनुमति के बिना विदेशी उपाधि नहीं ले सकता। इसलिए कथन 3 असत्य है।
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