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भारतीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के संदर्भ में, भारत में 'हरित वित्तपोषण' (Green Finance), 'संप्रभु हरित बांड' (Sovereign Green Bonds - SGrBs) तथा सतत् विकास से जुड़ी पहलों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत सरकार के फ्रेमवर्क के तहत जारी किए जाने वाले संप्रभु हरित बांडों (SGrBs) से प्राप्त आय को विशेष रूप से ऐसी सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजनाओं में लगाया जाता है जो कार्बन तीव्रता को कम करने, ऊर्जा दक्षता में सुधार करने और अर्थव्यवस्था के हरित संक्रमण (Green Transition) को बढ़ावा देने में सहायक होती हैं।
- 2. 'भारतीय रिजर्व बैंक' (RBI) द्वारा प्रबंधित संप्रभु हरित बांडों के निर्गमन से प्राप्त धनराशि को सरकार के समेकित कोष (Consolidated Fund of India) में अन्य सामान्य उधारी के साथ मिला दिया जाता है, और इसके लिए व्यय की कोई अलग से ट्रैकिंग या हरित परिसंपत्तियों (Green Assets) की पहचान करना अनिवार्य नहीं होता है।
- 3. भारत के हरित बांड फ्रेमवर्क के अंतर्गत जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा उत्पादन, परमाणु ऊर्जा और ऐसे बड़े पनबिजली प्रोजेक्ट जिनकी क्षमता 25 मेगावाट से अधिक है, को स्पष्ट रूप से 'हरित' गतिविधियों की श्रेणी से बाहर रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारत सरकार के संप्रभु हरित बांड (Sovereign Green Bonds) फ्रेमवर्क के तहत जुटाई गई धनराशि का उपयोग उन सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजनाओं में किया जाता है जो अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता को कम करने में मदद करती हैं (जैसे नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, स्वच्छ परिवहन आदि)।
कथन 2 गलत है: संप्रभु हरित बांडों से प्राप्त आय को केंद्र सरकार के समेकित कोष में सामान्य उधारी के साथ नहीं मिलाया जाता है, बल्कि इसके लिए एक अलग से 'पब्लिक अकाउंट' (Public Account) में राशि रखी जाती है और नियमों के तहत इन निधियों के उपयोग की ट्रैकिंग (Green Assets Tracking) की जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पैसा केवल योग्य हरित परियोजनाओं पर ही खर्च हो रहा है।
कथन 3 सही है: भारत के संप्रभु हरित बांड फ्रेमवर्क के अनुसार, जीवाश्म ईंधनों के प्रत्यक्ष उपयोग से जुड़ी परियोजनाएं, परमाणु ऊर्जा और 25 मेगावाट से अधिक क्षमता वाले बड़े हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स को हरित गतिविधियों की श्रेणी से बाहर (Excluded) रखा गया है।
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सामान्य विज्ञान और जैव विविधता के संदर्भ में, 'आनुवंशिक रूप से संवर्धित (Genetically Modified - GM) फसलों' तथा 'जीन संपादन (Gene Editing)' तकनीकों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में किसी भी प्रकार की GM खाद्य या व्यावसायिक फसल के वाणिज्यिक उत्पादन के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत 'आनुवंशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति' (GEAC) से वैधानिक अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य है।
2. 'क्रिसप्र-कैस9' (CRISPR-Cas9) तकनीक का उपयोग केवल किसी जीव में बाहरी या परजीवी (Exogenous) जीन को प्रवेश कराने के लिए किया जाता है, न कि पौधे के अपने ही जीनोम के भीतर सटीक उत्परिवर्तन (Mutations) करने के लिए।
3. भारत में वर्तमान में केवल 'बीटी कपास' (Bt Cotton) को ही व्यावसायिक खेती के लिए विधिवत रूप से अनुमोदित किया गया है, जबकि वाणिज्यिक स्तर पर किसी भी जीएम खाद्य फसल (जैसे बीटी बैंगन या धारा मस्टर्ड हाइब्रिड - DMH-11) की खेती की अनुमति नहीं दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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