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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) तथा भारत में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के वैधानिक और नीतिगत प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत स्थापित 'केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड' (CPCB) को देश भर में वायु गुणवत्ता मानकों को निर्धारित करने और वायु प्रदूषण के निवारण तथा नियंत्रण के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी उपाय लागू करने की शक्ति प्राप्त है।
- 2. 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किया गया एक दीर्घकालिक, समय-बद्ध राष्ट्रीय स्तर की रणनीति है, जिसका उद्देश्य देश के गैर-प्राप्ति शहरों (Non-attainment Cities) में पार्टिकुलेट मैटर ($PM_{10}$ और $PM_{2.5}$) सांद्रता में वर्ष 2024 तक आधार वर्ष (2017) के मुकाबले 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी लाना था, जिसे बाद में संशोधित कर वर्ष 2026 तक 40 प्रतिशत तक की कमी का लक्ष्य रखा गया।
- 3. NCAP के अंतर्गत गैर-प्राप्ति शहर वे शहर हैं जो पिछले पाँच वर्षों के दौरान लगातार राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) को पूरा करने में असफल रहे हैं, और इस कार्यक्रम के तहत राज्यों को वित्तीय सहायता इन शहरों में केवल वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क स्थापित करने के लिए प्रदान की जाती है, न कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन या सड़क की धूल नियंत्रण जैसी उपचारात्मक गतिविधियों के लिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/से हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की स्थापना जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत की गई थी, और बाद में इसे वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत भी शक्तियां और कार्य सौंपे गए, न कि सीधे पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत।
कथन 2 सही है: 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा जनवरी 2019 में लॉन्च किया गया था। इसका प्रारंभिक लक्ष्य 2024 तक 2017 के आधार वर्ष की तुलना में PM10 और PM2.5 सांद्रता में 20-30% की कमी लाना था, जिसे बाद में अद्यतन करके 2026 तक 40% तक की कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
कथन 3 गलत है: गैर-प्राप्ति शहर (Non-attainment Cities) वे शहर हैं जो पिछले पाँच वर्षों (विशेषकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार) के दौरान राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) का लगातार उल्लंघन करते रहे हैं। इसके तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता केवल निगरानी नेटवर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सड़क की धूल नियंत्रण, वाहन प्रदूषण नियंत्रण, बायोमास और कचरा जलाने पर रोक, तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी व्यापक उपचारात्मक गतिविधियां शामिल हैं।
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत' (Continental Drift Theory) और 'प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत' (Plate Tectonics Theory) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अल्फ्रेड वेगनर द्वारा प्रतिपादित महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत के अनुसार, कार्बोनिफेरस युग में सभी महाद्वीप एक विशाल भूखंड के रूप में जुड़े थे जिसे 'पैंजिया' (Pangaea) कहा जाता था, और इसके चारों ओर 'पैंथलासा' (Panthalassa) नामक एक विशाल महासागर था, जिसे विस्थापित करने के लिए वेगनर ने मुख्य रूप से ज्वारीय बल (Tidal Force) और गुरुत्वाकर्षण के क्षैतिज घटकों को उत्तरदायी माना था।
2. प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत के अनुसार, पृथ्वी का स्थलमंडल (Lithosphere) कठोर टुकड़ों में विभाजित है जिन्हें 'विवर्तनिक प्लेटें' कहा जाता है, और ये प्लेटें एस्थेस्नोफेरस (Asthenosphere) के ऊपर तैरती हैं, जहाँ अभिसारी सीमाओं (Convergent Boundaries) पर भारी महासागरीय प्लेट हल्की महाद्वीपीय प्लेट के नीचे क्षेपित (Subduct) हो जाती है, जिससे गहरी महासागरीय खाइयाँ और वलित पर्वतों का निर्माण होता है।
3. 'रॉबर्ट डीट्ज़' और 'हैरी हेस' द्वारा प्रतिपादित 'समुद्र तल विस्तारण' (Sea Floor Spreading) की अवधारणा के अनुसार, मध्य-महासागरीय कटकों (Mid-Oceanic Ridges) के सहारे लगातार नए मैग्मा का ऊपर उठना और लावा का जमना होता है, जिसके कारण कटकों के दोनों ओर चट्टानों की आयु, घनत्व और चुंबकीय पट्टियाँ (Magnetic Stripes) सममित रूप से भिन्न होती जाती हैं तथा कटकों से दूर जाने पर चट्टानें और अधिक प्राचीन होती जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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इलाहाबाद की संधि (1765) के तहत किसे बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी मिली?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय लवणीयता' (Oceanic Salinity) और इसके स्थानिक वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरों की सतह पर लवणीयता का वितरण मुख्य रूप से वाष्पीकरण (Evaporation) और वर्षण (Precipitation) के शुद्ध अंतर (Net difference) द्वारा निर्धारित होता है, यही कारण है कि भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में उच्च वाष्पीकरण के कारण महासागरीय लवणीयता विश्व में सबसे अधिक पाई जाती है।
2. महासागरीय धाराओं (Ocean Currents) का लवणीयता के पुनर्वितरण में महत्वपूर्ण योगदान होता है; उदाहरण के लिए, गर्म जलधाराएं उच्च लवणीयता वाले क्षेत्रों से जल को निम्न लवणीयता वाले क्षेत्रों की ओर ले जाती हैं, जिससे महासागरीय बेसिन में लवणीयता का संतुलन बना रहता है।
3. ध्रुवीय क्षेत्रों में समुद्री बर्फ के जमने (Freezing of sea ice) की प्रक्रिया के दौरान बर्फ के क्रिस्टल से लवण बाहर निकल जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप आसपास के बचे हुए जल में लवणीयता की मात्रा बढ़ जाती है और वह जल सघन होकर नीचे बैठने लगता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 123' के अंतर्गत 'राष्ट्रपति की अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति' (Ordinance Making Power of President) के प्रावधानों और उनकी न्यायिक समीक्षा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति संसद की विधि बनाने की शक्ति के सह-विस्तारित (Co-extensive) होती है, जिसका अर्थ है कि राष्ट्रपति उसी विषय पर अध्यादेश प्रख्यापित कर सकता है जिस पर संसद कानून बना सकती है, और इस शक्ति का प्रयोग केवल तभी किया जा सकता है जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों।
2. सर्वोच्च न्यायालय के 'डीडी वसु वाद' और 'कुशल कुमार सिन्हा वाद' के ऐतिहासिक निर्णयों के अनुसार, राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) पूरी तरह से प्रतिबंधित है, और अध्यादेश जारी करने के लिए संतुष्टि का विषय पूरी तरह से कार्यपालिका का अनंतिम स्वविवेक होता है जिसे न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
3. प्रत्येक अध्यादेश को संसद के पुनः समवेत (Reassembly) होने पर उसके दोनों सदनों के समक्ष रखा जाना अनिवार्य होता है, और यदि संसद इसे बिना किसी अनुमोदन के छह सप्ताह की अवधि के भीतर अस्वीकार कर देती है या यदि इस अवधि के समाप्त होने से पहले ही दोनों सदन संकल्प द्वारा इसे नापसंद कर देते हैं, तो अध्यादेश स्वतः निष्प्रभाव (Cease to operate) हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं लोक वित्त के संदर्भ में, 'राजकोषीय घाटा' (Fiscal Deficit) और 'प्रभावी राजस्व घाटा' (Effective Revenue Deficit) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रभावी राजस्व घाटा, राजस्व घाटे और पूंजीगत परिसंपत्तियों के सृजन के लिए दिए जाने वाले अनुदानों (Grants for Creation of Capital Assets) के बीच का अंतर होता है, जिसे वर्ष 2011-12 के केंद्रीय बजट में अर्थव्यवस्था में पूंजीगत व्यय की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया था।
2. सकल राजकोषीय घाटा (Gross Fiscal Deficit) सरकार की कुल व्यय और कुल प्राप्तियों (ऋण को छोड़कर) का अंतर होता है, और इसके वित्तपोषण का मुख्य स्रोत भारतीय रिजर्व बैंक से आंतरिक उधारी और विदेशों से बाजार ऋण प्राप्त करना होता है, जिसमें राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के तहत मौद्रीकृत घाटा (Monetised Deficit) पूरी तरह से अनिवार्य और स्थायी रूप से वैध है।
3. 'राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003' के मूल प्रावधानों के अनुसार, केंद्र सरकार के लिए यह अनिवार्य किया गया था कि वह वर्ष 2008-09 तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 3 प्रतिशत तक सीमित करे, जबकि इसमें राजस्व घाटे को पूरी तरह से समाप्त करने का कोई सांविधिक लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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