BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
19 views

भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय अम्लीकरण' (Ocean Acidification) तथा समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. महासागरीय अम्लीकरण मुख्य रूप से वायुमंडल से मानवजनित कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) के बड़े पैमाने पर महासागरीय अवशोषण के कारण होता है, जिससे समुद्री जल के pH मान में वृद्धि होती है और जल अधिक क्षारीय (Alkaline) हो जाता है।
  2. 2. जब कार्बन डाइऑक्साइड समुद्री जल में घुल जाती है, तो यह जल के साथ अभिक्रिया करके कार्बोनिक अम्ल ($H_2CO_3$) बनाती है, जो वियोजित होकर हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) और कार्बोनेट आयनों ($CO_3^{2-}$) की सांद्रता को बढ़ा देता है।
  3. 3. महासागरीय अम्लीकरण के परिणामस्वरूप कार्बोनेट आयनों की उपलब्धता में कमी आती है, जिससे कैल्साइट और एरागैनाइट जैसे कैल्शियम कार्बोनेट खनिजों का उपयोग करके अपने कंकाल और कवच (Shells) बनाने वाले जीवों, जैसे प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) और पटेरोपोड (Pteropods) के लिए निर्माण और रखरखाव करना अत्यंत कठिन हो जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि महासागरीय अम्लीकरण के कारण समुद्री जल के pH मान में वृद्धि नहीं बल्कि **कमी** होती है, जिससे जल अधिक **अम्लीय** (Acidic) हो जाता है, न कि क्षारीय। औद्योगिक क्रांति के बाद से महासागरों का औसत pH मान लगभग 8.2 से घटकर 8.1 हो गया है (चूंकि pH पैमाना लघुगणकीय (logarithmic) होता है, इसलिए इसका अर्थ अम्लता में लगभग 30% की वृद्धि है)। कथन 2 गलत है क्योंकि जब $CO_2$ समुद्री जल में घुलती है और कार्बोनिक अम्ल बनाती है, तो वियोजित होने पर यह हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) की सांद्रता को तो बढ़ाती है, किंतु यह कार्बोनेट आयनों ($CO_3^{2-}$) की सांद्रता को **घटा** देती है (क्योंकि $H^+$ आयन मुक्त कार्बोनेट आयनों के साथ मिलकर बाइकार्बोनेट आयन बना लेते हैं)। कथन 3 सही है क्योंकि समुद्री जल में उपलब्ध कार्बोनेट आयनों की कमी के कारण कैल्सीफाइंग जीवों (जैसे प्रवाल भित्तियाँ, मोलस्क और कुछ प्रकार के प्लवक) के लिए कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) के अपने कंकाल और कवच का निर्माण करना और उन्हें बनाए रखना बहुत कठिन हो जाता है।
Share:

Related Questions

→ सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (National Biodiversity Authority - NBA) तथा 'जैव विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) का गठन 'जैव विविधता अधिनियम, 2002' के अंतर्गत एक सांविधिक, स्वायत्त निकाय के रूप में किया गया है, जिसका मुख्यालय चेन्नई, तमिलनाडु में स्थित है और यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कार्य करता है। 2. इस अधिनियम के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि भारत के किसी भी नागरिक या संस्था द्वारा देश में पाए जाने वाले जैविक संसाधनों (Biological Resources) का व्यावसायिक उपयोग या जैव-सर्वेक्षण (Bio-survey) करने से पूर्व NBA से पूर्व अनुमति प्राप्त करना आवश्यक होगा, भले ही वह व्यक्ति भारतीय नागरिक हो, बशर्ते वह जैविक संसाधनों तक पहुँच के लिए किसी विदेशी इकाई से जुड़ा न हो। 3. जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए त्रि-स्तरीय संरचना का प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, राज्य स्तर पर राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBBs), और स्थानीय स्तर पर पंचायतों एवं शहरी स्थानीय निकायों के माध्यम से 'जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ' (BMC) का गठन किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-क' के अंतर्गत 'मूल कर्तव्य' (Fundamental Duties - Article 51A) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल संविधान में नागरिकों के मूल कर्तव्यों का कोई प्रावधान नहीं था, इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था, तथा वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं जिन्हें केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू किया गया है। 2. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से संविधान में 11वाँ मूल कर्तव्य जोड़ा गया, जिसके तहत छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चों या प्रतिपाल्य (Ward) के लिए शिक्षा के अवसर प्रदान करना माता-पिता या संरक्षक का कर्तव्य बनाया गया है। 3. मूल कर्तव्यों को देश के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) की तरह न्यायोचित (Justiciable) बनाया गया है, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो संसद को यह संवैधानिक शक्ति प्राप्त है कि वह इसके उल्लंघन पर किसी भी प्रकार के आपराधिक या दंडात्मक कानून का निर्माण कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → क्या सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को परामर्श देने के लिए बाध्य है? → शोधकर्ताओं ने नागालैंड की किस जनजाति द्वारा उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक हर्बल फॉर्मूलेशन में कैंसर-रोधी क्षमता की खोज की है? → बहिष्कार का विचार सबसे पहले किसने दिया था?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.