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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय अम्लीकरण' (Ocean Acidification) तथा समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. महासागरीय अम्लीकरण मुख्य रूप से वायुमंडल से मानवजनित कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) के बड़े पैमाने पर महासागरीय अवशोषण के कारण होता है, जिससे समुद्री जल के pH मान में वृद्धि होती है और जल अधिक क्षारीय (Alkaline) हो जाता है।
- 2. जब कार्बन डाइऑक्साइड समुद्री जल में घुल जाती है, तो यह जल के साथ अभिक्रिया करके कार्बोनिक अम्ल ($H_2CO_3$) बनाती है, जो वियोजित होकर हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) और कार्बोनेट आयनों ($CO_3^{2-}$) की सांद्रता को बढ़ा देता है।
- 3. महासागरीय अम्लीकरण के परिणामस्वरूप कार्बोनेट आयनों की उपलब्धता में कमी आती है, जिससे कैल्साइट और एरागैनाइट जैसे कैल्शियम कार्बोनेट खनिजों का उपयोग करके अपने कंकाल और कवच (Shells) बनाने वाले जीवों, जैसे प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) और पटेरोपोड (Pteropods) के लिए निर्माण और रखरखाव करना अत्यंत कठिन हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि महासागरीय अम्लीकरण के कारण समुद्री जल के pH मान में वृद्धि नहीं बल्कि **कमी** होती है, जिससे जल अधिक **अम्लीय** (Acidic) हो जाता है, न कि क्षारीय। औद्योगिक क्रांति के बाद से महासागरों का औसत pH मान लगभग 8.2 से घटकर 8.1 हो गया है (चूंकि pH पैमाना लघुगणकीय (logarithmic) होता है, इसलिए इसका अर्थ अम्लता में लगभग 30% की वृद्धि है)।
कथन 2 गलत है क्योंकि जब $CO_2$ समुद्री जल में घुलती है और कार्बोनिक अम्ल बनाती है, तो वियोजित होने पर यह हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) की सांद्रता को तो बढ़ाती है, किंतु यह कार्बोनेट आयनों ($CO_3^{2-}$) की सांद्रता को **घटा** देती है (क्योंकि $H^+$ आयन मुक्त कार्बोनेट आयनों के साथ मिलकर बाइकार्बोनेट आयन बना लेते हैं)।
कथन 3 सही है क्योंकि समुद्री जल में उपलब्ध कार्बोनेट आयनों की कमी के कारण कैल्सीफाइंग जीवों (जैसे प्रवाल भित्तियाँ, मोलस्क और कुछ प्रकार के प्लवक) के लिए कैल्शियम कार्बोनेट ($CaCO_3$) के अपने कंकाल और कवच का निर्माण करना और उन्हें बनाए रखना बहुत कठिन हो जाता है।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017' [Wetlands (Conservation and Management) Rules, 2017] और इसके प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ये नियम केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 'पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986' के तहत अधिसूचित किए गए हैं, तथा इनके अंतर्गत भारत में सभी प्रकार की अंतर-देशीय और तटीय आर्द्रभूमियों को शामिल किया गया है, चाहे वे प्राकृतिक हों या कृत्रिम, स्थायी हों या अस्थायी।
2. इन नियमों के तहत देश में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में एक वैधानिक निकाय के रूप में 'राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण' (State Wetland Authority) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जिसकी अध्यक्षता संबंधित राज्य के पर्यावरण या वन मंत्री द्वारा की जाती है।
3. 'आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017' के अंतर्गत अधिसूचित आर्द्रभूमियों में अतिक्रमण, ठोस अपशिष्ट डंपिंग, उद्योगों की स्थापना और वाणिज्यिक गतिविधियों जैसे कृत्यों पर पूर्ण प्रतिबंध है, किंतु इनमें स्थानीय समुदायों द्वारा पारंपरिक नौकायन और मछली पकड़ने जैसी सनातनी प्रथाओं को प्रतिबंधित नहीं किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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जेष्ठ वर्ण महाविहार बौद्ध मठ को UNESCO Asia-Pacific Heritage Award 2025 प्रदान किया गया है, यह बौद्ध मठ किस देश में स्थित है?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) और उन्हें प्रभावित करने वाले कारकों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति और दिशा मुख्य रूप से प्रचलित हवाओं, पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होने वाले कोरिओलिस बल, महासागरीय जल के तापमान और लवणता में भिन्नता (घनत्व प्रवणता) तथा महाद्वीपीय तटरेखाओं के अवरोध द्वारा निर्धारित होती है।
2. उत्तरी गोलार्ध में कोरिओलिस बल के प्रभाव से महासागरीय धाराएँ अपनी मूल दिशा से दाईं ओर (Clockwise) और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (Anti-clockwise) विक्षेपित हो जाती हैं, जिसे 'फेरेल का नियम' भी कहा जाता है।
3. अटलांटिक महासागर में प्रवाहित होने वाली 'गल्फ स्ट्रीम' (Gulf Stream) एक ठंडी महासागरीय धारा है जो मैक्सिको की खाड़ी से उत्तर की ओर बहते हुए पश्चिमी यूरोप के तटीय क्षेत्रों के तापमान को अत्यधिक सर्द और हिमाच्छादित बना देती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 352' के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) की घोषणा और उसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए की जा सकती है, तथा 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के पश्चात राष्ट्रपति केवल 'युद्ध', 'बाह्य आक्रमण' या 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) के आधार पर ही आपातकाल की उद्घोषणा कर सकता है।
2. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा या उसके निरंतरता के अनुमोदन से संबंधित प्रत्येक प्रस्ताव को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा अपनी कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम 'दो-तिहाई बहुमत' (Special Majority) द्वारा पारित किया जाना अनिवार्य होता है।
3. राष्ट्रीय आपातकाल के प्रभावी होने के दौरान, संविधान का 'अनुच्छेद 19' स्वतः निलंबित हो जाता है, जिसके लिए राष्ट्रपति द्वारा किसी पृथक आदेश को जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है, बशर्ते आपातकाल युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर घोषित किया गया हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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