त्वरित लिंक्स
Civil services
17 views
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत केंद्र और राज्यों के बीच 'प्रशासनिक संबंधों' (Administrative Relations - अनुच्छेद 256 से 263) तथा अखिल भारतीय सेवाओं के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 256 के अनुसार प्रत्येक राज्य की कार्यकारी शक्ति का प्रयोग इस प्रकार किया जाएगा जिससे संसद द्वारा बनाई गई विधियों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके, और संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार किसी राज्य को ऐसे निर्देश देने तक है जो इस प्रयोजन के लिए आवश्यक हों।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 312 के अंतर्गत संसद को केवल 'भारतीय प्रशासनिक सेवा' (IAS) और 'भारतीय पुलिस सेवा' (IPS) जैसी अखिल भारतीय सेवाओं का गठन करने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, और संसद किसी भी नई अखिल भारतीय सेवा के गठन के लिए राज्य सभा के पूर्व अनुमोदन के बिना भी सीधे कानून बना सकती है।
- 3. अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को 'अंतर-राज्य परिषद' (Inter-State Council) की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों की जाँच करना और उन पर सलाह देना है, तथा यह परिषद किसी राज्य के भीतर कानून और व्यवस्था से जुड़े मामलों पर भी सीधे हस्तक्षेप कर सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 256 के अनुसार, प्रत्येक राज्य की कार्यकारी शक्ति का प्रयोग इस प्रकार किया जाएगा कि संसद द्वारा बनाई गई विधियों और उस राज्य में लागू किसी पूर्ववर्ती विधियों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके; और संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार राज्य को ऐसे निर्देश देने तक है जो भारत सरकार को इस प्रयोजन के लिए आवश्यक प्रतीत हों।
कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, अखिल भारतीय सेवाओं (AIS) के गठन के लिए यह आवश्यक है कि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित करे कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है। इसके बाद ही संसद कानून द्वारा ऐसी सेवाओं का गठन कर सकती है। अतः राज्य सभा का पूर्व अनुमोदन अनिवार्य है।
कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति अंतर-राज्य परिषद की स्थापना कर सकता है, जिसका कार्य राज्यों के बीच विवादों की जाँच करना, उन पर सलाह देना तथा सामान्य हित के विषयों पर चर्चा करना है। किंतु यह परिषद न्यायिक निकाय नहीं है और यह किसी राज्य के आंतरिक कानून और व्यवस्था के मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। इसके अलावा, अंतर-राज्यीय जल विवादों को अनुच्छेद 262 के तहत विशेष न्यायाधिकरणों (Tribunals) के दायरे में रखा गया है, न कि इस परिषद के अधिकार क्षेत्र में।
Related Questions
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 161' के अंतर्गत 'राज्य के राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) के प्रावधानों और उनकी सीमाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति की तरह राज्यपाल को भी किसी भी मामले में मृत्युदंड (Death Sentence) को माफ करने, उसका लघुकरण करने या उसका परिहार करने की पूर्ण और अनन्य संवैधानिक शक्ति प्राप्त होती है।
2. राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति का विस्तार राज्य की कार्यकारी शक्ति के सह-विस्तार (Co-extensive) तक होता है, जिसका अर्थ है कि जिन मामलों पर राज्य विधानमंडल कानून बनाने की शक्ति रखता है, राज्यपाल केवल उन्हीं विषयों से संबंधित अपराधों के दंडादेशों पर अपनी क्षमादान शक्ति का प्रयोग कर सकता है।
3. सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के अनुसार, राज्यपाल द्वारा क्षमादान की शक्ति के प्रयोग (अनुच्छेद 161 के तहत) को न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है, और किसी भी स्थिति में न्यायालय राज्यपाल के इस निर्णय की वैधता की जांच नहीं कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX-क' (भाग 9ए) के अंतर्गत 'नगरपालिकाओं' (Municipalities - Articles 243P-243ZG) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243W के अंतर्गत राज्य के विधानमंडल को विधि द्वारा नगरपालिकाओं को ऐसी शक्तियाँ और प्राधिकार प्रदान करने का अधिकार दिया गया है जो उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक हों, तथा बारहवीं अनुसूची में कुल 18 विषयों का उल्लेख किया गया है जिनके संबंध में नगरपालिकाओं को योजनाएँ तैयार करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
2. अनुच्छेद 243Y के प्रावधानों के तहत प्रत्येक राज्य में पंचायतों के लिए गठित 'राज्य वित्त आयोग' ही नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की भी समीक्षा करता है और राज्यपाल को अपनी संस्तुतियाँ सौंपता है, क्योंकि संविधान में नगरपालिकाओं के लिए किसी पृथक् या स्वतंत्र वित्त आयोग के गठन का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
3. अनुच्छेद 243Q के अनुसार प्रत्येक राज्य में संक्रमणकालीन क्षेत्र (urban area से rural area में परिवर्तित होने वाले क्षेत्र) के लिए नगर पंचायत, लघुतर नगरीय क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद, और वृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु राज्यपाल को यह शक्ति प्राप्त है कि वह औद्योगिक रूप से विकसित क्षेत्रों को इस प्रकार की नगरपालिका के गठन से छूट दे सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
अशोक के अभिलेखों के संदर्भ में कौन से कथन सत्य हैं: प्राकृत भाषा और शाहबाजगढ़ी-मानसेहरा में खरोष्ठी लिपि?
→
दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) किस संविधान संशोधन द्वारा लाया गया था?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-क' (भाग 4ए) के अंतर्गत 'मूल कर्तव्य' (Fundamental Duties - Article 51A) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की संस्तुतियों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IV-क में जोड़ा गया था, तथा वर्तमान में अनुच्छेद 51A के तहत कुल 11 मूल कर्तव्य नागरिकों के लिए निर्धारित किए गए हैं।
2. मूल कर्तव्यों का विचार पूर्ववर्ती सोवियत संघ (USSR) के संविधान से प्रेरित था, और जापान को छोड़कर विश्व के किसी भी प्रमुख लोकतांत्रिक देश के संविधान में नागरिकों के मूल कर्तव्यों का इस प्रकार का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है।
3. मूल कर्तव्यों की प्रकृति न्यायोचित (Justiciable) नहीं है, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक इनका उल्लंघन करता है या पालन नहीं करता है, तो उसे सीधे तौर पर किसी न्यायालय द्वारा दंडित नहीं किया जा सकता, जब तक कि संसद ने इसके कार्यान्वयन के लिए कोई विशिष्ट आपराधिक या दंडात्मक कानून न बनाया हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.