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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) तथा उनके निर्माण और जलवायु पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति के लिए मुख्य रूप से प्रचलित हवाएँ (Prevailing Winds), पृथ्वी का घूर्णन (कोरिऑलिस बल), और जल के घनत्व में भिन्नता (तापमान और लवणता के कारण) उत्तरदायी होती हैं, जिसमें व्यापारिक हवाएँ और पछुआ हवाएँ प्रमुख भूमिका निभाती हैं।
- 2. 'एल नीनो' (El Niño) घटना के दौरान, दक्षिणी प्रशांत महासागर में पेरू के तट के पास ठंडी धारा (पेरू या हम्बोल्ट धारा) का प्रभाव अत्यधिक प्रबल हो जाता है, जिससे उस क्षेत्र में जल का तापमान असामान्य रूप से गिर जाता है और भारतीय मानसून पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- 3. उत्तरी गोलार्ध में महासागरीय धाराएँ कोरिऑलिस बल के प्रभाव के कारण अपनी दाईं ओर (Clockwise) मुड़ जाती हैं, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में वे अपनी बाईं ओर (Counter-clockwise) मुड़ जाती हैं, जो फेरेल के नियम के अनुरूप है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति के लिए प्रचलित हवाएँ (जैसे व्यापारिक पवनें और पछुआ पवनें), पृथ्वी का घूर्णन (कोरिऑलिस बल), और तापमान तथा लवणता में भिन्नता के कारण जल के घनत्व में अंतर मुख्य कारक हैं। कथन 2 गलत है: 'एल नीनो' (El Niño) के दौरान पेरू के तट के पास ठंडी हम्बोल्ट धारा का प्रभाव कमजोर हो जाता है और उसकी जगह एक गर्म जलधारा ले लेती है, जिससे वहाँ जल का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। इसका भारतीय दक्षिण-पश्चिम मानसून पर आमतौर पर प्रतिकूल (नकारात्मक) प्रभाव पड़ता है, जिससे सूखा या कम वर्षा की स्थिति बन सकती है। कथन 3 सही है: कोरिऑलिस बल के प्रभाव के कारण उत्तरी गोलार्ध में महासागरीय धाराएँ घड़ी की सुई की दिशा में (Clockwise) और दक्षिणी गोलार्ध में घड़ी की सुई के विपरीत दिशा में (Counter-clockwise) प्रवाहित होती हैं। अतः केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
Related Questions
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संसद के विशेषाधिकारों' (Parliamentary Privileges) और 'अनुच्छेद 105' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत संसद के प्रत्येक सदन को, उसके सदस्यों को और उसकी समितियों को कुछ विशेषाधिकार प्राप्त हैं, जिनके तहत यदि संसद द्वारा अपने किसी विशेषाधिकार के हनन (Breach of privilege) या अवमानना (Contempt) के लिए किसी व्यक्ति को दंडित किया जाता है, तो उस संसदीय निर्णय या प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) किसी भी स्थिति में न्यायालय द्वारा नहीं की जा सकती है।
2. जब संसद का सत्र चल रहा हो, तो संसद के सदस्यों को सिविल मामलों में गिरफ्तारी से सदन के आरंभ होने से 40 दिन पूर्व और सदन की समाप्ति के 40 दिन बाद तक छूट प्राप्त होती है, किंतु यह उन्मुक्ति आपराधिक मामलों या निवारक नजरबंदी (Preventive Detention) के मामलों में लागू नहीं होती है।
3. भारत के संविधान में ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स (House of Commons) के विशेषाधिकारों को मूल रूप से भारतीय संसद के लिए संदर्भ के रूप में अपनाया गया था, किंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के पश्चात यह स्पष्ट कर दिया गया कि जब तक संसद अपने विशेषाधिकारों को संहिताबद्ध (Codify) नहीं करती है, तब तक वे विशेषाधिकार वही माने जाएंगे जो 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के समय थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (Multidimensional Poverty Index - MPI) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Global MPI) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाता है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीन समान भारांश वाले आयामों के अंतर्गत कुल दस संकेतकों का उपयोग करता है।
2. भारत के राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक का आधार तैयार करने और उसकी नियमित प्रगति की निगरानी करने के लिए 'नीति आयोग' (NITI Aayog) नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है, तथा राष्ट्रीय स्तर पर यह सूचकांक वैश्विक MPI के तीन आयामों को ही बनाए रखता है, किंतु इसमें संकेतकों की कुल संख्या दस से बढ़ाकर बारह कर दी गई है।
3. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों पर आधारित नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वर्ष 2015-16 और 2019-21 के बीच बहुआयामी गरीबी में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, और उत्तर प्रदेश राज्य में इस अवधि के दौरान गरीबों की संख्या में सबसे अधिक संख्यात्मक (absolute) कमी दर्ज की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण कानून और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत स्थापित एनजीटी (NGT) को पर्यावरण से जुड़े किसी भी मामले में सिविल न्यायालयों की तरह समन जारी करने, साक्ष्य मांगने और दस्तावेजों की जांच करने की व्यापक शक्तियां प्राप्त हैं, किंतु यह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के सख्त नियमों से बंधा नहीं है बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) पर कार्य करता है।
2. राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा पर्यावरण संरक्षण या प्रदूषण से संबंधित मामलों में दिए गए किसी भी आदेश, निर्णय या पुरस्कार के खिलाफ पहली और अंतिम अपील सीधे तौर पर केवल संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) में ही दायर की जा सकती है, सर्वोच्च न्यायालय में नहीं।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 352' के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) की उद्घोषणा और इसके विभिन्न संवैधानिक प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार, राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल तभी कर सकता है जब मंत्रिपरिषद का यह लिखित निर्णय उसे संसूचित किया जाता है कि 'युद्ध', 'बाह्य आक्रमण' या 'सಶಸ್त्त् विद्रोह' (Armed Rebellion) के कारण भारत या उसके राज्यक्षेत्र के किसी भाग की सुरक्षा को गंभीर खतरा है।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को हटाकर उसकी जगह 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द को जोड़ा गया था, तथा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को केवल उच्चतम न्यायालय में ही चुनौती दी जा सकती है, उच्च न्यायालयों का इसके न्यायिक समीक्षा से कोई संबंध नहीं है।
3. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा करने वाला अनुमोदन प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी उद्घोषणा की तारीख से एक महीने के भीतर संसद के कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत (विशेष बहुमत) द्वारा पारित किया जाना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय अम्लष्टीकरण' (Ocean Acidification) तथा महासागरीय जैव-रासायनिक चक्रों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय अम्लष्टीकरण मुख्य रूप से वायुमंडल में मानवजनित कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) के बढ़ते उत्सर्जन के कारण होता है, जब महासागर इस $CO_2$ का लगभग एक-चौथाई हिस्सा अवशोषित कर लेते हैं, जिससे महासागरीय जल में हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) की सांद्रता बढ़ जाती है और pH मान में गिरावट आती है।
2. इस प्रक्रिया के दौरान महासागरीय जल में कार्बोनेट आयनों ($CO_3^{2-}$) की उपलब्धता कम हो जाती है, जो कैल्साइट (Calcite) और एरागोनाइट (Aragonite) जैसी खनिजों के निर्माण के लिए आवश्यक होते हैं, जिससे कोरल रीफ (प्रवाल भित्तियों), मूँगे और शेल्स (कवच) बनाने वाले समुद्री जीवों के लिए कैल्शियम कार्बोनेट का निर्माण करना अत्यंत कठिन हो जाता है।
3. महासागरीय अम्लष्टीकरण की यह समस्या उष्णकटिबंधीय (Tropical) क्षेत्रों के गर्म महासागरों में सबसे अधिक गंभीर रूप से प्रकट होती है, क्योंकि ठंडे पानी की तुलना में गर्म पानी में $CO_2$ की घुलनशीलता (Solubility) बहुत अधिक होती है, जिससे उच्च अक्षांशों और ध्रुवीय क्षेत्रों के महासागर इस प्रभाव से पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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