त्वरित लिंक्स
Civil services
18 views
सामान्य विज्ञान और जैव विविधता के संदर्भ में, 'आनुवंशिक रूप से संवर्धित (Genetically Modified - GM) फसलों' तथा 'जीन संपादन (Gene Editing)' तकनीकों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत में किसी भी प्रकार की GM खाद्य या व्यावसायिक फसल के वाणिज्यिक उत्पादन के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत 'आनुवंशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति' (GEAC) से वैधानिक अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य है।
- 2. 'क्रिसप्र-कैस9' (CRISPR-Cas9) तकनीक का उपयोग केवल किसी जीव में बाहरी या परजीवी (Exogenous) जीन को प्रवेश कराने के लिए किया जाता है, न कि पौधे के अपने ही जीनोम के भीतर सटीक उत्परिवर्तन (Mutations) करने के लिए।
- 3. भारत में वर्तमान में केवल 'बीटी कपास' (Bt Cotton) को ही व्यावसायिक खेती के लिए विधिवत रूप से अनुमोदित किया गया है, जबकि वाणिज्यिक स्तर पर किसी भी जीएम खाद्य फसल (जैसे बीटी बैंगन या धारा मस्टर्ड हाइब्रिड - DMH-11) की खेती की अनुमति नहीं दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारत में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत, आनुवंशिक रूप से संवर्धित जीवों (GMOs) और उत्पादों के वाणिज्यिक उपयोग, परीक्षण और पर्यावरण में छोड़े जाने से पहले 'आनुवंशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति' (GEAC) से अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य है, जो पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन कार्य करती है।
कथन 2 गलत है: CRISPR-Cas9 एक क्रांतिकारी जीन संपादन तकनीक है, जिसका मुख्य कार्य जीनोम के भीतर विशिष्ट स्थानों पर डीएनए को सटीकता के साथ काटना और बदलना है। इसका उपयोग केवल बाहरी जीन डालने के लिए नहीं, बल्कि पौधे के अपने ही जीन को संशोधित करने या निष्क्रिय करने के लिए भी किया जाता है (इसके माध्यम से सिसोजेनिक या इंट्रोजेनिक परिवर्तन किए जा सकते हैं)।
कथन 3 गलत है: हालांकि बीटी कपास भारत में एकमात्र वाणिज्यिक रूप से स्वीकृत जीएम फसल है, लेकिन पर्यावरण मंत्रालय के अधीन वैधानिक निकायों द्वारा 'धारा मस्टर्ड हाइब्रिड' (DMH-11) जैसी जीएम सरसों की किस्मों के पर्यावरणीय विमोचन (Environmental Release) के लिए भी अनुमोदन प्रदान किया जा चुका है (यद्यपि विधिक मामलों के कारण इसका कार्यान्वयन विचाराधीन रहा है), इसलिए यह कहना पूर्णतः सही नहीं है कि कोई भी खाद्य फसल अनुमोदित नहीं हुई है, तथा मुख्य रूप से कथन 2 की तकनीकी त्रुटि और कथन 3 की व्यापकता के कारण केवल कथन 1 ही सही है।
Related Questions
→
भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'संसदीय समितियों' (Parliamentary Committees) और विशेष रूप से 'लोक लेखा समिति' (Public Accounts Committee - PAC) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लोक लेखा समिति का गठन प्रत्येक वर्ष किया जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों से कुल 22 सदस्य होते हैं (15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से), और इस समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष द्वारा पारंपरिक रूप से विपक्ष के वरिष्ठ सदस्यों में से की जाती है।
2. यह समिति भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) द्वारा प्रस्तुत वार्षिक लेखा-परीक्षण प्रतिवेदनों (Audit Reports) की जाँच करती है, और CAG इस समिति के 'मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक' (Friend, Philosopher and Guide) के रूप में कार्य करता है।
3. चूंकि लोक लेखा समिति के पास नीतिगत मामलों की समीक्षा करने का पूर्ण अधिकार होता है, इसलिए यह किसी सरकारी नीति की वित्तीय विवेकशीलता (Financial Prudence) के साथ-साथ उसकी राजनीतिक या प्रशासनिक उपयोगिता पर भी खुली आलोचनात्मक समीक्षा कर सकती है और अंतिम निर्णय ले सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भाखड़ा-नांगल परियोजना किस नदी पर विकसित की गई है?
→
स्वाभिमान आंदोलन का किस राजनीतिक दल के साथ गहरा वैचारिक संबंध था?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 123' के अंतर्गत राष्ट्रपति की 'अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति' (Ordinance-making Power) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति संसद के सत्र में न होने की स्थिति तक ही सीमित है, और यह शक्ति सह-विस्तृत (Co-extensive) है उस विषय-क्षेत्र तक जिस पर संसद कानून बना सकती है।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'डी.सी. वाधवा बनाम बिहार राज्य (1987)' मामले में यह प्रतिपादित किया गया कि कार्यपालिका द्वारा अध्यादेशों का बार-बार पुनःप्रख्यापन (Repromulgation) करना संवैधानिक धोखाधड़ी (Constitutional Fraud) है और यह संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है।
3. राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश को संसद की पुनर्समेकन बैठक (Re-assembly) के बाद दोनों सदनों द्वारा छह सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से अनुमोदित किया जाना चाहिए, अन्यथा यह स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, और इसे किसी भी स्थिति में छह महीने से अधिक की अवधि के लिए आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
सहायक संधि (Subsidiary Alliance) को किसने लोकप्रिय बनाया?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.