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सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण के संदर्भ में, भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wild Life (Protection) Act, 1972) तथा इसके अंतर्गत स्थापित संरक्षित क्षेत्रों के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न अनुसूचियों (Schedules) को वर्ष 2022 में संशोधित करके उनके स्वरूप को सुव्यवस्थित किया गया है, जिसके तहत अब इस अधिनियम में खतरनाक वन्यजीव प्रजातियों और पौधों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर नियंत्रण से संबंधित 'साइट्स' (CITES) के प्रावधानों को प्रभावी बनाने के लिए एक नई अनुसूची भी जोड़ी गई है।
- 2. किसी भी क्षेत्र को 'राष्ट्रीय उद्यान' (National Park) या 'वन्यजीव अभयारण्य' (Wildlife Sanctuary) के रूप में अधिसूचित करने का अधिकार केवल और केवल केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के पास निहित है, और राज्य सरकारों के पास इस संबंध में कोई कार्यकारी शक्ति नहीं होती है।
- 3. वन्यजीव अभयारण्यों की तुलना में राष्ट्रीय उद्यानों में मानवीय गतिविधियों (जैसे पशुओं को चराना, निजी स्वामित्व के अधिकार, और वानिकी उत्पादों का संग्रहण) पर अधिक कठोर प्रतिबंध होते हैं, तथा राष्ट्रीय उद्यान के भीतर किसी भी प्रकार की मानवीय गतिविधि की अनुमति राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन (Chief Wildlife Warden) की विशेष अनुमति के बिना नहीं दी जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022 द्वारा इस अधिनियम की अनुसूचियों की संख्या को कम करके अधिक तर्कसंगत बनाया गया है। अब इसमें वन्यजीवों के संरक्षण के लिए अनुसूचियाँ हैं और साथ ही CITES (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora) के परिशिष्टों के तहत आने वाले नमूनों के विनियमन के लिए एक अलग अनुसूची भी जोड़ी गई है।
कथन 2 गलत है: किसी क्षेत्र को 'राष्ट्रीय उद्यान' या 'वन्यजीव अभयारण्य' के रूप में अधिसूचित करने की शक्ति राज्य सरकार के पास होती है (वन्यजीव अभयारण्यों के मामले में राज्य सरकार द्वारा धारा 26A के तहत तथा राष्ट्रीय उद्यानों के मामले में धारा 35 के तहत अधिसूचना जारी की जाती है)। हालांकि, राष्ट्रीय उद्यानों की सीमाओं में परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की संस्तुति आवश्यक होती है।
कथन 3 सही है: वन्यजीव अभयारण्यों की तुलना में राष्ट्रीय उद्यानों की विधिक स्थिति अधिक कठोर होती है। राष्ट्रीय उद्यान के भीतर पशुओं को चराना, निजी भूमि अधिकार या अन्य मानवीय गतिविधियों की अनुमति सामान्यतः नहीं दी जाती है, जब तक कि राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन द्वारा इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत लिखित रूप में ऐसी अनुमति या छूट प्रदान न की जाए।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, भारत में 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (National Board for Wildlife - NBWL) तथा 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' के विधिक एवं संस्थागत प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (NBWL) की स्थापना 'वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972' (वर्ष 2003 के संशोधनों के उपरांत) के अंतर्गत एक सांविधिक (Statutory) शीर्ष सलाहकार निकाय के रूप में की गई है, जिसकी अध्यक्षता पदेन रूप से केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री द्वारा की जाती है, और यह देश में वन्यजीवों तथा संरक्षित क्षेत्रों से जुड़ी नीतियों के निर्धारण के लिए उत्तरदायी है।
2. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी राष्ट्रीय उद्यान (National Park) या वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary) की सीमाओं में परिवर्तन या उसके अंतर्गत किसी भी गैर-वानिकी गतिविधियों के लिए वाणिज्यिक उपयोग हेतु 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' की स्थायी समिति (Standing Committee) की पूर्व अनुमति या संस्तुति लेना अनिवार्य है।
3. 'गोवा फाउंडेशन बनाम भारत संघ' और अन्य संबंधित न्यायिक मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि प्रत्येक संरक्षित क्षेत्र (Protected Area) के चारों ओर पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील जोन (Eco-Sensitive Zone - ESZ) का सीमांकन करना अनिवार्य है, जिसकी न्यूनतम चौड़ाई अधिनियम के तहत सभी राज्यों के लिए एकसमान रूप से कम से कम 10 किलोमीटर तय की गई है, जिसमें किसी भी प्रकार के छूट का कोई प्रावधान नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय उद्यान' (National Parks), 'वन्यजीव अभयारण्य' (Wildlife Sanctuaries) और 'संरक्षित आरक्षित क्षेत्र' (Conservation Reserves) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत किसी क्षेत्र को 'राष्ट्रीय उद्यान' के रूप में घोषित करने की शक्ति केवल राज्य सरकार के पास होती है, और एक बार राष्ट्रीय उद्यान घोषित हो जाने के बाद उस क्षेत्र में पशुओं को चराने या निजी स्वामित्व के अधिकारों की अनुमति पूरी तरह से प्रतिबंधित होती है, जबकि वन्यजीव अभयारण्यों में मुख्य वन्यजीव वार्डन की अनुमति से कुछ सीमित मानवीय अधिकारों की अनुमति दी जा सकती है।
2. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में वर्ष 2003 के संशोधन के माध्यम से 'संरक्षित आरक्षित क्षेत्रों' (Conservation Reserves) और 'सामुदायिक आरक्षित क्षेत्रों' (Community Reserves) की नई श्रेणियों को जोड़ा गया, जिसके तहत केंद्र सरकार राज्य सरकारों के परामर्श से किसी भी निजी या सामुदायिक भूमि को, जो राष्ट्रीय उद्यानों या अभयारण्यों को जोड़ती हो, 'संरक्षित आरक्षित क्षेत्र' के रूप में घोषित कर सकती है।
3. राष्ट्रीय उद्यानों की सीमाओं में परिवर्तन या उनका विघटन केवल संबंधित राज्य के विधानमंडल द्वारा साधारण बहुमत से एक प्रस्ताव पारित करके किया जा सकता है, जिसके लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की पूर्व अनुमति प्राप्त करना आवश्यक नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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कान्हा राष्ट्रीय उद्यान किस राज्य में स्थित है?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'हरित बांड' (Green Bonds) और भारत में उनके नियमन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हरित बांड एक प्रकार का निश्चित आय वाला उपकरण (Fixed-income instrument) है, जिसे विशेष रूप से जलवायु-अनुकूल और पर्यावरण के प्रति सकारात्मक परियोजनाओं, जैसे कि अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, और संधारणीय जल प्रबंधन के वित्तपोषण के लिए पूंजी जुटाने हेतु जारी किया जाता है।
2. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 'SEBI (Issue and Listing of Non-Convertible Securities) Regulations, 2021' के अंतर्गत हरित ऋण पत्रों (Green Debt Securities) के लिए विशिष्ट दिशा-निर्देश और प्रकटीकरण मानक निर्धारित किए हैं, जिसके तहत जारीकर्ता को जुटाई गई आय के उपयोग पर स्वतंत्र तृतीय-पक्षीय प्रमाणन (Third-party certification) प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
3. भारत सरकार द्वारा संप्रभु हरित बांड (Sovereign Green Bonds) फ्रेमवर्क के तहत जारी किए गए बांडों से प्राप्त होने वाली आय को देश के समेकित निधि (Consolidated Fund of India) में जमा किया जाता है, जिसका उपयोग केंद्र सरकार के सामान्य राजकोषीय घाटे को पाटने के लिए किसी भी सरकारी उद्देश्य हेतु किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाएँ' (All India Services - अनुच्छेद 312) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन से एक संकल्प पारित करती है कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक या expedient है, तो संसद विधि द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अलावा किसी भी नई अखिल भारतीय सेवा के सृजन का प्रावधान कर सकती है।
2. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, किंतु वे केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के अधीन सेवा करते हैं तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई या सेवा से हटाने (Dismissal) की अंतिम शक्ति संबंधित राज्य सरकार के पास होती है, जिसके नियंत्रण में वे कार्यरत होते हैं।
3. भारतीय वन सेवा (IFS) को वर्ष 1966 में अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 के तहत एक अखिल भारतीय सेवा के रूप मेंconstitute (गठित) किया गया था, जो आज़ादी के बाद सृजित की गई पहली नई अखिल भारतीय सेवा थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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