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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' (राज्य के नीति निर्देशक तत्व - DPSP) तथा इसके न्यायिक प्रवर्तन एवं संवैधानिक विकास के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 37 में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित किया गया है कि नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मौलिक हैं, और भले ही इन्हें किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता, किंतु देश के शासन में इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा।
  2. 2. सर्वोच्च न्यायालय ने मिनर्वा मिल्स वाद (1980) में यह स्पष्ट किया था कि संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) को बनाए रखने के लिए नीति निर्देशक तत्वों (भाग IV) को मौलिक अधिकारों (भाग III) पर पूर्ण प्राथमिकता दी जा सकती है, और इस उद्देश्य के लिए अनुच्छेद 14 और 19 के अधिकारों को पूरी तरह से निलंबित किया जा सकता है।
  3. 3. यद्यपि मूल संविधान में केवल अनुच्छेद 39(b) और 39(c) को ही मौलिक अधिकारों पर प्राथमिकता दी गई थी, किंतु 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 31C का विस्तार करके यह प्रावधान कर दिया गया कि राज्य द्वारा नीति निर्देशक तत्वों को लागू करने के लिए बनाए गए किसी भी कानून को इस आधार पर अमान्य नहीं ठहराया जाएगा कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 के अधिकारों का उल्लंघन करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार, नीति निर्देशक तत्व देश के शासन में मौलिक हैं और देश के विधि निर्माण में इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, यद्यपि इन्हें न्यायालय द्वारा प्रवर्तित (Enforceable) नहीं कराया जा सकता है। कथन 2 गलत है: मिनर्वा मिल्स वाद (1980) में सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्धारित किया था कि मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच संतुलन ही संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) का एक हिस्सा है। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि DPSP को लागू करने के लिए अनुच्छेद 14 और 19 के अधिकारों को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जा सकता (केवल अनुच्छेद 39(b) और (c) के मामलों में ही अनुच्छेद 14 और 19 पर सीमित प्राथमिकता दी गई थी, न कि सभी DPSP पर)। कथन 3 सही है: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 31C में संशोधन करके यह व्यापक प्रावधान कर दिया गया कि राज्य के सभी या किसी भी नीति निर्देशक तत्व को लागू करने वाले कानून को अनुच्छेद 14 या 19 के उल्लंघन के आधार पर शून्य घोषित नहीं किया जा सकता (हालांकि केशवानंद भारती वाद 1973 के तहत न्यायिक समीक्षा के दायरे से इसे बाहर नहीं किया गया)। अतः केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
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