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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, मध्यकालीन भारत के दौरान प्रचलित 'अकबर की भू-राजस्व प्रणाली' (दहसाला व्यवस्था) तथा उससे संबंधित प्रशासनिक सुधारों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. दहसाला व्यवस्था (Zabt System), जिसे टोडरमल की सहायता से लागू किया गया था, के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के दौरान विभिन्न फसलों के औसत उत्पादन तथा उनके औसत बाजार मूल्यों का आकलन करके राजस्व का निर्धारण किया जाता था।
  2. 2. इस व्यवस्था के तहत भूमि का वर्गीकरण उसकी उर्वरता के आधार पर चार श्रेणियों—पोलज, परती, चाचर और बंजर—में किया गया था, जिनमें से 'पोलज' वह भूमि थी जिस पर प्रतिवर्ष खेती की जाती थी और उसे कभी भी खाली नहीं छोड़ा जाता था।
  3. 3. 'नस्क' या 'कंकूट' प्रणाली दहसाला पद्धति से पूरी तरह भिन्न थी, जिसमें फसल के कटने से पहले खेत में खड़े फसल के अनुमान (Crop Estimate) के आधार पर राज्य का हिस्सा तय किया जाता था, और यह प्रणाली केवल चुनिंदा प्रांतों में ही लागू थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल के सहयोग से 1580 में 'दहसाला' (या जब्ती) प्रणाली की शुरुआत की गई थी। इसके तहत पिछले दस वर्षों (1570-1580) के दौरान विभिन्न फसलों के औसत उत्पादन और उनके औसत प्रचलित बाजार मूल्यों का सांख्यिकीय विश्लेषण करके राज्य का राजस्व निश्चित किया जाता था। कथन 2 गलत है: भूमि का वर्गीकरण चार श्रेणियों (पोलज, परती, चाचर और बंजर) में जरूर किया गया था, लेकिन 'पोलज' वह उपजाऊ भूमि थी जिस पर लगातार प्रतिवर्ष (या हर फसल के मौसम में) खेती की जाती थी, इसका यह अर्थ नहीं है कि उसे कभी खाली नहीं छोड़ा जाता था; बल्कि 'परती' वह भूमि थी जिसे अपनी उर्वरता पुनः प्राप्त करने के लिए कुछ समय (एक या दो वर्ष) के लिए खाली छोड़ा जाता था। कथन 3 गलत है: 'कंकूट' (या गल्लाबाक्री/बटाई) और 'नस्क' अलग पद्धतियाँ थीं। 'नस्क' एक प्रकार का अनुमान (Estimate) था जो पिछले संग्रह के आधार पर लगाया जाता था, जबकि कंकूट प्रणाली में खड़े फसल का अनुमान लगाकर भाग तय किया जाता था। दहसाला प्रणाली जब्ती प्रणाली का ही एक परिष्कृत रूप थी, न कि नस्क या कंकूट। अतः केवल कथन 1 सही है।
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