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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' (राजभाषा - अनुच्छेद 343 से 351) तथा संसदीय और विधिक भाषा के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा मूल संविधान में यह प्रावधान किया गया था कि संविधान के प्रारंभ से पंद्रह वर्ष की अवधि (अर्थात 1965 तक) के लिए सभी शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग जारी रहेगा, जिसे बाद में संसद द्वारा 'राजभाषा अधिनियम, 1963' के माध्यम से अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 348 के अंतर्गत यह उपबंधित किया गया है कि जब तक संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे, तब तक उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्रवाइयाँ केवल अंग्रेजी भाषा में ही होंगी, और संसद या राज्य के विधानमंडल द्वारा पारित किसी भी विधेयक या अधिनियम का आधिकारिक पाठ भी केवल अंग्रेजी में ही मान्य होगा।
  3. 3. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें समय-समय पर विभिन्न संविधान संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधन) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, और किसी भी भाषा को इस अनुसूची में शामिल करने का अर्थ यह है कि संघ की लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं में माध्यम के रूप में उस भाषा को अनिवार्य रूप से मान्यता मिल जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 343(1) के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है। मूल संविधान में यह व्यवस्था थी कि 1965 के बाद शासकीय कार्यों के लिए अंग्रेजी का प्रयोग समाप्त हो जाएगा, किंतु अहिंदीभाषी राज्यों के विरोध को देखते हुए संसद ने 'राजभाषा अधिनियम, 1963' पारित किया, जिसके तहत 1965 के बाद भी हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी के प्रयोग को अनिश्चितकाल के लिए जारी रखने की अनुमति दी गई। कथन 2 सही है: संविधान के अनुच्छेद 348 के अनुसार, जब तक संसद विधि द्वारा कोई अन्य प्रावधान न करे, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की सभी कार्रवाइयाँ, तथा संसद या विधानमंडलों में प्रस्तुत विधेयकों और अधिनियमों के आधिकारिक पाठ अंग्रेजी भाषा में ही होंगे। हालांकि, राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्च न्यायालयों की कार्यवाही में हिंदी या राज्य की राजभाषा के प्रयोग को प्राधिकृत कर सकते हैं। कथन 3 गलत है: आठवीं अनुसूची में वर्तमान में 22 भाषाएँ अवश्य शामिल हैं, किंतु किसी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने मात्र से वह स्वतः संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं का माध्यम नहीं बन जाती है। UPSC परीक्षाओं में माध्यम या विषयों की मान्यता का निर्धारण आयोग की प्रशासनिक नीतियों और सरकार के दिशानिर्देशों के अधीन होता है (यद्यपि आठवीं अनुसूची की सभी भाषाएँ UPSC परीक्षा के लिए वैकल्पिक विषय के रूप में उपलब्ध हैं, लेकिन सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के अनिवार्य प्रश्नपत्रों के लिए नियम भिन्न हैं)। अतः कथन 3 गलत है।
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