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Indian Polity
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संसद की बैठक की कोरम?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
1/10।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद की कार्यप्रणाली तथा संसद के प्रति उनके उत्तरदायित्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जिसका विधिक निहितार्थ यह है कि लोकसभा में यदि किसी एक मंत्री के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) पारित हो जाता है, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को अपने पद से त्यागपत्र देना अनिवार्य होता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 74 के तहत राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, और राष्ट्रपति इस मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार अपने कृत्यों का प्रयोग करेगा, हालांकि 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा राष्ट्रपति को यह शक्ति दी गई है कि वह मंत्रिपरिषद से उसकी सलाह पर 'पुनर्विचार' करने के लिए केवल एक बार अपेक्षा कर सकता है, और पुनर्विचार के पश्चात दी गई सलाह राष्ट्रपति पर बाध्यकारी होती है।
3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन के संज्ञान से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और राष्ट्रपति द्वारा मांगे जाने पर संघ के प्रशासन तथा विधान के प्रस्तावों से संबंधित कोई भी जानकारी प्रधानमंत्री को उपलब्ध करानी ही होगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के निर्वाचन आयोग और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति का प्रावधान है, तथा मूल संविधान में यह व्यवस्था थी कि निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय होगा जिसे वर्ष 1950 में ही लागू कर दिया गया था।
2. दिनेश गोस्वामी समिति (1990) ने चुनाव सुधारों पर अपनी संस्तुति देते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के लिए एक कॉलेजियम प्रणाली (जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों) की सिफारिश की थी, साथ ही सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के उपाय सुझाए थे।
3. निर्वाचन आयोग के किसी भी निर्णय के विरुद्ध, यदि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच मतभेद उत्पन्न हो जाता है, तो निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाता है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पास कोई वीटो पावर नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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वित्तीय आपातकाल अनुच्छेद?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत आपातकालीन उपबंधों (Emergency Provisions) और उनसे संबंधित संवैधानिक संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल संविधान में 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द का प्रयोग राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की घोषणा के आधार के रूप में किया गया था, जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा प्रतिस्थापित करके 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) किया गया।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग तक सीमित हो सकती है, तथा राष्ट्रपति को पूरे देश में एक साथ आपातकाल लागू करने की बाध्यता से मुक्त कर दिया गया।
3. अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भाग III द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए किसी भी न्यायालय में जाने के अधिकार को निलंबित कर सकता है, किंतु 44वें संशोधन के पश्चात अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित करने का आदेश किसी भी स्थिति में नहीं दिया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसके दार्शनिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रस्तावना इस बात की घोषणा करती है कि संविधान अपनी शक्ति सीधे तौर पर संविधान सभा के सदस्यों से प्राप्त करता है, क्योंकि वे भारत के वयस्क मतदाताओं द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए थे।
2. 'पंथनिरपेक्ष' (Secular) और 'समाजवादी' (Socialist) शब्दों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया था, और इन शब्दों को जोड़ने से पहले प्रस्तावना में संशोधन करने की शक्ति पर 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में प्रश्नचिह्न लगाया गया था।
3. प्रस्तावना न तो विधायिका की शक्ति का स्रोत है और न ही उसकी शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है, तथा इसकी प्रकृति गैर-न्यायवादी (Non-justiciable) है, अर्थात् इसके प्रावधानों को देश के किसी भी न्यायालय में प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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