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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वजनिक वित्त' (Public Finance) और 'राजकोषीय समेकन' (Fiscal Consolidation) से जुड़े विभिन्न संकेतकों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'राजकोषीय घाटा' (Fiscal Deficit) सरकार की कुल प्राप्तियों (उधार को छोड़कर) और कुल व्यय के बीच का अंतर है, और यह इस बात का द्योतक है कि सरकार को अपने कुल खर्चों को पूरा करने के लिए कुल कितना उधार लेना पड़ेगा।
- 2. 'प्रभावी राजस्व घाटा' (Effective Revenue Deficit), जो कि वर्ष 2011-12 के केंद्रीय बजट में पेश किया गया था, राजस्व घाटे और पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए दिए जाने वाले अनुदानों के बीच का अंतर होता है।
- 3. 'प्राथमिक घाटा' (Primary Deficit) चालू वर्ष के राजकोषीय घाटे और पिछले ऋणों पर सरकार द्वारा किए गए कुल ब्याज भुगतानों (Interest Payments) का योग होता है, जो यह दर्शाता है कि बिना ब्याज चुकाए सरकार का वास्तविक राजकोषीय प्रबंधन कैसा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: राजकोषीय घाटा सरकार की कुल संचित प्राप्तियों (ऋण या उधारी को छोड़कर) और कुल व्यय के बीच का अंतर होता है। यह सरकार की कुल उधारी आवश्यकताओं को दर्शाता है।
कथन 2 सही है: प्रभावी राजस्व घाटा (Effective Revenue Deficit) पारंपरिक राजस्व घाटे में से उन अनुदानों को घटाकर निकाला जाता है जो केंद्र सरकार द्वारा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पूंजीगत परिसंपत्तियों (Capital Assets) के निर्माण के लिए दिए जाते हैं। इसे पहली बार वर्ष 2011-12 के बजट में रेखांकित किया गया था ताकि यह स्पष्ट हो सके कि राजस्व व्यय का कितना हिस्सा वास्तविक उपभोग के लिए है और कितना पूंजीगत परिसंपत्तियों के सृजन में मददगार है।
कथन 3 गलत है: प्राथमिक घाटा (Primary Deficit) चालू वर्ष के राजकोषीय घाटे और पिछले वर्षों के ऋणों पर सरकार द्वारा किए गए ब्याज भुगतानों का 'अंतर' (योग नहीं) होता है। यानी, (राजकोषीय घाटा - ब्याज भुगतान) प्राथमिक घाटा कहलाता है। यह यह बताता है कि ब्याज भुगतान को छोड़कर सरकार के वित्तीय घाटे की वास्तविक स्थिति क्या है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 202' से 'अनुच्छेद 207' तक उल्लिखित 'राज्य विधानमंडल की वित्तीय प्रक्रिया और धन विधेयकों' (Financial Procedures and Money Bills) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 199 के अनुसार, कोई विधेयक 'धन विधेयक' (Money Bill) तभी माना जाएगा जब उसमें केवल ऐसे उपबंध शामिल हों जो करों के अधिरोपण, उत्सादन, परिहार, परिवर्तन या विनियमन, अथवा राज्य की संचित निधि से धन के विनियोजन से संबंधित हों, और यदि किसी विधेयक में धन संबंधी मामलों के साथ-साथ अन्य गैर-वित्तीय मामले भी मिला दिए जाते हैं, तो वह स्वतः एक धन विधेयक बन जाता है।
2. 'राज्य के वित्त विधेयक' (Financial Bills) के संदर्भ में, अनुच्छेद 207 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि ऐसा कोई भी विधेयक जो राज्य की संचित निधि से व्यय उपबंधित करता है, राज्य विधानसभा में तब तक पुनर्स्थापित या पारित नहीं किया जा सकता जब तक कि राज्यपाल ने उस विधेयक को उस विधानसभा में विचार के लिए संस्तुति (Recommendation) न दे दी हो।
3. राज्य विधान परिषद (Legislative Council) को किसी धन विधेयक के संबंध में अत्यंत सीमित शक्तियां प्राप्त हैं; वह न तो धन विधेयक को अस्वीकार कर सकती है और न ही उसमें संशोधन कर सकती है, तथा उसे विधानसभा द्वारा पारित किए जाने के पश्चात अधिकतम चौदह दिनों की अवधि के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के विधानसभा को वापस लौटाना होता है, अन्यथा उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को कैसे हटाया जा सकता है?
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भारतीय इतिहास और कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, सल्तनत काल और मुगल काल के दौरान प्रशासनिक शब्दावली और भू-राजस्व व्यवस्था से संबंधित निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दीवान-ए-विजारत - यह मुख्य रूप से वित्त विभाग (Department of Finance) था जिसका प्रमुख 'वजीर' होता था, जो सल्तनत काल में सुल्तान के बाद राज्य का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी होता था।
2. मुक्ती (Muqti) या वली - सल्तनत काल में 'इक्ता' (Iqta) नामक प्रशासनिक इकाइयों के प्रांतीय गवर्नर या भूमि धारक होते थे, जिनका मुख्य कार्य कर एकत्र करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना था, तथा फिरोजशाह तुगलक के शासनकाल में इस पद को वंशानुगत (Hereditary) बना दिया गया था।
3. पोलज (Polj) - मुगल काल में अकबर की भू-राजस्व व्यवस्था (दहसाला प्रणाली) के अंतर्गत वह उपजाऊ भूमि थी जिस पर वर्ष में लगातार दो बार खेती की जाती थी और उसे कभी भी खाली (परती) नहीं छोड़ा जाता था।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
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