त्वरित लिंक्स
Civil services
22 views
सामान्य विज्ञान, पर्यावरण और पारिस्थितिकी के संदर्भ में, 'हरित गृह गैसों' (Greenhouse Gases - GHGs), वैश्विक तापन और अंतरराष्ट्रीय जलवायु पहलों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol) के अंतर्गत नियंत्रित की जाने वाली प्रमुख हरित गृह गैसों में कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$), मीथेन ($CH_4$), नाइट्रस ऑक्साइड ($N_2O$), हाइड्रोफ्लुओरोकार्बन (HFCs), परफ्लुओरोकार्बन (PFCs), सल्फर हेक्साफ्लोराइड ($SF_6$) के साथ-साथ नाइट्रोजन ट्राइफ्लोराइड ($NF_3$) को भी आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है।
- 2. जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के अंतर्गत 'ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल' (GWP) किसी गैस की ऊष्मा-अवशोषण क्षमता को एक निश्चित समयावधि (सामान्यतः 100 वर्ष) में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में मापता है, जिसका अर्थ है कि मीथेन ($CH_4$) का GWP मान कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में अल्पकाल में काफी अधिक होता है।
- 3. वायुमंडल में पाई जाने वाली 'जल वाष्प' (Water Vapour) पृथ्वी की प्राकृतिक हरित गृह प्रभाव में सबसे बड़ा योगदान देती है, किंतु इसे क्योटो प्रोटोकॉल के अंतर्गत किसी legally binding उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों में शामिल नहीं किया गया है क्योंकि यह मानवीय गतिविधियों से पूरी तरह स्वतंत्र है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: क्योटो प्रोटोकॉल के पहले प्रतिबद्धता काल (2008-2012) में छह गैसों (CO2, CH4, N2O, HFCs, PFCs, SF6) को शामिल किया गया था। नाइट्रोजन ट्राइफ्लोराइड ($NF_3$) को क्योटो प्रोटोकॉल के दूसरे प्रतिबद्धता काल (दोहा संशोधन, 2012-2020) में जोड़ा गया था, न कि मूल सूची में। इसके अलावा, कथन में यह दर्शाया गया है कि ये सभी एक साथ मूल सूची में थे, जो तकनीकी रूप से अशुद्ध है। अधिक महत्वपूर्ण रूप से, कथन 3 की तुलना में जल वाष्प संबंधी तथ्य को समझें।
कथन 2 सही है: ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल (GWP) एक माप है जो यह बताता है कि किसी विशिष्ट गैस ने एक निश्चित समय क्षितिज (आमतौर पर 100 वर्ष) में $CO_2$ के सापेक्ष कितनी ऊष्मा को अवशोषित किया है। मीथेन का GWP $CO_2$ की तुलना में 100 वर्ष की अवधि में लगभग 28-36 गुना अधिक होता है।
कथन 3 गलत है: जल वाष्प पृथ्वी पर सबसे प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली ग्रीनहाउस गैस है और प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव में इसका सबसे बड़ा योगदान है, किंतु यह कहना गलत है कि यह मानवीय गतिविधियों से 'पूरी तरह स्वतंत्र' है। हालांकि प्रत्यक्ष मानवीय उत्सर्जन जल वाष्प के स्तर को सीधे तौर पर बहुत अधिक प्रभावित नहीं करता, फिर भी जलवायु परिवर्तन (तापमान वृद्धि) के कारण वाष्पीकरण बढ़ने से वायुमंडल में जल वाष्प की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे एक सकारात्मक पुनर्भरण लूप (Positive Feedback Loop) बनता है। साथ ही, क्योटो प्रोटोकॉल में इसे शामिल न किए जाने का कारण इसकी प्राकृतिक प्रचुरता और प्रत्यक्ष नियंत्रण की असंभवता है, न कि मानव गतिविधियों से इसकी पूर्ण स्वतंत्रता।
Related Questions
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' (पंचायतों से संबंधित - अनुच्छेद 243 से 243O) और 'भाग IX-A' (नगरपालिकाओं से संबंधित - अनुच्छेद 243P से 243ZG) के अंतर्गत स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 243-I प्रत्येक राज्य के राज्यपाल को यह अधिकार देता है कि वह संविधान (तिहत्तरवाँ संशोधन) अधिनियम, 1992 के प्रारंभ होने के एक वर्ष के भीतर और उसके बाद प्रत्येक पाँचवें वर्ष की समाप्ति पर पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए एक 'वित्त आयोग' (State Finance Commission) का गठन करेगा।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-ZF के अनुसार, यदि कोई राज्य स्थानीय स्वशासन के संबंध में कोई पूर्व-संवैधानिक कानून बना चुका है, जो भाग IX या IX-A के प्रावधानों के असंगत है, तो वह कानून संविधान संशोधन अधिनियम लागू होने के ठीक एक वर्ष की अवधि समाप्त होने पर स्वतः निरस्त (Void) हो जाएगा, जब तक कि राज्य विधानमंडल द्वारा उसे संशोधित या निरस्त नहीं किया जाता।
3. शहरी क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन प्रदान करने वाली 'नगरपालिकाओं' के गठन के लिए 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में 'बारहवीं अनुसूची' जोड़ी गई, जिसमें कुल 18 कार्यात्मक विषयों (Functional Items) को शामिल किया गया है, तथा नगरपालिकाओं के तीन प्रकार—नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम—गठित करने का प्रावधान किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
हाल ही में खोजा गया ब्रैकीबैक्टीरियम नेताजी किस कारण चर्चा में है?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' के अंतर्गत 'राजभाषा' (Official Language) और उससे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप (1, 2, 3, आदि) होगा, और राष्ट्रपति किसी भी समय इस बात की अनुमति दे सकता है कि हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी भाषा या अंकों के देवनागरी रूप का भी राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 348 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्रवाइयाँ अंग्रेजी भाषा में ही होंगी, जब तक कि संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे, तथापि किसी राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, राज्य के उच्च न्यायालय की कार्रवाइयों में हिंदी भाषा या उस राज्य के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त होने वाली किसी अन्य भाषा के प्रयोग को अधिकृत कर सकता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 351 के तहत संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके, और इसके लिए उसे केवल संस्कृत भाषा से ही अपनी शब्दावली के अधिकांश शब्दों को ग्रहण करने का निर्देश दिया गया है, अन्य भाषाओं से नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 368' के अंतर्गत संविधान संशोधन की प्रक्रिया और 'संविधान की मूल संरचना के सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी उपबंध को जोड़ने, संशोधित करने या निरसित करने की शक्ति प्राप्त है, और इस अनुच्छेद के अधीन संविधान संशोधन विधेयक को संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है, जिसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Permission) लेना अनिवार्य होता है।
2. 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' के ऐतिहासिक मामले में उच्चतम न्यायालय की 13-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह व्यवस्था दी थी कि संसद की संविधान संशोधन की शक्ति असीमित नहीं है और वह अनुच्छेद 368 के तहत संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) को नष्ट या क्षीण नहीं कर सकती है।
3. न्यायिक समीक्षा (Judicial Review), संविधान का संघीय स्वरूप (Federal Character), और पंथनिरपेक्षता (Secularism) जैसे सिद्धांत संविधान की मूल संरचना का हिस्सा हैं, और संविधान के 'भाग III' द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को संसद द्वारा किसी भी परिस्थिति में संशोधित या सीमित नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
असहयोग आंदोलन आधिकारिक तौर पर कब शुरू किया गया था?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.