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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, प्राचीन भारतीय दर्शन प्रणालियों (षड् दर्शन) और उनके प्रवर्तकों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सांख्य दर्शन के प्रवर्तक ऋषि कपिल थे, जो यह मानते हैं कि इस जगत की उत्पत्ति ईश्वर की इच्छा से नहीं बल्कि प्रकृति और पुरुष के संयोग से होती है, तथा यह दर्शन पुनर्जन्म और मोक्ष के सिद्धांत को स्वीकार करता है किंतु वेदों की प्रामाणिकता को अंतिम सत्य नहीं मानता।
- 2. वैशेषिक दर्शन के प्रतिपादक ऋषि कणाद थे, जो भौतिकी और परमाणुवाद (Atomic Theory) के अध्ययन के लिए जाने जाते हैं, और इस दर्शन के अनुसार ब्रह्मांड के सभी भौतिक पदार्थ पाँच महाभूतों से मिलकर बने हैं जिन्हें अत्यंत सूक्ष्म और अविभाज्य परमाणुओं में विभाजित किया जा सकता है।
- 3. उत्तर मीमांसा या वेदांत दर्शन के संस्थापक बादरायण (व्याय व्यास) थे, जो उपनिषदों के आधार पर ब्रह्म को जगत का मूल कारण मानते हैं, और इस दर्शन प्रणाली ने आगे चलकर अद्वैत, विशिष्ठाद्वैत और द्वैत जैसी विभिन्न दार्शनिक धाराओं को जन्म दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है: सांख्य दर्शन (Sankhya Philosophy) के प्रवर्तक ऋषि कपिल हैं। यह दर्शन पूरी तरह से द्वैतवादी (Dualistic) है और प्रकृति तथा पुरुष के संयोग से जगत की रचना मानता है। यह ईश्वर के अस्तित्व को नकारता है या उसकी आवश्यकता नहीं मानता (निरीश्वरवादी), किंतु यह वेदों की प्रामाणिकता और वेदों के ज्ञान को स्वीकार करता है, इसलिए यह आस्तिक दर्शनों की श्रेणी में आता है। कथन 2 सत्य है: वैशेषिक दर्शन के प्रतिपादक ऋषि कणाद (उलूक) हैं। यह दर्शन भौतिकी (Physics), प्रकृति और परमाणुवाद (Atomic Theory) के लिए प्रसिद्ध है। इसके अनुसार भौतिक जगत पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश नामक पाँच द्रव्यों (महाभूतों) से बना है जो अणुओं और परमाणुओं में निहित हैं। कथन 3 सत्य है: उत्तर मीमांसा या वेदांत दर्शन के प्रवर्तक बादरायण हैं, जिन्होंने 'ब्रह्मसूत्र' की रचना की। यह दर्शन उपनिषदों के विचारों पर आधारित है और ब्रह्म को इस संपूर्ण ब्रह्मांड का मूल कारण (सृष्टि कर्ता) मानता है। कालान्तर में इसी दर्शन पर आधारित शंकराचार्य, रामानुजाचार्य और मध्वाचार्य जैसे आचार्यों ने अपने दार्शनिक सिद्धांत प्रतिपादित किए। अतः विकल्प (b) सही है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' के अंतर्गत 'मूल अधिकार' और 'अनुच्छेद 32' के माध्यम से प्राप्त 'संवैधानिक उपचारों के अधिकार' तथा रिट अधिकारक्षेत्र (Writ Jurisdiction) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए निर्देश या आदेश या रिट (जिनमें बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, अधिकार पृच्छा, उत्प्रेषण और प्रतिषेध शामिल हैं) निकालने की शक्ति प्रदान की गई है, और यह अधिकार स्वयं में एक मूल अधिकार है।
2. उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, जिसका विस्तार क्षेत्र सर्वोच्च न्यायालय की तुलना में अधिक विस्तृत है, क्योंकि उच्च न्यायालय मूल अधिकारों के उल्लंघन के अतिरिक्त किसी अन्य विधिक अधिकार (Ordinary Legal Rights) के प्रवर्तन के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
3. 'उत्प्रेषण' (Certiorari) और 'प्रतिषेध' (Prohibition) दोनों ही रिटें न्यायिक और अर्ध-न्यायिक प्राधिकरणों के विरुद्ध जारी की जाती हैं, जिसमें 'प्रतिषेध' एक निवारक उपाय है जो कार्यवाही के दौरान जारी किया जाता है, जबकि 'उत्प्रेषण' एक उपचारात्मक उपाय है जो निर्णय या आदेश पारित होने के पश्चात उसे रद्द करने के लिए जारी किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूमध्यरेखीय प्रतिधाराओं' (Equatorial Counter-Currents) की उत्पत्ति और उनकी विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूमध्यरेखीय प्रतिधाराएँ पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली उत्तर और दक्षिण विषुवतीय धाराओं (Equatorial Currents) के ठीक विपरीत दिशा में, यानी पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होती हैं।
2. इन धाराओं की उत्पत्ति का मुख्य कारण दोनों गोलार्धों की व्यापारिक हवाओं (Trade Winds) द्वारा महासागरीय जल को पश्चिम की ओर धकेले जाने के कारण भूमध्यरेखीय क्षेत्र में जल का अत्यधिक संचय होना और इसके परिणामस्वरूप पश्चिम से पूर्व की ओर एक दाब प्रवणता (Pressure Gradient) का निर्माण होना है।
3. अटलांटिक और प्रशांत महासागरों में भूमध्यरेखीय प्रतिधाराएँ वर्ष भर समान रूप से प्रबल और स्थिर बनी रहती हैं, क्योंकि यहाँ मानसूनी पवनों का इन महासागरों पर कोई मौसमी प्रभाव नहीं पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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