BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
14 views

भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतब विकास के संदर्भ में, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा संचालित मौद्रिक नीति, तरक्की प्रबंधन और 'स्थायी जमा सुविधा' (SDF - Standing Deposit Facility) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. स्थायी जमा सुविधा (SDF) को उर्जित पटेल समिति की सिफारिशों के आधार पर वर्ष 2022 में भारतीय बैंकिंग प्रणाली में एक नया चलनिधि (Liquidity) प्रबंधन उपकरण के रूप में पेश किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था से अतिरिक्त तरक्की को अवशोषित करना है।
  2. 2. रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) के विपरीत, SDF के अंतर्गत बैंकों को भारतीय रिज़र्व बैंक के पास अपनी अतिरिक्त तरलता को जमा करने के लिए किसी भी प्रकार की सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities - G-secs) को संपार्श्विक (Collateral) के रूप में गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं होती है।
  3. 3. मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा नीतिगत दरों का निर्धारण करते समय एसडीएफ (SDF) दर हमेशा सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) दर से अधिक निर्धारित की जाती है, जो तरलता समायोजन सुविधा (LAF) कॉरिडोर की ऊपरी सीमा का निर्माण करती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: स्थायी जमा सुविधा (SDF) को अप्रैल 2022 में आरबीआई अधिनियम, 1934 में संशोधन के बाद (जो उर्जित पटेल समिति की संस्तुति पर आधारित था) एक निश्चित दर पर बिना किसी संपार्श्विक के अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करने के लिए पेश किया गया था। कथन 2 सही है: रिवर्स रेपो रेट के तहत बैंकों को आरबीआई के पास पैसे रखने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों (G-secs) को कोलेटरल के रूप में रखना पड़ता था, किंतु SDF एक 'संपार्श्विक-रहित' (Collateral-free) साधन है। कथन 3 गलत है: SDF दर तरलता समायोजन सुविधा (LAF) कॉरिडोर की 'निचली सीमा' (Floor) का निर्माण करती है, न कि ऊपरी सीमा। एमएसएफ (MSF) दर कॉरिडोर की ऊपरी सीमा होती है और रेपो रेट इसका केंद्र बिंदु होता है। अतः SDF दर हमेशा रेपो रेट और MSF दर से कम होती है।
Share:

Related Questions

→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) और 'संविधान की मूल संरचना सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) के विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारतीय संविधान में 'न्यायिक समीक्षा' शब्द का प्रत्यक्ष और स्पष्ट उल्लेख अनुच्छेद 13 और अनुच्छेद 32 में किया गया है, जिसके तहत सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों को संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून को असंवैधानिक घोषित करने की अनन्य शक्ति प्राप्त है। 2. 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय की 13-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने पहली बार 'मूल संरचना सिद्धांत' प्रतिपादित किया था, जिसके अनुसार संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की असीमित शक्ति प्राप्त है, बशर्ते वह संशोधन देश की संघीय प्रणाली और लोकतांत्रिक गणराज्य के स्वरूप को नष्ट न करे। 3. 'आई. आर. कोएलो बनाम तमिलनाडु राज्य (2007)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह ऐतिहासिक निर्णय दिया था कि 24 अप्रैल 1973 के बाद नौवीं अनुसूची (Ninth Schedule) के तहत शामिल किए गए सभी कानूनों और विनियमों को न्यायिक समीक्षा से पूर्ण और अनिश्चितकालीन प्रतिरक्षा (Immunity) प्राप्त नहीं है, यदि वे संविधान के मूल ढांचे यानी मौलिक अधिकारों या बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारत के किस केंद्र शासित प्रदेश का क्षेत्रफल सबसे अधिक है? → भारतीय आर्थिक इतिहास और ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों के संदर्भ में, 'अनौद्योगीकरण' (De-industrialization) की प्रक्रिया तथा 19वीं शताब्दी के दौरान पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प उद्योगों के पतन के कारणों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारत में पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों के पतन का मुख्य कारण ब्रिटेन में औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप वहां उत्पादित मशीनी वस्त्रों और वस्तुओं का भारी मात्रा में बिना किसी शुल्क या न्यूनतम शुल्क के भारतीय बाजारों में प्रवेश करना था। 2. ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान रेलवे के तीव्र प्रसार और आंतरिक परिवहन लागत में कमी आने से ब्रिटिश निर्मित आयातित वस्तुएं देश के दूर-दराज के ग्रामीण बाजारों तक आसानी से पहुंच गईं, जिससे पारंपरिक ग्रामीण दस्तकारों और शिल्पकारों की स्थानीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह नष्ट हो गई। 3. भारत के पारंपरिक राजाओं, नवाबों और रियासतों के रजवाड़ों के पतन के साथ ही देश के भीतर और विदेशों में विलासिता की वस्तुओं की मांग में आई भारी गिरावट ने भी भारतीय हस्तशिल्प के पतन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, क्योंकि अब देशी शासक वर्ग का समर्थन समाप्त हो चुका था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'बहुआयामी गरीबी सूचकांक' (Multidimensional Poverty Index - MPI) और उसके मापन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Global MPI) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफर्ड पावर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (OPHI) द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाता है, जो केवल आय या उपभोग व्यय पर आधारित न होकर स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर जैसे तीन समान रूप से भारित आयामों के अंतर्गत दस संकेतकों का उपयोग करता है। 2. नीति आयोग द्वारा जारी राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक के अनुसार, भारत में पिछले एक दशक में गरीबी में भारी गिरावट दर्ज की गई है, और इस सूचकांक के सभी संकेतकों में 'पोषण' (Nutrition) का भारांक (Weightage) स्वास्थ्य आयाम के अन्य संकेतकों की तुलना में सबसे अधिक है। 3. बहुआयामी गरीबी के आकलन के लिए 'अल्किर-फोस्टर पद्धति' (Alkire-Foster Methodology) का उपयोग किया जाता है, जिसके अंतर्गत किसी व्यक्ति को बहुआयामी रूप से गरीब तभी माना जाता है जब वह कम से कम तीन संकेतकों (यानी कुल भारित अभाव के 33.3 प्रतिशत या उससे अधिक) से वंचित होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'एल नीनो-दक्षिणी दोलन' (ENSO - El Nino-Southern Oscillation) और भारतीय मानसून पर इसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एल नीनो के दौरान, उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के पूर्वी और मध्य भाग में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे पेरू और इक्वाडोर के तटों पर ठंडे पानी के अपवेलिंग (Upwelling) की प्रक्रिया तीव्र हो जाती है और प्लवक (Plankton) की मात्रा में भारी वृद्धि होती है। 2. 'दक्षिणी दोलन सूचकांक' (Southern Oscillation Index - SOI) का ऋणात्मक मान ताहिती (प्रशांत महासागर) और डार्विन (हिन्द महासागर/ऑस्ट्रेलिया) के बीच वायु दाब के असामान्य अंतर को दर्शाता है, जो आमतौर पर भारत में कमजोर मानसून और कम वर्षा से जुड़ा होता है। 3. 'इंडियन ओपेन डिपोल' (IOD - Indian Ocean Dipole) को कभी-कभी 'भारतीय मानसून का मिनी-एल नीनो' कहा जाता है, जहाँ सकारात्मक IOD चरण भूमध्यरेखीय हिंद महासागर के पश्चिमी भाग में गर्म तापमान के कारण एल नीनो के प्रतिकूल प्रभावों को आंशिक रूप से संतुलित या कमजोर कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.