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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' के अंतर्गत प्रदत्त 'मूल अधिकार' (Fundamental Rights - अनुच्छेद 12 से 35) तथा 'रिट अधिकारक्षेत्र' (Writ Jurisdiction - अनुच्छेद 32 और 226) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है, जबकि अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालयों (High Courts) की रिट अधिकारक्षेत्र की शक्ति अधिक व्यापक है क्योंकि वे न केवल मूल अधिकारों के उल्लंघन पर बल्कि किसी अन्य विधिक अधिकार (Legal Right) के प्रवर्तन के लिए भी रिट जारी कर सकते हैं।
  2. 2. भारतीय संविधान में उल्लिखित 'अधिकार पृच्छा' (Quo-Warranto) रिट किसी सार्वजनिक कार्यालय (Public Office) पर किसी व्यक्ति के अवैध दावे या दखल को रोकने के लिए जारी की जाती है, और इस रिट को दायर करने के लिए यह आवश्यक है कि याचिकाकर्ता स्वयं उस पीड़ित व्यक्ति का प्रतिनिधित्व कर रहा हो जिसके अधिकार का प्रत्यक्ष हनन हुआ हो।
  3. 3. संसद, अनुच्छेद 32 के खंड (3) के द्वारा किसी अन्य न्यायालय (स्थानीय सीमाओं के भीतर अपनी अधिकारिता का प्रयोग करने वाले किन्हीं अन्य न्यायालयों को छोड़कर) को उच्चतम न्यायालय की रिट अधिकारिता की शक्ति कारोबार (Exercise) करने के लिए विधि द्वारा अधिकृत कर सकती है, किंतु इस शक्ति का प्रयोग आज तक संसद द्वारा कभी नहीं किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है (इसकी अधिकारिता का दायरा सीमित है), जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों की अधिकारिता व्यापक है क्योंकि वे मूल अधिकारों के साथ-साथ सामान्य विधिक अधिकारों के उल्लंघन पर भी रिट जारी कर सकते हैं। कथन 2 गलत है: 'अधिकार पृच्छा' (Quo-Warranto) रिट किसी सार्वजनिक कार्यालय पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले व्यक्ति से यह पूछने के लिए जारी की जाती है कि वह किस प्राधिकार (Authority) से उस पद को धारण कर रहा है। इस रिट की एक मुख्य विशेषता यह है कि इसे किसी भी 'व्यथित व्यक्ति' (Aggrieved Person) द्वारा ही नहीं, बल्कि किसी भी बाहरी व्यक्ति या जिम्मेदार नागरिक द्वारा भी न्यायालय में दायर किया जा सकता है, इसके लिए पीड़ित व्यक्ति होना अनिवार्य नहीं है। कथन 3 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32(3) के अनुसार, संसद विधि द्वारा किसी अन्य न्यायालय को उच्चतम न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अधिकृत कर सकती है, किंतु इस प्रावधान का उपयोग करते हुए संसद ने अभी तक किसी अन्य न्यायालय को ऐसी शक्तियाँ प्रदान नहीं की हैं।
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