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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के अंतर्गत 'निर्वाचन' (Elections - अनुच्छेद 324 से 329A) तथा 'परिसीमन आयोग' (Delimitation Commission) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 82 के अनुसार प्रत्येक जनगणना के पश्चात संसद द्वारा एक विधि के माध्यम से परिसीमन अधिनियम लागू किया जाता है, जिसके तहत लोकसभा और विधानसभाओं के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करने के लिए राष्ट्रपति के आदेश द्वारा एक स्वतंत्र 'परिसीमन आयोग' का गठन किया जाता है।
- 2. परिसीमन आयोग एक शक्तिशाली वैधानिक निकाय है, जिसके आदेशों को भारत के किसी भी न्यायालय में प्रश्नगत (Challenge) किया जा सकता है, और इस आयोग के निर्णयों के विरुद्ध उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में अपील दायर करने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
- 3. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा वर्ष 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों की कुल संख्या को वर्ष 2001 तक के लिए स्थिर (Freeze) कर दिया गया था, जिसे बाद में 84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 द्वारा वर्ष 2026 के पश्चात होने वाली पहली जनगणना तक के लिए और बढ़ा दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 82 के अनुसार, प्रत्येक जनगणना की समाप्ति पर लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचन क्षेत्रों का पुनरुत्पादन या परिसीमन संसद द्वारा बनाई गई विधि के अनुसार एक प्राधिकारी द्वारा किया जाता है। इसके लिए संसद परिसीमन आयोग अधिनियम पारित करती है और राष्ट्रपति द्वारा परिसीमन आयोग का गठन किया जाता है।
कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 329(a) तथा परिसीमन आयोग अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, परिसीमन आयोग के आदेशों को **किसी भी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जा सकता** (Bar to interference by courts in electoral matters)। अतः इसके निर्णयों के विरुद्ध न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती।
कथन 3 सही है: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 ने 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या को वर्ष 2001 तक के लिए फ्रीज कर दिया था। इसके पश्चात 84वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 द्वारा इस प्रतिबंध को वर्ष 2026 के पश्चात होने वाली पहली जनगणना के आंकड़ों के प्रकाशित होने तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया, ताकि परिवार नियोजन को अपनाने वाले राज्यों को नुकसान न हो।
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क्या भारतीय संविधान की प्रस्तावना न्यायालय में प्रवर्तनीय (Justiciable) है?
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भारतीय पर्यावरण कानून और 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) की विधिक शक्तियों तथा क्षेत्राधिकार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत की गई है, और यह देश का एकमात्र ऐसा वैधानिक निकाय है जिसके पास पर्यावरण से संबंधित केवल सिविल (Civil) मामलों में ही न्यायनिर्णयन की शक्ति प्राप्त है, जबकि आपराधिक मामलों के उल्लंघन पर विचार करने का अधिकार केवल पारंपरिक सत्र न्यायालयों (Sessions Courts) के पास है।
2. NGT पर्यावरण से जुड़े किसी भी मामले की सुनवाई करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के सख्त नियमों और साक्ष्य अधिनियम (Evidence Act) के प्रावधानों से कानूनी रूप से पूरी तरह बंधा हुआ होता है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में पूर्ण औपचारिकता और सटीकता बनी रहे।
3. 'मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय बनाम भारत संघ' या NGT के अधिकारक्षेत्र से संबंधित अन्य न्यायिक निर्णयों में यह स्पष्ट किया गया है कि अधिकरण के आदेशों या निर्णयों के विरुद्ध सीधी चुनौती केवल भारत के उच्चतम न्यायालय में अनुच्छेद 136 (विशेष अवकाश याचिका - SLP) के तहत 90 दिनों की अवधि के भीतर दी जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' (केंद्र-राज्य विधायी संबंध - अनुच्छेद 245 से 255) के अंतर्गत विधायी शक्तियों के वितरण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार संसद को भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, और किसी राज्य के विधानमंडल को पूरे राज्य या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति है, किंतु संसद द्वारा बनाया गया कोई भी कानून इस आधार पर अमान्य नहीं ठहराया जा सकता है कि उसका बहिर्क्षेत्रीय प्रवर्तन (Extraterritorial operation) होता है।
2. संविधान की सातवीं अनुसूची की 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) के अंतर्गत संसद और राज्य विधानमंडल दोनों को कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, और यदि किसी समवर्ती विषय पर राज्य विधानमंडल द्वारा बनाया गया कानून संसद द्वारा बनाए गए पहले से विद्यमान कानून के प्रतिकूल या असंगत होता है, तो संसद का कानून मान्य होगा और राज्य का कानून उस हद तक शून्य हो जाएगा, भले ही राज्य का कानून राष्ट्रपति की अनुमति के लिए आरक्षित रखा गया हो और उसे राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हो चुकी हो।
3. संविधान के अनुच्छेद 249 के अंतर्गत यदि राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई (2/3) बहुमत से यह संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को उस विषय पर पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति मिल जाती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए प्रवृत्त रहता है, हालांकि इसे हर बार एक वर्ष के लिए और आगे बढ़ाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में कुल कितनी भाषाएं हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVII' के अंतर्गत 'राजभाषा' (Official Language - Articles 343-351) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप (1, 2, 3...) होगा, किंतु राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह इस अंतरराष्ट्रीय रूप के अतिरिक्त अंकों के देवनागरी रूप के प्रयोग को भी प्राधिकृत कर सकता है।
2. अनुच्छेद 348 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्यवाही अंग्रेजी भाषा में होगी, जब तक कि संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे, तथा किसी भी राज्य का राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उस राज्य के उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हिंदी भाषा या उस राज्य में राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त किसी अन्य भाषा के प्रयोग को प्राधिकृत कर सकता है।
3. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें समय-समय पर विभिन्न संविधान संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधनों) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, तथा इस अनुसूची में 'अंग्रेजी', 'भोजपुरी' और 'राजस्थानी' भाषाएँ भी शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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