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Indian Polity
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अनुच्छेद 110 का संबंध?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
धन विधेयक।
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक पदों और उनकी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, किंतु महान्यायवादी को वही पारिश्रमिक प्राप्त होता है जो भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को मिलता है, जिसे संविधान में ही निश्चित किया गया है।
2. अनुच्छेद 148 के अंतर्गत नियुक्त भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) अपने पद से हटने के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय में आगे किसी पद का पात्र नहीं होता है।
3. महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे किसी भी स्थिति में मतदान का अधिकार (Right to Vote) प्राप्त नहीं होता है, जबकि CAG अपनी रिपोर्ट सीधे संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा 'ऐसे नियमों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे', संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकती है, जो कि पूरी तरह से बाहरी भू-भागों को भारत में शामिल करने से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 3 के अंतर्गत मौजूदा राज्यों के पुनर्गठन या उनके नाम-सीमा परिवर्तन से जुड़े विधायी प्रस्ताव को राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित किया जा सकता है।
2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी राज्य के क्षेत्र को घटाने, बढ़ाने या उसके नाम में परिवर्तन करने से संबंधित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की संस्तुति के बाद ही संसद में प्रस्तुत किया जा सकता है, और राष्ट्रपति ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजते हैं, तथा राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित या अनुमत समय-सीमा के भीतर व्यक्त किया गया विचार राष्ट्रपति या संसद के लिए सर्वथा बाध्यकारी होता है।
3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के अधीन बनाए गए नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, सीमा परिवर्तन या नाम परिवर्तन से संबंधित विधियों को संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' नहीं माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि ऐसे कानून साधारण बहुमत और विधायी प्रक्रिया द्वारा ही पारित किए जा सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसी शर्तों और प्रतिबंधों पर कर सके जो वह ठीक समझे, और इसमें विदेशी भू-भाग का अधिग्रहण करके उसे भारत में शामिल करना भी शामिल है।
2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी राज्य के क्षेत्रफल को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने से संबंधित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित नहीं किया जा सकता है, तथा ऐसा विधेयक राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के विधानमंडल को उसकी राय जानने के लिए भेजा जाता है, और राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय राष्ट्रपति या संसद पर संवैधानिक रूप से बाध्यकारी होती है।
3. अनुच्छेद 4 यह स्पष्ट करता है कि अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना या मौजूदा राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित विधियों को संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' नहीं माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि ऐसे कानूनों को संसद द्वारा साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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विधान परिषद के सदस्यों का कार्यकाल कितना होता है?
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विभाजन के बाद संविधान सभा के कुल सदस्यों की संख्या कितनी रह गई थी?
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