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Indian Polity
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समान कार्य के लिए समान वेतन?

Detailed Explanation

अनुच्छेद 39।
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→ भारत के राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति (Ordinance-making power) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 123 के अंतर्गत राष्ट्रपति को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति संसद की विधि निर्माण की शक्ति के समतुल्य होती है, किंतु राष्ट्रपति इस शक्ति का प्रयोग केवल तभी कर सकता है जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों। 2. राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया अध्यादेश संसद की पुनर्सवेतन बैठक (Reassembly) होने के ठीक छह सप्ताह बाद स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, बशर्ते उससे पूर्व दोनों सदनों द्वारा उसे अस्वीकार करने वाला संकल्प पारित न कर दिया गया हो। 3. सुप्रीम कोर्ट के 'डी.सी. वाधवा वाद' (1987) के ऐतिहासिक निर्णय के अनुसार, कार्यपालिका द्वारा अध्यादेशों का बार-बार पुनः प्रख्यापन (Repromulgation) करना संवैधानिक धोखाधड़ी (Constitutional Fraud) की श्रेणी में आता है और यह न्यायालय के न्यायिक पुनरावलोकन के दायरे से बाहर है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान सभा के गठन का आधार कैबिनेट मिशन योजना, 1946 था, जिसके तहत संविधान सभा की कुल सदस्य संख्या 389 निर्धारित की गई थी, जिसमें ब्रिटिश भारत के प्रांतों को 293 सीटें और देशी रियासतों को 93 सीटें आवंटित की गई थीं। 2. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत प्रणाली द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से हुआ था, और इसमें देशी रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के प्रमुखों द्वारा नामित किया जाना था, जिसके कारण संविधान सभा एक आंशिक रूप से निर्वाचित और आंशिक रूप से मनोनीत निकाय थी। 3. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी, जिसका मुस्लिम लीग ने बहिष्कार किया था, और इस अवसर पर सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को फ्रांस की परंपरा के अनुसार सभा का अस्थायी अध्यक्ष (Interim President) चुना गया था, जबकि बाद में 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा किस संशोधन से मिला? → भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और नागरिकता (संशोधन) अधिनियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 10 के अनुसार, संसद द्वारा विधि बनाकर नागरिकता के अधिकार का नियमन करने की शक्ति के बावजूद, प्रत्येक व्यक्ति जो भाग II के प्रावधानों के तहत नागरिक है, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए भी अपनी नागरिकता को निरंतर बनाए रखेगा (Parliament's right to continue citizenship rights), जब तक कि उसे किसी विधिवत सक्षम न्यायालय द्वारा देशद्रोह या गंभीर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए दोषी न ठहराया जाए। 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 (समय-समय पर संशोधित) के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक अपनी स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण कर लेता है, तो संविधान के अनुच्छेद 9 के अंतर्गत उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है, किंतु यदि वह देश किसी युद्ध की स्थिति में भारत का शत्रु देश घोषित हो, तो इस स्वतः समाप्ति के नियम के बावजूद केंद्र सरकार विशेष मामलों में उसे भारतीय नागरिकता बनाए रखने की अनुमति दे सकती है। 3. वर्ष 2019 के नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से संबंधित हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को भारत की नागरिकता प्रदान करने के लिए देशीयकरण (Naturalisation) हेतु आवश्यक भारत में निवास की न्यूनतम अवधि को 11 वर्षों से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है, और यह प्रावधान संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों के साथ-साथ 'इनर लाइन परमिट' (ILP) प्रणाली वाले क्षेत्रों पर भी पूर्णतः लागू होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य की कार्यपालिका, विशेष रूप से राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण और मुख्यमंत्री की नियुक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति राज्य विधानमंडल के सत्र में न होने पर ही प्रयोग की जा सकती है, किंतु राज्यपाल द्वारा इस शक्ति का प्रयोग अपनी व्यक्तिगत विवेक से (Without Aid and Advice) किसी भी समय किया जा सकता है, इसके लिए मंत्रिपरिषद की सलाह अनिवार्य नहीं होती है। 2. संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्य की विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। 3. राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत क्षमादान की शक्ति प्राप्त है, जिसके अंतर्गत वह किसी ऐसे विषय से संबंधित विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंड को क्षमा, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार कर सकता है जिस विषय पर राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार होता है, किंतु राज्यपाल को मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह से माफ करने की शक्ति प्राप्त नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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