BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

BPSC TRE 4.0
13 views

भारत सरकार द्वारा शुरू की गई 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' (NEP 2020) और 'पीएम श्री स्कूल' (PM SHRI Schools) योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूली शिक्षा के वर्तमान 10+2 ढांचे को एक नए 5+3+3+4 पाठ्यचर्या और शैक्षणिक संरचना द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है, जिसमें 3 से 8 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए मूलभूत चरण (Foundation Stage) शामिल है।
  2. 2. 'पीएम श्री स्कूल' (PM SHRI) योजना का मुख्य उद्देश्य देश भर के चुनिंदा मौजूदा स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में उन्नत करना है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सभी घटकों को प्रदर्शित करेंगे और अपने संबंधित क्षेत्रों में अन्य स्कूलों के लिए मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेंगे।
  3. 3. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों के तहत वर्ष 2030 तक स्कूली शिक्षा में पूर्व-प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक 100% सकल नामांकन अनुपात (GER) प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
  4. 4. इस नीति के तहत उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) को 2018 के 26.3% से बढ़ाकर वर्ष 2035 तक 50% करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और पीएम श्री स्कूल योजना से संबंधित सभी चार कथन पूर्णतः सत्य हैं। NEP 2020 के तहत 10+2 के स्थान पर 5+3+3+4 का नया ढांचा अपनाया गया है, जिसमें 3-8 वर्ष आयु वर्ग के लिए फाउंडेशन स्टेज है। पीएम श्री योजना के तहत मॉडल स्कूलों का विकास किया जा रहा है। साथ ही, स्कूली शिक्षा में 100% GER का लक्ष्य 2030 तक और उच्च शिक्षा में 50% GER का लक्ष्य 2035 तक तय किया गया है। ऐसी ही अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय योजनाओं और नीतियों के विस्तृत अध्ययन के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Share:

Related Questions

→ ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने किस सामाजिक कार्य के लिए संघर्ष किया? → भारतीय संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों, संवैधानिक संशोधनों और विविध प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अंतर्गत राज्यसभा को यह विशेष शक्ति प्राप्त है कि वह उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से एक प्रस्ताव पारित कर संसद को नई अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के सृजन के लिए अधिकृत कर सकती है। 2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 361 के अनुसार, राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल को अपने कार्यकाल के दौरान किए गए किसी भी कार्य के लिए किसी भी न्यायालय में उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है, तथा उनके कार्यकाल के दौरान उनके विरुद्ध किसी भी प्रकार की आपराधिक कार्यवाही शुरू या जारी नहीं रखी जा सकती है। 3. अनुच्छेद 340 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वे सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (OBC) की स्थिति की जाँच करने के लिए एक आयोग नियुक्त कर सकते हैं, और इसी शक्ति का उपयोग करते हुए प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग (काका कालेकर आयोग) का गठन किया गया था। 4. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में 21वें, 71वें और 92वें संविधान संशोधन अधिनियमों के माध्यम से संशोधित करके सिंधी, कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली, बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाओं को जोड़कर कुल भाषाओं की संख्या 22 कर दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → बिहार में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध हुए प्रमुख किसान विद्रोहों और आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह (1917) से पूर्व बिहार में किसानों का एक प्रमुख आंदोलन 'अंगरेजी नीलहे साहबों' के विरुद्ध दरभंगा और बेतिया राज की जमींदारी के अंतर्गत 'तथाकथित तीनकठिया प्रथा' के खिलाफ हुआ था, जिसमें किसानों को अपनी भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य था। 2. स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1929 में स्थापित 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' (BPKS) का मुख्य उद्देश्य जमींदारों द्वारा किसानों पर किए जा रहे अत्याचारों, बेदखली और अवैध वसूली के विरुद्ध आवाज उठाना था, और इस संगठन ने बकाश्त भूमि (Bakasht Land) के अधिकारों के लिए भी बड़े पैमाने पर संघर्ष किया था। 3. वर्ष 1937-38 के दौरान मुंगेर जिले में कार्यानंद शर्मा के नेतृत्व में चलाया गया 'बरहिया ताल किसान आंदोलन' मुख्य रूप से किसानों के उस अधिकार से संबंधित था जिसमें वे जमींदारों द्वारा छीनी गई अपनी काश्तकारी भूमि की वापसी की मांग कर रहे थे। 4. मुंगेर के बड़हिया ताल आंदोलन के समय ही स्वामी सहजानंद सरस्वती ने अखिल भारतीय किसान सभा के मंच से यह घोषणा की थी कि लगान बंदी आंदोलन का मुख्य आधार संपूर्ण बिहार में केवल 'जिमींदारी प्रथा का पूर्ण उन्मूलन' होना चाहिए, और इस दौरान किसानों ने कांग्रेस सरकारों से पूर्ण समर्थन की मांग की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → जीवाणु में माइटोकॉन्ड्रिया के समवृत्ती अंग को क्या कहते हैं? → मौर्य कालीन प्रशासन और अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्य प्रशासन में 'समाहर्ता' (Samaharta) का मुख्य कार्य राज्य के आय-व्यय का लेखा-जोखा रखना और राजस्व का संग्रहण करना था, जबकि 'संनिधातृ' (Sanidhata) राजकोष और भंडागार (Treasury and Storehouse) का मुख्य अधिकारी होता था। 2. मेगस्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार, मौर्य साम्राज्य में पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन छह समितियों (Committees) द्वारा चलाया जाता था, जिनमें से प्रत्येक समिति में पाँच सदस्य होते थे जो शिल्पियों, विदेशियों, जन्म-मृत्यु और व्यापार आदि की देखरेख करते थे। 3. अशोक के विभिन्न शिलालेखों और स्तंभ लेखों में प्रयुक्त 'रज्जुक' (Rajuka) नामक अधिकारी का मुख्य कार्य न्याय प्रशासन के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि का सर्वेक्षण और मूल्यांकन करना था, जिन्हें अशोक ने जनहित में न्यायिक अधिकार भी प्रदान किए थे। 4. मौर्य काल में राज्य के नियंत्रण वाले कृषि फार्मों की आय को 'सीता' कहा जाता था, और इस कृषि भूमि की देखरेख करने वाले सर्वोच्च अधिकारी को 'अग्र्यडोमक' (Agrnyadomaka) की उपाधि दी जाती थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.