BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

BPSC TRE 4.0
21 views

भारतीय संविधान के अंतर्गत संघ की न्यायपालिका (उच्चतम न्यायालय) तथा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की संवैधानिक स्थिति, स्वतंत्रता और शक्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 148 के अनुसार भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और उन्हें उनके पद से केवल उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
  2. 2. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों और CAG दोनों के वेतन, भत्ते तथा पेंशन भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित (Charged) होते हैं, जिन पर संसद के दोनों सदनों में बहस तो हो सकती है किंतु मतदान नहीं कराया जा सकता है।
  3. 3. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) अपने पद की अवधि समाप्त होने के पश्चात् भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय या पद को ग्रहण करने के लिए पूर्णतः पात्र होते हैं, क्योंकि संविधान में इनके पुनर्नियुक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
  4. 4. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह विधि या तथ्य के किसी व्यापक प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय से परामर्श ले सकता है, और इस प्रकार दिए गए परामर्श को मानने के लिए राष्ट्रपति हर स्थिति में पूरी तरह बाध्य होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सत्य है क्योंकि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और उन्हें उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान ही हटाया जाता है। कथन 2 सत्य है क्योंकि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों और CAG दोनों के वेतन, भत्ते व पेंशन भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं और संसद में इन पर मतदान नहीं होता। कथन 3 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 148(4) के अनुसार, CAG अपने पद की समाप्ति के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य पद को ग्रहण करने के लिए अपात्र (अयोग्य) होते हैं। कथन 4 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 143 के तहत उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए परामर्श को मानने के लिए राष्ट्रपति बाध्य नहीं होता है (यह राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर करता है)। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Share:

Related Questions

→ भारतीय संविधान के भाग I (संघ और उसका राज्यक्षेत्र) के अंतर्गत अनुच्छेद 1 से 4 तक के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार भारत यानी 'इंडिया' राज्यों का संघ (Union of States) है, न कि राज्यों का फेडरेशन (Federation of States), और इस शब्दावली का चयन डॉ. बी.आर. अंबेडकर के अनुसार इस तथ्य को स्पष्ट करने के लिए किया गया था कि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है और किसी भी राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है। 2. अनुच्छेद 2 संसद को यह शक्ति प्रदान करती है कि वह विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकती है, तथा इसके अंतर्गत विदेशी भू-भाग का अधिग्रहण करके उसे भारत में शामिल करने की शक्ति भी निहित है। 3. नए राज्यों के निर्माण, वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन से संबंधित कोई भी विधेयक (अनुच्छेद 3 के तहत) राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पुनरुस्थापित नहीं किया जा सकता, और राष्ट्रपति के लिए यह अनिवार्य है कि वह ऐसा विधेयक संबंधित राज्य विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजे, तथा राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई सिफारिश या राय को मानना राष्ट्रपति और संसद दोनों के लिए संवैधानिक रूप से बाध्यकारी होता है। 4. अनुच्छेद 4 के प्रावधानों के तहत किसी नए राज्य के प्रवेश या गठन तथा सीमा परिवर्तन (अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किए गए कार्य) को संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए 'संविधान संशोधन' नहीं माना जाएगा, अर्थात ऐसे कानूनों को संसद द्वारा साधारण बहुमत (Simple Majority) से पारित किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → बेलगाम अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की थी? → अनुशीलन समिति का मुख्यालय निम्नलिखित में से किस स्थान पर स्थित है? → पादप जगत (Plant Kingdom) और जन्तु जगत (Animal Kingdom) के वर्गीकरण तथा उनके जैविक लक्षणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रायोफाइटा (Bryophyta) वर्ग के पौधों को 'पादप जगत का उभयचर' (Amphibians of the plant kingdom) कहा जाता है, क्योंकि ये पौधे मृदा में तो उगते हैं, किंतु अपने लैंगिक जनन (Sexual reproduction) के लिए जल पर निर्भर होते हैं, और इनमें संवहनी ऊतक (Xylem and Phloem) पूर्णतः अनुपस्थित होते हैं। 2. आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों में बीज फलों के अंदर सुरक्षित रहते हैं और इनमें दोहरा निषेचन (Double fertilization) तथा त्रिसंलयन (Triple fusion) की विशेषता पाई जाती है, जबकि जिम्नोस्पर्म (Gymnosperms) में बीज नग्न (Naked seeds) होते हैं और उनमें अंडाशय का अभाव होता है। 3. पोरिफेरा (Porifera) संघ के जंतुओं में शरीर की कोशिकाओं में श्रम विभाजन पाया जाता है और इनके पूरे शरीर पर जल के प्रवेश के लिए 'ऑस्टिया' (Ostia) तथा जल निकासी के लिए 'ऑस्कुलम' (Osculum) नामक छिद्र होते हैं, तथा इनका आंतरिक कंकाल स्पिक्यूल्स (Spicules) से बना होता है। 4. ऐनेलिडा (Annelida) संघ के जंतुओं में वास्तविक देहगुहा (True Coelom) और खंडयुक्त शरीर (Metameric segmentation) पाया जाता है, जबकि आर्थोपोडा (Arthropoda) जन्तु जगत का सबसे बड़ा संघ है जिसमें परिसंचरण तंत्र बंद प्रकार (Closed circulatory system) का होता है और श्वसन के लिए गिल्स या श्वासनली (Trachea) पाई जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → 19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक एवं सांस्कृतिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजा राममोहन राय द्वारा वर्ष 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' और 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा का विरोध करना, एकेश्वरवाद का प्रचार करना और हिंदू समाज में व्याप्त सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं का उन्मूलन करना था। 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और उन्होंने पाखंड खंडिनी पताका फहराते हुए हिंदू समाज को शुद्ध करने के लिए 'शुद्धि आंदोलन' की शुरुआत की थी। 3. ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' (Truth-seekers' Society) का मुख्य उद्देश्य पिछड़े वर्गों, शूद्रों और अति-शूद्रों को वैचारिक रूप से जागृत करना तथा ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक पाखंडों के खिलाफ संघर्ष करना था। 4. ईश्वर चंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार द्वारा वर्ष 1856 में 'हि हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Hindu Widows' Remarriage Act) पारित किया गया, जिसे कानूनी रूप से लागू कराने में लॉर्ड डलहौजी का कार्यकाल महत्वपूर्ण रहा था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.