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BPSC TRE 4.0
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19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों/विचारकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' और 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं का विरोध करना तथा एकेश्वरवाद का प्रचार करना था।
- 2. स्वामी विवेकानंद ने 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य केवल धार्मिक प्रचार करना था, जबकि सामाजिक सेवा, मानवतावादी कार्यों और शिक्षा के प्रसार से इसका कोई लेना-देना नहीं था।
- 3. ज्योतिराव फुले ने 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की, जिसके माध्यम से उन्होंने ब्राह्मणवादी वर्चस्व, छुआछूत और जातिगत असमानता का कड़ा विरोध करते हुए शूद्रों और अति-शूद्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
- 4. ईश्वरचंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों के कारण ही ब्रिटिश सरकार द्वारा वर्ष 1856 में 'हिू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Hindu Widows' Remarriage Act) पारित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 3 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। राजा राममोहन राय ने ब्रह्म समाज और आत्मीय सभा के माध्यम से सामाजिक कुप्रथाओं का विरोध किया। ज्योतिराव फुले ने सत्यशोधक समाज के जरिए शोषित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी और ईश्वरचंद्र विद्यासागर के प्रयासों से 1856 में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित हुआ। कथन 2 असत्य है क्योंकि रामकृष्ण मिशन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य धार्मिक शिक्षण के साथ-साथ सामाजिक सेवा और मानवतावादी कल्याण कार्य करना भी था। अधिक अभ्यास और अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक ढांचा और 'मध्यकालीन इतिहास' के संदर्भ में 'इक्ता व्यवस्था' (Iqta System) तथा उससे संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इक्ता व्यवस्था एक प्रांतीय प्रशासनिक और राजस्व संग्रहण प्रणाली थी, जिसे औपचारिक रूप से दिल्ली सल्तनत में सुल्तान इल्तुतमिश द्वारा बड़े पैमाने पर संस्थागत रूप दिया गया था, जिसके तहत सैन्य अधिकारियों और अमीरों को वेतन के बदले भूमि या राजस्व अनुदान (इक्ता) दिया जाता था।
2. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में इक्तादारों (मुग्ती या वालियों) की शक्तियों को नियंत्रित करने के लिए कड़े वित्तीय और प्रशासनिक उपाय किए गए थे, जिसके अंतर्गत उन्हें अतिरिक्त राजस्व वसूलने से रोका गया तथा उनके खातों का अंकेक्षण (Audit) करने के लिए 'मुस्तौफी' और 'दीवान-ए-वजीर' विभाग को सक्रिय किया गया था।
3. फिरोजशाह तुगलक ने अपने शासनकाल में इक्ता व्यवस्था को आनुवंशिक (Hereditary) बना दिया, जिसके तहत यदि किसी इक्तादार की मृत्यु हो जाती थी, तो उसका इक्ता उसके पुत्र या दामाद को स्वतः प्राप्त हो जाता था, और उसने सैनिकों को नकद वेतन देने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया।
4. सल्तनत काल में 'खालसा भूमि' वह भूमि होती थी जो सीधे सुल्तान के नियंत्रण में होती थी और इस भूमि से प्राप्त होने वाला राजस्व सीधे केंद्रीय राजकोष (शाही खजाने) में जमा होता था, जिसका सबसे अधिक विस्तार अलाउद्दीन खिलजी के समय में हुआ था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार का क्षेत्रफल कितना है?
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक इतिहास और मध्यकालीन इतिहास के संदर्भ में, सल्तनत कालीन सैन्य प्रशासन, केंद्रीय विभागों एवं 'दीवान-ए-कोही' तथा 'दीवान-ए-मुस्तखराज' जैसी प्रशासनिक इकाइयों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने भू-राजस्व व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और बिचौलियों (खوت, मुकद्दम और चौधरी) के विशेषाधिकारों को समाप्त करने के लिए 'दीवान-ए-मुस्तखराज' नामक एक नए राजस्व विभाग की स्थापना की थी, जिसका मुख्य कार्य किसानों से बकाया करों और घूसखोरी से जुड़ी धनराशियों को वसूलना था।
2. कृषि क्षेत्र के विकास और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए तुगलक वंश के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने 'दीवान-ए-कोही' (कृषि विभाग) की स्थापना की थी, जिसके तहत किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता (तकावी ऋण या सौंदड़) दी जाती थी, किंतु यह योजना प्रशासनिक कुप्रबंधन और खराब मिट्टी के चयन के कारण विफल हो गई।
3. सल्तनत काल में सैन्य विभाग 'दीवान-ए-आरिज' के अंतर्गत 'आरिज-ए-मुमालिक' सैनिकों के वेतन का निर्धारण सीधे नकद रूप में करता था, तथा अलाउद्दीन खिलजी द्वारा सेना में भ्रष्टाचार रोकने के लिए घोड़ों को दागने की प्रथा (दाग) और सैनिकों का वर्णनात्मक हुलिया लिखने की प्रणाली को अनिवार्य रूप से लागू किया गया था।
4. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत कालीन सैन्य और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार करते हुए सैनिकों को भूमि के बदले जागीर देने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया और केवल नकद वेतन भुगतान प्रणाली को ही संपूर्ण साम्राज्य में अनिवार्य कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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1530 में दक्षिण बिहार का वास्तविक शासक कौन बना?
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ब्रह्माण्ड के विकास, तारकीय विकास (Stellar Evolution) तथा सौर मण्डल के विभिन्न खगोलीय पिंडों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. तारकीय विकास के दौरान जब कोई तारा अपनी मुख्य अनुक्रम (Main Sequence) अवस्था को पार कर लेता है और उसके केंद्र में हाइड्रोजन का संलयन समाप्त हो जाता है, तो उसका बाह्य आवरण विस्तृत होकर लाल रंग का हो जाता है, जिसे 'लाल दानव' (Red Giant) कहा जाता है।
2. सूर्य के द्रव्यमान से लगभग 1.4 गुना कम द्रव्यमान वाले तारे (चंद्रशेखर सीमा के भीतर) अपने जीवन के अंतिम चरण में बिना किसी सुपरनोवा विस्फोट के अपनी बाहरी परतों को अंतरिक्ष में त्याग देते हैं और उनका केंद्रीय सघन भाग 'श्वेत वामन' (White Dwarf) के रूप में ठंडा होने लगता है।
3. सौर मण्डल के सबसे बड़े ग्रह 'बृहस्पति' के अधिकांश प्राकृतिक उपग्रहों में से 'गैनीमीड' (Ganymede) न केवल सौर मण्डल का सबसे बड़ा उपग्रह है, बल्कि यह आकार में बुध ग्रह से भी बड़ा है और इसकी अपनी आंतरिक चुंबकीयीय उपस्थिति दर्ज की गई है।
4. वरुण (Neptune) ग्रह के सबसे बड़े प्राकृतिक उपग्रह 'ट्राइटन' (Triton) की परिक्रमा की दिशा इसके अपने ग्रह के घूर्णन की दिशा के विपरीत (प्रतिगामी कक्षा - Retrograde Orbit) है, जो सौर मण्डल के अन्य बड़े उपग्रहों में एक अनूठी विशेषता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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