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BPSC TRE 4.0
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1757 से 1857 के मध्य ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध भारत में हुए 'अन्य जन आंदोलन' (जैसे संन्यासी विद्रोह, पागलপন্থী विद्रोह, फराजी आंदोलन और कोल विद्रोह) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मजनू शाह और देवी चौधराणी के नेतृत्व में हुआ 'संन्यासी विद्रोह' (1763-1800) मुख्य रूप से बंगाल में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा धार्मिक यात्राओं पर कर लगाने और पारंपरिक भूमि अधिकारों को छीनने के विरुद्ध एक सशस्त्र संघर्ष था, जिसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपने प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में अमर कर दिया।
- 2. करम शाह और टीपूस मीर के नेतृत्व में संचालित 'पागलपंथी विद्रोह' मुख्य रूप से एक अर्द्ध-धार्मिक संप्रदाय द्वारा उत्तरी बंगाल के शेरपुर क्षेत्र में जमींदारों और अंग्रेजों द्वारा किसानों पर किए जा रहे भारी कर उत्पीड़न तथा शोषण के खिलाफ चलाया गया था।
- 3. हाजी शरियतल्लाह और उनके पुत्र डूदा मियाँ द्वारा बंगाल में शुरू किया गया 'फराजी आंदोलन' इस्लाम के सुधारवादी सिद्धांतों पर आधारित था, लेकिन इसने शीघ्र ही अंग्रेजों और हिंदू जमींदारों के आर्थिक एवं सामाजिक शोषण के विरुद्ध एक जुझारू किसान आंदोलन का रूप ले लिया था।
- 4. वर्ष 1831-32 में बुद्धू भगत के नेतृत्व में छोटानागपुर क्षेत्र में हुआ 'कोल विद्रोह' गैर-आदिवासियों (दिकुओं) द्वारा आदिवासियों की जमीनों पर अवैध कब्जा करने, साहूकारों द्वारा अत्यधिक ब्याज वसूलने और ब्रिटिश न्याय प्रणाली व कर नीतियों के कारण उत्पन्न असंतोष का परिणाम था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन 1757 से 1857 के बीच ब्रिटिश शासन के विरुद्ध हुए अन्य प्रमुख जन आंदोलनों (संन्यासी, पागलपंथी, फराजी और कोल विद्रोह) के ऐतिहासिक तथ्यों के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। इन आंदोलनों ने ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों की नींव को हिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस प्रकार की उच्च स्तरीय तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के पाठ्यक्रम का गहराई से अध्ययन करें।
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बंगाल विभाजन (1905) एवं स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक बैठक हुई और यहीं से 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक घोषणा की गई थी।
2. 16 अक्टूबर 1905 को जिस दिन बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, उस दिन को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया था, और लोगों ने एक-दूसरे के हाथों में राखियाँ बाँधकर भाईचारे का संदेश दिया था, जिसकी परिकल्पना रबींद्रनाथ ठाकुर ने की थी।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल के राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षिक सुधार और आत्मनिर्भरता पर बल देते हुए राष्ट्रगुरु सुरेंद्रनाथ बनर्जी के प्रयासों से 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई थी।
4. आन्ध्र प्रदेश के डेल्टा क्षेत्रों में स्वदेशी आंदोलन को 'वन्दे मातरम् आंदोलन' के नाम से जाना गया था, तथा पूना और बंबई में इस आंदोलन का नेतृत्व बाल गंगाधर तिलक ने किया था, जबकि पंजाब में इसका संचालन अजीत सिंह और लाल लाजपत राय द्वारा किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और संसद (लोकसभा एवं राज्य सभा) की विधाई प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्य सभा) या उनकी संयुक्त बैठक में बोलने तथा भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे संसद में किसी भी विधेयक या प्रस्ताव पर मतदान (Voting) करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
2. राज्य सभा एक स्थायी सदन है जो कभी विघटित नहीं होता है, और इसके प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष होता है, तथा इसके एक-तिहाई सदस्य प्रति दूसरे वर्ष सेवानिवृत्त होते हैं, किंतु यदि कोई सदस्य उप-चुनाव के माध्यम से रिक्त सीट पर चुनकर आता है, तो उसका कार्यकाल भी शेष 6 वर्ष का ही होता है।
3. लोकसभा में किसी भी अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) को प्रस्तुत करने के लिए न्यूनतम 50 सदस्यों के समर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है, और यह प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता है, राज्य सभा में नहीं।
4. धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है, और राज्य सभा को इस संबंध में अत्यंत सीमित शक्तियाँ प्राप्त हैं क्योंकि वह किसी धन विधेयक को अस्वीकार या उसमें संशोधन नहीं कर सकती, बल्कि उसे अधिकतम 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिश के लोकसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों, समझौतों तथा संगठनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 2024 में आयोजित 19वें जी20 (G20) शिखर सम्मेलन की मेजबानी रियो डी जेनेरियो, ब्राजील द्वारा की गई थी, जिसकी मुख्य थीम 'एक न्यायसंगत दुनिया और एक टिकाऊ ग्रह का निर्माण' (Building a Sustainable Planet and a Just World) थी, और इसी सम्मेलन के दौरान वैश्विक भूख और गरीबी के खिलाफ 'ग्लोबल अलायंस' की शुरुआत की गई।
2. 'संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन' (UNFCCC) के अंतर्गत आयोजित COP29 (2024) सम्मेलन का आयोजन बाकू, अजरबैजान में किया गया था, जिसमें मुख्य रूप से विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्तपोषण (Climate Finance) के नए सामूहिक मात्रात्मक लक्ष्य (NCQG) के तहत प्रतिवर्ष 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने पर सहमति बनी।
3. ब्रिक्स (BRICS) संगठन के विस्तार के बाद, 16वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन वर्ष 2024 में कज़ान, रूस में आयोजित किया गया था, जिसमें मिस्र, ईरान, इथियोपिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने पूर्ण सदस्य के रूप में पहली बार शिखर सम्मेलन में भाग लिया।
4. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का मुख्यालय गुरुग्राम, भारत में स्थित है, और इसके चौथे संशोधन फ्रेमवर्क समझौते के तहत अब संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश (UN Member States) इस गठबंधन के सदस्य बनने के पात्र हो गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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1757 से 1857 के मध्य ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध हुए 'अन्य जन आंदोलनों' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संन्यासी विद्रोह (1770-1820), जिसका मुख्य केंद्र बंगाल और बिहार का क्षेत्र था, में सन्यासियों के साथ-साथ विस्थापित किसानों, बेदखल जमींदारों और फकीरों ने भी ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों और धार्मिक प्रतिबंधों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष किया था, तथा इस विद्रोह का सजीव चित्रण बंकिम चंद्र चटर्जी के प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में मिलता है।
2. केरल के मालाबार क्षेत्र में वर्ष 1836 से 1854 के बीच हुए 'मोपला विद्रोह' (Moplah Rebellions) मूल रूप से वहाँ के स्थानीय मुस्लिम किसानों द्वारा हिंदू जनमी (जमींदारों) और ब्रिटिश अधिकारियों के शोषण, भारी लगान तथा भू-स्वामित्व से बेदखल किए जाने के खिलाफ किए गए थे।
3. कोल विद्रोह (1831-32), जो मुख्य रूप से छोटा नागपुर के पठारी क्षेत्र (राँची, सिंहभूम, हजारीबाग और पलामू) की जनजातियों द्वारा भूमि हस्तांतरण, बाहरी लोगों (दिकुओं) के प्रवेश और नए करों के imposition के विरुद्ध किया गया था, का नेतृत्व बुद्धू भगत और जोआ भगत ने किया था।
4. पागलपंथी विद्रोह, जो एक अर्ध-धार्मिक संप्रदाय था और जिसकी स्थापना करम शाह ने की थी, ने बंगाल के शेरपुर क्षेत्र में जमींदारों द्वारा किसानों पर किए जा रहे अत्याचारों के विरुद्ध आंदोलन किया था, और इस विद्रोह को करम शाह के पुत्र टीपूबाहुर ने आगे बढ़ाया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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मानव पोषण और पोषक पदार्थों (Nutrients) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) जैसे कि विटामिन और खनिज ऊर्जा प्रदान नहीं करते हैं, किंतु ये चयापचय (Metabolism) और शरीर की जैव-रासायनिक प्रतिक्रियाओं के नियमन के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं।
2. वसा-घुलनशील विटामिन (Fat-soluble vitamins) जैसे विटामिन ए, डी, ई और के का संचय मुख्य रूप से यकृत और वसा ऊतकों में होता है, और मूत्र के माध्यम से इनका उत्सर्जी निष्कासन आसानी से हो जाता है।
3. प्रोटीन शरीर के निर्माण खंड (Building blocks) माने जाते हैं, जो अमीनो अम्लों से बने होते हैं, और कुल 20 आवश्यक अमीनो अम्ल होते हैं जिनमें से कुछ मानव शरीर द्वारा संश्लेषित किए जाते हैं और शेष को आहार के माध्यम से लेना अनिवार्य होता है।
4. जल-घुलनशील विटामिन (Water-soluble vitamins) जैसे विटामिन बी-कॉ कॉम्प्लेक्स और विटामिन सी शरीर में संचित नहीं रह सकते हैं, इसलिए इनकी नियमित आपूर्ति आहार द्वारा होना आवश्यक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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