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BPSC TRE 4.0
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दिल्ली सल्तनत काल के दौरान प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में 'मलिक काफूर' और 'अलाउद्दीन खिलजी' की बाजार नियंत्रण नीति तथा सैन्य व्यवस्था के निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी विशाल स्थायी सेना के रखरखाव के लिए घोरो को दागने (दाग प्रणाली) और सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा शुरू की तथा सैनिकों को नकद वेतन देने की परंपरा को स्थापित किया।
- 2. अलाउद्दीन द्वारा स्थापित बाजार नियंत्रण व्यवस्था (दीवान-ए-रियासत और शहाना-ए-मंडी) का मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार को रोकना नहीं था, बल्कि कम वेतन में भी सैनिकों के लिए जीवनोपयोगी वस्तुएं सस्ती दरों पर उपलब्ध कराना था।
- 3. मलिक काफूर ने अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति के रूप में दक्षिण भारत के सफल सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया, जिसमें देवगिरी, वारंगल, द्वारसमुद्र और मसूड़ (मदुरै) तक सेना भेजकर भारी मात्रा में अपार धन और संपत्ति दिल्ली सल्तनत के राजकोष में लाई।
- 4. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में मंगोलों के लगातार आक्रमणों से निपटने के लिए एक विशेष 'दीवान-ए-कोही' विभाग की स्थापना की गई थी, जो कृषि भूमि के विस्तार और किसानों को अग्रिम ऋण (सोंधड़) देने का कार्य करता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। अलाउद्दीन खिलजी ने घोड़ों को दागने और हुलिया प्रथा की शुरुआत की थी, उसका बाजार नियंत्रण सैनिकों को कम वेतन में संतुष्ट रखने के लिए था, और मलिक काफूर ने दक्षिण भारत के सभी प्रमुख अभियानों का सफल नेतृत्व किया था। कथन 4 असत्य है क्योंकि 'दीवान-ए-कोही' (कृषि विभाग) की स्थापना अलाउद्दीन खिलजी ने नहीं बल्कि बाद में मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा की गई थी। अधिक अभ्यास के लिए हमारी बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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अब तक भारत के संविधान की प्रस्तावना कितनी बार बदली गई है?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक इतिहास, उसके महत्वपूर्ण अधिवेशनों तथा उससे जुड़े नेताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक एवं प्रथम सचिव ए.ओ. ह्यूम (Allan Octavian Hume) थे, और वर्ष 1885 में कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन मूल रूप से पुणे में आयोजित होना तय था, किंतु वहाँ प्लेग की बीमारी फैलने के कारण इसे बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में स्थानांतरित करना पड़ा था।
2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन की अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी, जिसमें बंगाल विभाजन की पृष्ठभूमि में ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी आंदोलन के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से कांग्रेस द्वारा पूर्ण समर्थन प्रदान किया गया था।
3. वर्ष 1907 के ऐतिहासिक सूरत अधिवेशन की अध्यक्षता रास बिहारी घोष द्वारा की गई थी, जिसमें वैचारिक मतभेदों और नीतियों को लेकर कांग्रेस 'नरम दल' और 'गरम दल' के रूप में दो स्पष्ट भागों में विभाजित हो गई थी, तथा इस फूट के बाद कांग्रेस पर नरमपंथियों का नियंत्रण पुनः स्थापित हुआ था।
4. वर्ष 1916 के लखनऊ अधिवेशन में अंबिका चरण मजुमदार की अध्यक्षता में न केवल कांग्रेस के दोनों गुटों (नरम दल और गरम दल) का पुनर्मिलन हुआ, बल्कि कांग्रेस और मुस्लिम लीग के मध्य 'लखनऊ पैक्ट' भी संपन्न हुआ, जिसने भविष्य की पृथक निर्वाचक मंडल और सांप्रदायिक राजनीति को व्यावहारिक मान्यता प्रदान कर दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के भूगोल और नदी तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित प्रमुख नदियों और उनके तटों पर स्थित नगरों या बस्तियों के युग्मों पर विचार कीजिए:
1. गंडक नदी — हाजीपुर और सोनपुर
2. सोन नदी — आरा और दानापुर
3. सरयू (घाघरा) नदी — छपरा (सारण)
4. गंगा नदी — बक्सर और भागलपुर
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
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बिहार के मानसून, वर्षा के स्थानिक वितरण तथा जलवायु की विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार में अधिकांश वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून की 'बंगाल की खाड़ी की शाखा' के कारण होती है, जो राज्य के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भागों में सबसे पहले प्रवेश करती है तथा किशनगंज जिले में सर्वाधिक औसत वार्षिक वर्षा दर्ज की जाती है।
2. राज्य में वर्षा की मात्रा पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण की ओर क्रमशः घटती जाती है, जिसका मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर चलने वाली मानसूनी हवाओं का पश्चिम की ओर जाते-जाते आर्द्रता खो देना है।
3. बिहार में शीत ऋतु के दौरान होने वाली हल्की वर्षा (महावट) का मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) है, जो भूमध्य सागर से उत्पन्न होकर जेट स्ट्रीम के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत होते हुए बिहार तक पहुँचती है और यह रबी फसलों (विशेषकर गेहूँ) के लिए अत्यंत लाभदायक होती है।
4. बिहार की जलवायु को उष्णकटिबंधीय मानसूनी (Tropical Monsoon) प्रकार के अंतर्गत रखा जाता है, जिसमें मई और जून के महीनों में चलने वाली गर्म एवं शुष्क स्थानीय हवाओं को 'लू' कहा जाता है, जिनका प्रभाव दक्षिण बिहार के मैदानी जिलों में सबसे अधिक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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2025 में 18वीं बिहार विधानसभा के लिए कितनी महिला उम्मीदवार निर्वाचित हुईं?
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