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BPSC TRE 4.0
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1857 के विद्रोह से पूर्व और उसके समकालीन 'अन्य जन आंदोलनों' (1757-1857 तक) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संन्यासी विद्रोह (1770-1820), जो बंगाल में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की दमनकारी राजस्व नीतियों और आर्थिक प्रतिबंधों के कारण भड़का था, में महान संत और सुधारक भवानी पाठक तथा मजुमदार के साथ-साथ देवी चौधरानी ने भी सक्रिय रूप से नेतृत्व प्रदान किया था और बंकिम चंद्र चटर्जी के प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में इसी विद्रोह का सजीव चित्रण मिलता है।
- 2. केरल के मालाबार क्षेत्र में वर्ष 1836 से 1854 के बीच हुए 'मोपला विद्रोह' (Moplah Rebellions) का मुख्य कारण स्थानीय मुस्लिम किसानों (मोपलाओं) पर नए हिंदू और ब्रिटिश भूस्वामियों (जेम्मी) द्वारा अत्यधिक लगान वसूलना और भूमि से बेदखल करना था, जिसके विरुद्ध किसानों ने पारंपरिक हथियारों से सशस्त्र संघर्ष किया था।
- 3. कोल विद्रोह (1831-1832), जो छोटा नागपुर क्षेत्र (राँची, सिंहभूम, हजारीबाग आदि) में हुआ था, का प्रमुख कारण बाहरी लोगों (दिकुओं) द्वारा आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा करना, उच्च ब्याज दर पर ऋण देना और पारंपरिक भूमि व्यवस्था को समाप्त करना था, जिसका नेतृत्व बुद्धू भगत और जोआ भगत ने किया था।
- 4. पागलपंथी विद्रोह (1825-1835), जो असम और बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्र में कर्मशाह द्वारा स्थापित एक अर्ध-धार्मिक संप्रदाय के अनुयायियों द्वारा चलाया गया था, ने जमींदारों द्वारा किसानों पर किए जा रहे अत्याचारों का कड़ा विरोध किया और टिपू शाह के नेतृत्व में इस आंदोलन ने अपना एक स्वतंत्र प्रशासनिक ढांचा स्थापित कर लिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन 1857 के विद्रोह से पूर्व के 'अन्य जन आंदोलनों' (1757-1857) के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। संन्यासी विद्रोह (1770-1820) बंगाल में अकाल और करों के बोझ के कारण हुआ था जिसमें देवी चौधरानी और भवानी पाठक ने प्रमुख भूमिका निभाई। मालाबार के मोपला किसानों ने जेम्मी (भूस्वामियों) के विरुद्ध संघर्ष किया था। कोल विद्रोह (1831-32) बुद्धू भगत के नेतृत्व में छोटा नागपुर के आदिवासियों द्वारा दिकुओं के खिलाफ लड़ा गया था। पागलपंथी विद्रोह कर्मशाह और उनके पुत्र टिपू शाह के नेतृत्व में किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए चलाया गया था। ऐसी ही महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारियों के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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प्रथम विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1916 में स्थापित 'होमरोल लीग' आंदोलन और उसके समकालीन 'मुस्लिम लीग' के अंतर्संबंधों तथा उनकी राजनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बाल गंगाधर तिलक द्वारा अप्रैल 1916 में स्थापित इंडियन होम रूल लीग का मुख्य कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र (बॉम्बे शहर को छोड़कर), कर्नाटक, मध्य प्रांत और बरार था, तथा इसका मुख्यालय पुणे में स्थित था, जबकि एनी बेसेंट की होमरोल लीग का कार्यक्षेत्र शेष भारत था।
2. वर्ष 1916 के ऐतिहासिक लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच हुए प्रसिद्ध 'लखनऊ पैक्ट' के तहत कांग्रेस ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडलों की मांग को स्वीकार किया था, जिसमें मोहम्मद अली जिन्ना और बाल गंगाधर तिलक ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
3. मुस्लिम लीग के कलकत्ता अधिवेशन (1917) में एनी बेसेंट की गिरफ्तारी के विरोध में एक निंदा प्रस्ताव पारित किया गया था, और लीग के कई प्रमुख नेताओं जैसे जिन्ना और मौलाना हसरत मोहानी ने भी होमरोल लीग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था।
4. एनी बेसेंट द्वारा शुरू किए गए होमरोल आंदोलन के विरोध में नरम दल (उदारवादी) के नेताओं ने तुरंत ब्रिटिश सरकार का समर्थन करते हुए आंदोलन की कड़ी आलोचना की थी और देशहित में किसी भी होमरोल लीग की सदस्यता ग्रहण करने से आजीवन स्पष्ट इनकार कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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विश्व की प्रमुख जलसंधियों और महासागरीय गर्तों (Straits and Oceanic Trenches) के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. सुंडा जलसंधि (Sunda Strait) - जावा सागर को हिंद महासागर से जोड़ती है तथा जावा द्वीप को सुमात्रा द्वीप से अलग करती है।
2. टोरस जलसंधि (Torres Strait) - अराफुरा सागर को कोरल सागर से जोड़ती है तथा ऑस्ट्रेलिया को पापुआ न्यू गिनी से अलग करती है।
3. प्यूर्टो रिको गर्त (Puerto Rico Trench) - अटलांटिक महासागर का सबसे गहरा गर्त है, जो लगभग 8,376 मीटर की गहराई पर स्थित है।
4. जावा गर्त (Sunda/Java Trench) - प्रशांत महासागर का सबसे गहरा गर्त है, जो सुंडा ट्रेन्च के नाम से भी जाना जाता है।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
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चुम्बकत्व और चुम्बकीय पदार्थों के गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रतिचुम्बकीय पदार्थ (Diamagnetic substances) बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की विपरीत दिशा में अत्यंत क्षीण रूप से चुम्बकित होते हैं, तथा इनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति (Magnetic susceptibility) का मान ऋणात्मक और ताप पर निर्भर नहीं करता है।
2. अनुचुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic substances) बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में हल्के से आकर्षित होते हैं, तथा क्यूरी के नियम के अनुसार इन पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति उनके परम ताप ($T$) के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
3. लौहचुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic substances) उच्च चुम्बकीय प्रवृत्ति और धनात्मक मान प्रदर्शित करते हैं, किंतु एक निश्चित तापमान—जिसे 'क्यूरी तापमान' (Curie temperature) कहा जाता है—से अधिक ताप पर ये अनुचुम्बकीय गुणों में परिवर्तित हो जाते हैं।
4. भू-चुम्बकत्व (Terrestrial magnetism) के अध्ययन में 'नति कोण' (Angle of Dip) पृथ्वी की कुल चुम्बकीय तीव्रता और उसके क्षैतिज घटक के बीच का कोण होता है, जिसका मान विषुवत रेखा पर शून्य और चुंबकीय ध्रुवों पर 90 डिग्री होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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प्रकाश के व्यतिकरण (Interference of Light) और विवर्तन (Diffraction) की परिघटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यंग के द्वि-झिरी प्रयोग (Young's Double-Slit Experiment) में प्राप्त होने वाली व्यतिकरण फ्रिंजों (Fringes) की चौड़ाई समान होती है, जबकि एकल-झिरी विवर्तन पैटर्न में केंद्रीय उच्चिष्ठ (Central Maximum) को छोड़कर अन्य सभी उच्चिष्ठों की चौड़ाई असमान होती है।
2. व्यतिकरण पैटर्न में सभी दीप्त फ्रिंजों (Bright Fringes) की तीव्रता एकसमान होती है, जबकि विवर्तन पैटर्न में उच्चिष्ठों की तीव्रता केंद्रीय उच्चिष्ठ से दूर जाने पर लगातार घटती जाती है।
3. प्रकाश का विवर्तन तरंगों के प्रकाशिक मार्ग में किसी तीक्ष्ण अवरोध या द्वारक के किनारों से मुड़ने की परिघटना है, जो केवल तभी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है जब अवरोध या द्वारक का आकार प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (Wavelength) की तुलना में बहुत बड़ा हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार सरकार द्वारा राज्य में डिजिटल शासन को बढ़ावा देने और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता तथा सुगमता सुनिश्चित करने के लिए शुरू किए गए प्रमुख डिजिटल पोर्टलों एवं पहलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'बिहार ई-गवर्नेंस पोर्टल' और 'राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग' द्वारा शुरू किए गए 'बिहार भूमि' (Bihar Bhumi) पोर्टल के माध्यम से नागरिक घर बैठे अपनी जमीन के भू-नशा, जमाबंदी पंजी और दाखिल-खारिज (Mutation) की स्थिति ऑनलाइन देख सकते हैं तथा इसके लिए आवेदन भी कर सकते हैं।
2. शिक्षा विभाग के अंतर्गत राज्य के विद्यालयों के सुचारू संचालन, शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति की वास्तविक समय (Real-time) निगरानी के लिए 'ई-शिक्षाकोष' (e-Shikshakosh) पोर्टल और मोबाइल ऐप की शुरुआत की गई है।
3. राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण के लिए शुरू की गई 'ई-संजीवनी' (e-Sushrut / Telemedicine) पहल के तहत मरीजों को घर बैठे ऑनलाइन चिकित्सीय परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अस्पतालों में अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
4. लोक सेवाओं के अधिकार अधिनियम (RTPS) के तहत विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र (जैसे आय, जाति, आवासीय प्रमाण पत्र) प्राप्त करने के लिए 'आरटीपीएस बिहार' पोर्टल पूरी तरह से बंद कर दिया गया है और अब सभी सेवाएं केवल ऑफलाइन माध्यम से ही प्रदान की जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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