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रॉलेट एक्ट (1919), खिलाफत आंदोलन तथा असहयोग आंदोलन के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मार्च 1919 में पारित रॉलेट एक्ट (अराजक और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम) का मुख्य उद्देश्य बिना किसी वारंट के अनिश्चितकालीन गिरफ्तारी और जूरी के बिना मुकदमों के जरिए राष्ट्रीय आंदोलनों को कुचलना था, जिसके विरोध में महात्मा गांधी ने 'रॉलेट सत्याग्रह' के तहत 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल और सत्याग्रह का आह्वान किया था।
  2. 2. अखिल भारतीय खिलाफत सम्मेलन की पहली बैठक 23 नवंबर 1919 को दिल्ली में महात्मा गांधी की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी, जिसमें तुर्की के खलीफा के अधिकारों की रक्षा के लिए ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध असहयोग आंदोलन शुरू करने का प्रस्ताव पारित किया गया था।
  3. 3. सितंबर 1920 में कलकत्ता में हुए कांग्रेस के विशेष अधिवेशन में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का जोरदार समर्थन चित्तरंजन दास (C.R. Das) द्वारा किया गया था, जबकि इस प्रस्ताव के मुख्य प्रस्तावक महात्मा गांधी थे।
  4. 4. चौरी-चौरा कांड (5 फरवरी 1922) की हिंसक घटना के परिणामस्वरूप महात्मा गांधी ने बारडोली में कांग्रेस की कार्य समिति की बैठक में 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन को आधिकारिक रूप से पूरी तरह वापस लेने की घोषणा कर दी थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

रॉलेट एक्ट (1919) के विरोध में पूरे देश में आक्रोश फैल गया था, जिसके चलते जलियांवाला बाग हत्याकांड जैसी दुखद घटना घटी। इसके पश्चात खिलाफत और असहयोग आंदोलनों ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को एक नया जन-आधार प्रदान किया। इस विषय से संबंधित संपूर्ण पाठ्यक्रम और उच्चस्तरीय अभ्यास प्रश्नों के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें। कथन 3 असत्य है क्योंकि सितंबर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में चित्तरंजन दास (C.R. Das) ने इस असहयोग प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया था, हालांकि नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) में उन्होंने स्वयं इसका प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। बाकी सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं।
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