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सुभाषचंद्र बोस और भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सुभाषचंद्र बोस ने वर्ष 1939 के त्रिपुरी कांग्रेस अधिवेशन में पट्टाभि सीतारमैया को पराजित करके कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव जीता था, किंतु गांधीजी के साथ वैचारिक मतभेदों और कार्यकारिणी गठन में असहयोग के कारण उन्होंने पद से त्यागपत्र दे दिया और वर्ष 1939 में ही 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की स्थापना की।
- 2. वर्ष 1943 में सिंगापुर में सुभाषचंद्र बोस ने 'आजाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) के गठन की घोषणा की, और इस सरकार को जापान, जर्मनी, इटली, और मंचूरिया सहित कुल नौ देशों ने कूटनीतिक मान्यता प्रदान की थी।
- 3. आज़ाद हिंद फौज की प्रसिद्ध महिला रेजिमेंट 'झांसी की रानी रेजिमेंट' का गठन सिंगापुर में किया गया था, जिसका नेतृत्व डॉ. लक्ष्मी सहगल (कैप्टन लक्ष्मी) ने किया था।
- 4. वर्ष 1945 के लाल किले के ऐतिहासिक मुकदमे (INA Trials) के दौरान आज़ाद हिंद फौज के अधिकारियों के बचाव पक्ष के मुख्य वकील के रूप में भूलाभाई देसाई ने नेतृत्व किया था, और इस बचाव समिति में जवाहरलाल नेहरू और तेज बहादुर सप्रू जैसे दिग्गज वकील भी शामिल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। सुभाषचंद्र बोस ने 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन में पट्टाभि सीतारमैया को हराकर अध्यक्ष पद जीता था, बाद में इस्तीफा देकर फॉरवर्ड ब्लॉक बनाया। 1943 में सिंगापुर में आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना हुई जिसे 9 धुरी राष्ट्रों व सहयोगियों ने मान्यता दी। 'झांसी की रानी रेजिमेंट' महिलाओं की टुकड़ी थी जिसकी कमान कैप्टन लक्ष्मी सहगल के पास थी। लाल किले के मुकदमे में भूलाभाई देसाई के नेतृत्व में कानूनी दल बना जिसमें नेहरू और सप्रू भी शामिल थे। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी के लिए इस पोर्टल पर विस्तृत अध्ययन सामग्री उपलब्ध है।
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भारतीय राजव्यवस्था में 'विविध' प्रावधानों और विभिन्न संवैधानिक तथा गैर-संवैधानिक निकायों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) की स्थापना राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और यह एक स्थायी संवैधानिक निकाय है जिसका मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना और उनके सामान्य हितों से संबंधित विषयों पर सलाह देना है, तथा इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं।
2. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) एक सांविधिक (Statutory) निकाय है जिसका गठन मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत किया गया था, और इसके अध्यक्ष के रूप में केवल भारत के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश या सर्वोच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीश ही नियुक्त हो सकते हैं।
3. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की स्थापना संथानम समिति (1962-64) की सिफारिशों पर की गई थी, जिसे वर्ष 2003 में संसद द्वारा पारित एक अधिनियम के द्वारा वैधानिक दर्जा प्रदान किया गया था, और इसके सतर्कता आयुक्त का कार्यकाल 4 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है।
4. महानिर्वाचन आयोग (Election Commission of India) एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में वर्ष 1950 से ही निरंतर कार्य कर रहा है, और संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत इसके मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान ही महाभियोग जैसी विशेष प्रक्रिया द्वारा होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति (Inflation), मौद्रिक नीति और केन्द्र-राज्य वित्तीय संबंधों (Fiscal Federalism) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा संचालित मौद्रिक नीति समिति (MPC) का मुख्य वैधानिक लक्ष्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-Combined) के आधार पर मुद्रास्फीति को 4% के लक्ष्य पर केंद्रित रखना है, जिसमें +/- 2% की सहिष्णुता सीमा (Tolerance Band) निर्धारित की गई है।
2. संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत गठित वित्त आयोग (Finance Commission) केन्द्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण की संस्तुति करता है, तथा राज्यों की राजकोषीय क्षमता और आवश्यकताओं में संतुलन स्थापित करने के लिए ऊर्ध्वाधर (Vertical) और क्षैतिज (Horizontal) हस्तांतरण के सिद्धांतों का निर्धारण करता है।
3. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 के संशोधित प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वह मध्यम अवधि में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 3% तक सीमित करे, जिसे हाल के वर्षों में वैश्विक आर्थिक झटकों के कारण और अधिक लचीला बनाया गया है।
4. जब सरकार अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए अपने सार्वजनिक व्यय में भारी कटौती करती है और कराधान में वृद्धि करती है, तो इसे 'विस्तारवादी राजकोषीय नीति' (Expansionary Fiscal Policy) कहा जाता है, जो समग्र मांग को बढ़ाने में सहायक होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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क्वांटम प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर निर्माण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. क्वांटम कंप्यूटिंग पारंपरिक बिट्स (0 और 1) के स्थान पर 'क्यूबिट्स' (Qubits) का उपयोग करती है, जो सुपरपोजिशन (Superposition) और एंटांगलमेंट (Entanglement) के सिद्धांतों पर कार्य करते हैं, जिससे इनकी प्रसंस्करण क्षमता पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में अत्यधिक तीव्र होती है।
2. भारत सरकार द्वारा सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास के लिए 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' (ISM) की शुरुआत की गई है, जिसके अंतर्गत सिलिकॉन वेफर्स के निर्माण में लिथोग्राफी तकनीक के लिए मुख्य रूप से अत्यंत पराबैंगनी (Extreme Ultraviolet - EUV) प्रकाश स्रोतों का उपयोग किया जाता है।
3. क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) तकनीक का उपयोग पूरी तरह से हैक-प्रूफ और अत्यधिक सुरक्षित संचार नेटवर्क स्थापित करने के लिए किया जाता है, क्योंकि इसमें यदि कोई अनधिकृत व्यक्ति डेटा को पढ़ने का प्रयास करता है, तो क्वांटम अवस्था में परिवर्तन होने के कारण वह तुरंत संदेहास्पद हो जाता है।
4. हाल ही में विकसित 'टोपोलॉजिकल क्वांटम कंप्यूटर' (Topological Quantum Computer) पर्यावरण के शोर और डीकोहरेंस (Decoherence) के प्रति पूरी तरह संवेदनशील होते हैं, जिसके कारण त्रुटि सुधार (Error Correction) की आवश्यकता पारंपरिक क्वांटम कंप्यूटरों की तुलना में बहुत अधिक बढ़ जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार सरकार द्वारा राज्य में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने, नागरिकों तक पारदर्शी सेवाएँ पहुँचाने और डिजिटल साक्षरता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विभिन्न डिजिटल पहलों और पोर्टलों की शुरुआत की गई है। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम' के प्रभावी क्रियान्वयन और नागरिकों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए राज्य सरकार ने 'बिहार लोक शिकायत पोर्टल' (Bihar Public Grievance Redressal Portal) की शुरुआत की है, जिसके माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करने और उसकी स्थिति की ट्रैकिंग की सुविधा मिलती है।
2. शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति और विद्यार्थियों को पठन-पाठन की डिजिटल सामग्री उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा 'बिहार ई-लर्निंग' और 'विद्युत-कोश' (Vidyut-Kosh) नामक समर्पित पोर्टल संचालित किए जा रहे हैं, जो प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक के पाठ्यक्रमों को डिजिटल रूप में कवर करते हैं।
3. भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा 'बिहार भूमि' (Bihar Bhumi) पोर्टल लॉन्च किया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक ऑनलाइन लगान भुगतान, जमाबंदी पंजी का अवलोकन और भूमि मानचित्र (Land Maps) की डिजिटल प्रतियाँ प्राप्त कर सकते हैं।
4. पंचायती राज संस्थाओं और ग्रामीण विकास कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता लाने के लिए 'ई-ग्राम स्वराज' और 'पंचायती राज डैशबोर्ड' पोर्टल का उपयोग किया जाता है, किंतु बिहार सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के डिजिटल पोर्टल को अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बंगाल विभाजन (1905) के निर्णय के विरोध में प्रारंभ किए गए 'स्वदेशी आंदोलन' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन की औपचारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्ज़न द्वारा की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक बैठक हुई और 'स्वदेशी आंदोलन' का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया।
2. आंदोलन के दौरान बंगाल में राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1906 में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई थी, जिसके प्रथम अध्यक्ष सतेंद्र प्रसाद सिन्हा थे।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया था, जिसके तहत बंगाल के प्रसिद्ध रसायनज्ञ प्रफुल्ल चंद्र राय ने 'बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स' नामक स्वदेशी उद्योग की स्थापना की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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