BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

BPSC TRE 4.0
16 views

भारतीय संविधान के अंतर्गत महान्यायवादी (Attorney General for India) और संसद की संरचना (लोकसभा एवं राज्य सभा) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और उसके पास भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार होता है, साथ ही उसे संसद के दोनों सदनों की बैठकों में भाग लेने और बोलने का अधिकार भी प्राप्त है, किंतु उसे किसी भी मामले में मतदान करने का अधिकार नहीं होता है।
  2. 2. अनुच्छेद 81 के अनुसार लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 550 निर्धारित की गई है, जिसमें से राज्यों के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से अधिकतम 530 सदस्य और संघ राज्य क्षेत्रों से अधिकतम 20 सदस्य चुने जा सकते हैं, तथा राष्ट्रपति द्वारा आंग्ल-भारतीय (Anglo-Indian) समुदाय के सदस्यों को मनोनीत करने का प्रावधान 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 के द्वारा समाप्त कर दिया गया है।
  3. 3. राज्य सभा (संसद का उच्च सदन) एक स्थायी निकाय है और इसका विघटन नहीं होता है, इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष की समाप्ति पर सेवानिवृत्त होते हैं, तथा राज्य सभा में संघ राज्य क्षेत्रों (Union Territories) का प्रतिनिधित्व केवल दिल्ली और पुडुचेरी से होता है, अन्य संघ राज्य क्षेत्रों को राज्य सभा में प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं है।
  4. 4. महान्यायवादी को उसके पद से हटाने के लिए संविधान में महाभियोग जैसी किसी कठोर प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है, उसे राष्ट्रपति जब चाहे तब उसके पद से हटा सकते हैं, क्योंकि वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (During the pleasure of the President) पद धारण करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 76 के अंतर्गत महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्य सभा) की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, परंतु मतदान का अधिकार नहीं है (अनुच्छेद 88)। लोकसभा और राज्य सभा की संरचना से संबंधित प्रावधान भी पूर्णतः सही हैं। ऐसी महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री और अभ्यास प्रश्नों के लिए आप बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।
Share:

Related Questions

→ वायुदाब, आर्द्रता एवं पवन संचार तथा चक्रवात के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पृथ्वी की सतह पर वायुदाब की पट्टियों का वितरण सूर्य के आभासी उत्तरायण और दक्षिणायन (Ayanant) के साथ उत्तर और दक्षिण की ओर विस्थापित होता है, जिसके कारण विषुवतीय निम्न वायुदाब पेटी (डोलड्रम) और उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियों की स्थिति में मौसमी बदलाव आते हैं। 2. कोरियालिस बल (Coriolis Force) पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होने वाला एक आभासी बल है, जो उत्तरी गोलार्ध में पवनों को उनकी मूल दिशा के दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित कर देता है, और यह बल विषुवत वृत्त (Equator) पर अधिकतम तथा ध्रुवों पर शून्य होता है। 3. उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclones) केवल महासागरों के ऊपर तब उत्पन्न होते हैं जहाँ समुद्री सतह का तापमान न्यूनतम 27°C से अधिक होता है, और इनके केंद्र में 'चक्रवात की आँख' (Eye of the Cyclone) स्थित होती है जहाँ वायुदाब न्यूनतम, आकाश स्वच्छ और हवाएँ शांत होती हैं। 4. शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात (Temperate Cyclones) का निर्माण मुख्य रूप से ध्रुवीय ठंडी पवनों और उष्णकटिबंधीय गर्म पवनों के मिलने से बनने वाले 'वाताग्र' (Fronts) के सहारे होता है, जो पश्चिमी विक्षوب के प्रभाव से भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भाग में शीतकाल के दौरान 'मावठ' (वर्षा) लाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → मौर्य वंश का अंतिम राजा कौन था? → बिहार में ई-शासन (e-Governance) को बढ़ावा देने तथा डिजिटल पहलों के विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बिहार सरकार द्वारा भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण के लिए 'बिहार भूमि' (Biharbhoomi) पोर्टल की शुरुआत की गई है, जिसके माध्यम से नागरिक ऑनलाइन दाखिल-खारिज (Mutation), भू-लगान भुगतान और अपनी जमीन के रिकॉर्ड (रजिस्टर-2) की जाँच घर बैठे कर सकते हैं। 2. राज्य के विद्यालयों में पारदर्शिता लाने और छात्रों तथा शिक्षकों की उपस्थिति की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए शिक्षा विभाग द्वारा 'ई-शिक्षाकोष' (E-Shikshakosh) पोर्टल विकसित किया गया है, जो राज्य की संपूर्ण स्कूली शिक्षा प्रणाली को डिजिटल रूप से एकीकृत करता है। 3. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तथा उम्मीदवारों के सुगम पंजीकरण के लिए शुरू किया गया 'परीक्षा पोर्टल' पूरी तरह से केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) से स्वतंत्र है और इसमें क्लाउड स्टोरेज का उपयोग नहीं किया जाता है। 4. पंचायती राज संस्थाओं और ग्रामीण विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 'ई-ग्राम स्वराज' पोर्टल के साथ राज्य की ग्राम पंचायतों के डिजिटल वित्तीय प्रबंधन को जोड़ा गया है, जिससे विकास कार्यों की ऑनलाइन ट्रैकिंग आसान हुई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → भारत के अंतरिक्ष और उपग्रह प्रक्षेपण तकनीक (Space and Satellite Launch Technology) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत का भारी उपग्रह प्रक्षेपण यान 'LVM3' (Launch Vehicle Mark 3) क्रायोजेनिक ऊपरी चरण (CE-20) का उपयोग करता है, जो इसे पृथ्वी की भू-समकालिक अंतरण कक्षा (GTO) में लगभग 4,000 किलोग्राम तक के उपग्रह स्थापित करने में सक्षम बनाता है। 2. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित 'SSLV' (Small Satellite Launch Vehicle) को मुख्य रूप से भारी संचार उपग्रहों को भूस्थिर कक्षाओं में स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसकी वहन क्षमता 10 टन से अधिक है। 3. ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) के चौथे चरण (PS4) में तरल प्रणोदक (Liquid Propellants) का उपयोग किया जाता है, जो दो दाब-नियंत्रित इंजनों से युक्त होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी के संदर्भ में, 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' (Biodiversity Hotspots) की अवधारणा तथा पारिस्थितिकीय पिरामिडों के विभिन्न आयामों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश पर्यावरणविद् नॉर्मन मायर्स ने वर्ष 1988 में 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' की अवधारणा का प्रतिपादन किया था, जिसके अंतर्गत किसी क्षेत्र को हॉटस्पॉट घोषित करने के लिए न्यूनतम 1,500 स्थानिक (Endemic) पौधों की प्रजातियों का होना तथा उस क्षेत्र की मूल प्राथमिक वनस्पति का कम से कम 70% भाग नष्ट हो चुका होना अनिवार्य शर्त है। 2. वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त कुल 36 जैव विविधता हॉटस्पॉट में से भारत में पूर्णतः या आंशिक रूप से चार क्षेत्र स्थित हैं, जो पश्चिमी घाट, पूर्वी हिमालय, इंडो-बर्मा क्षेत्र और सुंडालैंड हैं। 3. जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Aquatic Ecosystem) में बायोमास का पिरामिड (Pyramid of Biomass) सदैव उल्टा (Inverted) बनता है, क्योंकि फाइटोप्लैंकटन (पादप प्लवक) का कुल जीवभार छोटी मछलियों और जलीय जीवों की तुलना में काफी कम होता है। 4. किसी पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का पिरामिड (Pyramid of Energy) सदैव सीधा होता है, जो ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम को दर्शाता है जिसके अनुसार प्रत्येक पोषण स्तर पर ऊर्जा का ह्रास होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.