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BPSC TRE 4.0
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक इतिहास, उसके अधिवेशनों और ब्रिटिश शासन के प्रति उसकी नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन (1885) में बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में कुल 72 प्रतिनिधि सम्मिलित हुए थे, और इस अधिवेशन की अध्यक्षता व्योमेश चंद्र बनर्जी ने की थी, जबकि इसकी स्थापना में ए.ओ. ह्यूम की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
- 2. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन नरम दल (Moderates) और गरम दल (Extremists) के बीच वैचारिक मतभेदों के कारण हुआ था, और इस अधिवेशन की अध्यक्षता रास बिहारी बोस ने की थी, जिसमें कांग्रेस के मुख्य लक्ष्य 'स्वराज' को लेकर तीव्र गतिरोध उत्पन्न हुआ था।
- 3. कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन (1916), जिसकी अध्यक्षता अंबिका चरण मजूमदार ने की थी, में न केवल नरम और गरम दल के बीच पुनः एकता स्थापित हुई, बल्कि ऐतिहासिक 'लखनऊ पैक्ट' के माध्यम से कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच राजनीतिक सहयोग का मार्ग भी प्रशस्त हुआ।
- 4. वर्ष 1929 के लाहौर अधिवेशन में पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में 'पूर्ण स्वराज' (Complete Independence) का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया, और इसी अधिवेशन में यह निर्णय लिया गया कि आगामी 26 जनवरी 1930 को पूरे देश में प्रथम 'स्वाधीनता दिवस' के रूप में मनाया जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न के सभी कथन (कथन 1, 3 और 4) पूर्णतः सत्य हैं, जबकि कथन 2 में आंशिक ऐतिहासिक तथ्य को छोड़कर सूरत अधिवेशन के संदर्भ में 'स्वराज' के प्रस्ताव की पृष्ठभूमि और कांग्रेस के लक्ष्यों पर विचार किया गया है (सूरत अधिवेशन में मुख्य विवाद अध्यक्ष पद के चुनाव और स्वदेशी आंदोलन के विस्तार को लेकर था)। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उद्भव, विभिन्न महत्वपूर्ण अधिवेशनों तथा स्वतंत्रता संग्राम में उसकी भूमिका से जुड़े ऐसे विश्लेषणात्मक प्रश्न बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के आधुनिक भारतीय इतिहास खंड के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। अभ्यार्थियों को कांग्रेस के उदारवादी और राष्ट्रवादी चरणों का गहन अध्ययन करना चाहिए।
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बिहार में 'नंदा विश्वविद्यालय' की स्थापना किसने की थी?
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महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय जलधाराओं के निर्माण और उनकी दिशा को निर्धारित करने में पृथ्वी का घूर्णन (कोरिऑलिस बल), प्रचलित हवाएँ (व्यापारिक और पछुआ पवनें), तापमान व लवणता में भिन्नता तथा तटीय रेखाओं की बनावट प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
2. उत्तरी गोलार्ध में महासागरीय जलधाराएँ कोरिऑलिस बल के प्रभाव से अपनी दाईं ओर (Clockwise) तथा दक्षिणी गोलार्ध में अपनी बाईं ओर (Anti-clockwise) विक्षेपित हो जाती हैं।
3. गल्फ स्ट्रीम (Gulf Stream) एक ठंडी जलधारा है जो अटलांटिक महासागर में उत्तर की ओर प्रवाहित होती है और यूरोपीय देशों के तटों पर शीत ऋतु में तापमान को अत्यधिक गिरा देती है।
4. लेब्राडोर जलधारा (Labrador Current) एक ठंडी जलधारा है, जो बेफिन खाड़ी और डेविस जलडमरूमध्य से दक्षिण की ओर प्रवाहित होती है तथा गर्म गल्फ स्ट्रीम से मिलने पर न्यूफाउंडलैंड के तट के पास विश्व का एक प्रमुख 'मछली पकड़ने का क्षेत्र' (Fishing Ground / Grand Banks) का निर्माण करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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सुभाषचंद्र बोस एवं आजाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सुभाषचंद्र बोस ने वर्ष 1943 में सिंगापुर में स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार 'आर्गा सरकार-ए-हुकूमत-ए-आद हिन्द' की स्थापना की थी, जिसे जापान, जर्मनी और इटली सहित कुल नौ धुरी राष्ट्रों ने मान्यता दी थी।
2. आई.एन.ए. (भारतीय राष्ट्रीय सेना) की पहली ब्रिगेड का औपचारिक गठन मोहन सिंह के नेतृत्व में किया गया था, जबकि इसका पुनर्गठन और सर्वोच्च नेतृत्व सुभाषचंद्र बोस के हाथों में आने के बाद 'सुभाष ब्रिगेड', 'जवाहर ब्रिगेड' और महिलाओं के लिए 'झांसी की रानी रेजिमेंट' का गठन किया गया था, जिसका नेतृत्व के. एस. थलवे ने किया था।
3. आई.एन.ए. के सैनिकों पर ब्रिटिश सरकार द्वारा लाल किले में चलाए गए ऐतिहासिक मुकदमे (1945) के दौरान उनका बचाव करने वाले प्रमुख वकीलों के पैनल के मुख्य प्रमुख भूलाभाई देसाई थे, जबकि इस बचाव दल में तेज बहादुर सप्रू, कैलाशनाथ काटजू और जवाहरलाल नेहरू भी शामिल थे।
4. सिंगापुर के पतन के बाद जापानी सेना द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध युद्धबंदियों के रूप में पकड़े गए भारतीय सैनिकों को रास बिहारी बोस के प्रयासों से 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' के अधीन संगठित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार की बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं और उनसे लाभान्वित क्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोसी परियोजना, जो भारत और नेपाल की एक संयुक्त बहुउद्देशीय परियोजना है, के तहत हनुमाननगर में एक बराज का निर्माण किया गया है, और इसे 'बिहार का शोक' कही जाने वाली इस नदी के नियंत्रण के लिए मुख्य रूप से डिगरा और नेपाल के क्षेत्रों में प्रबंधित किया जाता है।
2. गंडक परियोजना (जिसे वाल्मीकि नगर बराज परियोजना भी कहा जाता है) भारत और नेपाल के बीच एक समझौता है, जिसके अंतर्गत त्रिवेणी घाट पर बराज का निर्माण कर पूर्वी और पश्चिमी गंडक नहर प्रणालियों से बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों को भी सिंचाई क्षमता प्रदान की जाती है।
3. सोन नहर प्रणाली (Sone Canal System) बिहार की सबसे प्राचीन नहर प्रणालियों में से एक है, जिसकी शुरुआत ब्रिटिश काल में डेहरी-ऑन-सोने (रोहतास) में बराज बनाकर की गई थी, और यह सोन नदी के पूर्वी तथा पश्चिमी तटों से भोजपुर, रोहतास, औरंगाबाद और पटना जिलों के कृषि क्षेत्रों को जल उपलब्ध कराती है।
4. बड़ुआ और नर्तकी बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजनाएँ मुख्य रूप से उत्तर बिहार के बाढ़-प्रवण जिलों (जैसे मधुबनी और सीतामढ़ी) में भूजल स्तर को बढ़ाने और जल विद्युत उत्पादन के लिए हाल ही में राष्ट्रीय सिंचाई विकास कार्यक्रम के तहत पूरी तरह से केंद्रीय सहायता से पूर्ण की गई हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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