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BPSC TRE 4.0
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उन्नीसवीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरण (सुधार आंदोलनों) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और 'ब्रह्म समाज' (1828) का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा का विरोध करना, एकेश्वरवाद का प्रचार करना और हिंदू समाज में व्याप्त कुप्रथाओं जैसे सती प्रथा का उन्मूलन करना था।
- 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' (1875) ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और पाश्चात्य संस्कृति के पूर्ण अनुकरण पर बल देते हुए प्राचीन वैदिक अनुष्ठानों और मूर्तिपूजा की अनिवार्यता का समर्थन किया।
- 3. ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अतिशूद्रों को ब्राह्मणवादी वर्चस्व से मुक्त कराना तथा उनके सामाजिक, शैक्षणिक और मानवाधिकारों की रक्षा करना था।
- 4. ईश्वरचंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 1856 में लॉर्ड डलहौजी के शासनकाल में 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Act XV of 1856) पारित किया गया, जिसने विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी वैधता प्रदान की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि राजा राममोहन राय ने 1815 में आत्मीय सभा और 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना करके एकेश्वरवाद का प्रचार किया तथा सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया। कथन 2 असत्य है क्योंकि आर्य समाज ने पाश्चात्य संस्कृति के अनुकरण का विरोध किया और वेदों की महत्ता स्थापित की, किंतु उसने मूर्तिपूजा और पाखंडपूर्ण वैदिक अनुष्ठानों का घोर विरोध किया था, न कि उनका समर्थन। कथन 3 सत्य है क्योंकि ज्योतिराव फुले ने 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना कर शोषित वर्गों के अधिकारों की बात उठाई। कथन 4 सत्य है, ईश्वरचंद्र विद्यासागर के प्रयासों से 1856 का विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित हुआ। अधिक अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक इतिहास और इसके अधिवेशनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन (1885) की अध्यक्षता व्योमेश चंद्र बनर्जी द्वारा बॉम्बे में की गई थी, जिसमें कुल 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था, और इस अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी के सुझाव पर संगठन का नाम 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' किया गया था।
2. कांग्रेस के दूसरे अधिवेशन (1886) की अध्यक्षता कलकत्ता में दादाभाई नौरोजी ने की थी, इसी अधिवेशन के दौरान 'राष्ट्रीय कांग्रेस' का विलय सुरेंद्रनाथ बनर्जी की संस्था 'इंडियन नेशनल कांफ्रेंस' में कर दिया गया था।
3. कांग्रेस के तीसरे मद्रास अधिवेशन (1887) के अध्यक्ष बदरुद्दीन तैयबजी थे, जो इस पद को संभालने वाले पहले मुस्लिम अध्यक्ष थे, और इसी अधिवेशन के दौरान उन्होंने 'कांग्रेसमैन बनो' का नारा देते हुए मुसलमानों से राष्ट्रीय आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की थी।
4. इलाहाबाद में आयोजित कांग्रेस के चौथे अधिवेशन (1888) के अध्यक्ष जॉर्ज यूल थे, जो कांग्रेस के पहले ब्रिटिश अध्यक्ष थे, और इस अधिवेशन के आयोजन में स्थानीय गवर्नर लॉर्ड डफरिन ने कांग्रेस को पूर्ण प्रशासनिक सहयोग प्रदान किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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इंडिया पोस्ट ने हाल ही में बिहार के पहले ‘जेन-Z’ डाकघर का उद्घाटन कहाँ किया है?
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बिहार का शोक किस नदी को कहा जाता है?
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बिहार आर्थिक सर्वेक्षण के नवीनतम आंकड़ों एवं राज्य बजट के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वित्तीय वर्ष के दौरान बिहार के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) की वृद्धि दर स्थिर कीमतों पर राष्ट्रीय औसत से अधिक दर्ज की गई है, तथा राज्य की अर्थव्यवस्था में तृतीयक क्षेत्र (सेवा क्षेत्र) का योगदान सर्वाधिक है।
2. राज्य सरकार के कुल व्यय में पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) की हिस्सेदारी में लगातार सुधार हो रहा है, जिसका प्रमुख उद्देश्य राज्य में बुनियादी ढांचे, सड़कों और पुलों का विकास करना है।
3. जीविका (JEEVIKA) योजना के अंतर्गत राज्य में ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के गठन और उनके वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिससे राज्य के ग्रामीण गरीबों की आय में वृद्धि हुई है।
4. बिहार सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में सामाजिक सेवाओं (शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याण) के लिए कुल व्यय का सबसे बड़ा हिस्सा आवंटित किया गया है, जो सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के जनजातीय आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संथाल विद्रोह (1855-56), जिसे 'हुंड़ विद्रोह' भी कहा जाता है, मुख्य रूप से भागलपुर से राजमहल की पहाड़ियों के बीच फैले 'दामिन-ए-कोह' क्षेत्र में साहुकारों, महाजनों और ब्रिटिश अधिकारियों के दमनकारी नीतियों के विरुद्ध सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव के नेतृत्व में आयोजित किया गया था।
2. मुंडा उलगुलान (महान हलचल) का नेतृत्व बिरसा मुंडा ने किया था, जिन्होंने 'खूंटकट्टी' (सामूहिक भूमि व्यवस्था) प्रथा को समाप्त कर जमींदारी और बेगार प्रथा को कानूनी मान्यता दिलाने के लिए धार्मिक और राजनीतिक आंदोलन चलाया था।
3. ताना भगत आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1914 में छोटा नागपुर क्षेत्र में जतरा भगत के नेतृत्व में हुई थी, जो उरांव जनजाति का एक सुधारवादी आंदोलन था और इसने गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़कर ब्रिटिश सरकार को मालगुजारी न देने का आह्वान किया था।
4. खरवार आंदोलन (1870 के दशक) का नेतृत्व भागीरथ मांझी ने किया था, जिसका उद्देश्य संथालों और अन्य जनजातियों में सामाजिक-धार्मिक सुधार लाना तथा विदेशी शासन को समाप्त कर अपने पारंपरिक स्वशासन को पुनर्जीवित करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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