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BPSC TRE 4.0
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भारतीय राजव्यवस्था में 'केन्द्र-राज्य वित्तीय संबंधों' और 'कर प्रणाली' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 270 के अंतर्गत संघ सूची में उल्लिखित करों का संग्रहण केन्द्र सरकार द्वारा किया जाता है, किंतु उनका शुद्ध आगम केन्द्र और राज्यों के बीच विभाजित होता है, जिसमें उपकर (Cesses) और अधिभार (Surcharges) भी इस विभाज्य पूल (Divisible Pool) का अनिवार्य हिस्सा होते हैं।
- 2. वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद का गठन संविधान के अनुच्छेद 279क के तहत किया जाता है, जिसकी अध्यक्षता केन्द्रीय वित्त मंत्री करते हैं, और इसमें प्रत्येक राज्य के वित्त मंत्री या उनके द्वारा नामित मंत्री इसके सदस्य होते हैं।
- 3. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 282 केन्द्र और राज्यों को किसी भी लोक प्रयोजन के लिए वित्तीय अनुदान (Grants-in-aid) देने की शक्ति प्रदान करता है, जिसके तहत केन्द्र सरकार राज्य सरकारों को योजनागत या गैर-योजनागत सहायता प्रदान करती है।
- 4. वित्त आयोग (Finance Commission) एक अर्ध-न्यायिक संवैधानिक निकाय है, जो अनुच्छेद 280 के तहत प्रत्येक पाँच वर्ष पर या उससे पहले राष्ट्रपति द्वारा गठित किया जाता है, और इसकी सिफारिशें केन्द्र सरकार के लिए प्रकृति में पूरी तरह से बाध्यकारी (Binding) होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 270 के अनुसार, संघ सूची के करों के शुद्ध आगम केन्द्र और राज्यों के बीच बांटे जाते हैं, परंतु संसद द्वारा लगाए जाने वाले 'उपकर' (Cesses) और 'अधिभार' (Surcharges) इस विभाज्य पूल (Divisible Pool) का हिस्सा नहीं होते हैं और इन्हें केन्द्र सरकार राज्यों के साथ साझा नहीं करती है। कथन 4 असत्य है क्योंकि वित्त आयोग की सिफारिशें मुख्य रूप से 'सलाहकार प्रकृति' (Advisory) की होती हैं, और उन्हें लागू करना या न करना केन्द्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय पर निर्भर करता है, वे कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होती हैं। कथन 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। इस प्रकार के महत्वपूर्ण और विश्लेषणात्मक प्रश्नों का अभ्यास करने के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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जीव जगत के पाँच जगत वर्गीकरण (Five-Kingdom Classification) के अंतर्गत मोनेरा (Monera) जगत के मुख्य लक्षणों और उनके जैव-रासायनिक गुणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मोनेरा जगत के सभी जीव प्रोकैरियोटिक (Prokaryotic) होते हैं, जिनमें सुस्पष्ट केंद्रक (True nucleus), केंद्रक झिल्ली तथा झिल्ली-युक्त कोशिकांग (Membrane-bound organelles जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जी काय आदि) पूर्णतः अनुपस्थित होते हैं।
2. इस जगत के अधिकांश जीवों की कोशिका भित्ति (Cell wall) मुख्य रूप से जटिल शर्करा और अमीनो एसिड से बने 'पेप्टिडोग्लाइकान' (Peptidoglycan) की बनी होती है, किंतु आर्कीबैक्टीरिया (Archaebacteria) की कोशिका भित्ति की रासायनिक संरचना सामान्य बैक्टीरिया से भिन्न होती है जो उन्हें अत्यधिक कठोर वातावरण में जीवित रहने में मदद करती है।
3. मोनेरा जगत के अंतर्गत आने वाले सायनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria) या नीले-हरे शैवाल यूकैरियोटिक पादपों की भाँति प्रकाश संश्लेषण करते हैं, किंतु इनमें क्लोरोफिल-ए वर्णक के साथ-साथ प्रकाश संश्लेषी पिगमेंट विशिष्ट रूप से प्रोकैरियोटिक साइटोप्लाज्म में फैले होते हैं, न कि क्लोरोप्लास्ट के भीतर।
4. अधिकांश बैक्टीरिया में जनन मुख्य रूप से लैंगिक विधि (Sexual reproduction) द्वारा होता है, जिसमें समसूत्री (Mitosis) या अर्धसूत्री (Meiosis) विभाजन के माध्यम से युग्मकों का निर्माण और संलयन होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के मानसून, वर्षा के स्थानिक वितरण तथा जलवायु की विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार में अधिकांश वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून की 'बंगाल की खाड़ी की शाखा' के कारण होती है, जो राज्य के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भागों में सबसे पहले प्रवेश करती है तथा किशनगंज जिले में सर्वाधिक औसत वार्षिक वर्षा दर्ज की जाती है।
2. राज्य में वर्षा की मात्रा पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण की ओर क्रमशः घटती जाती है, जिसका मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर चलने वाली मानसूनी हवाओं का पश्चिम की ओर जाते-जाते आर्द्रता खो देना है।
3. बिहार में शीत ऋतु के दौरान होने वाली हल्की वर्षा (महावट) का मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) है, जो भूमध्य सागर से उत्पन्न होकर जेट स्ट्रीम के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत होते हुए बिहार तक पहुँचती है और यह रबी फसलों (विशेषकर गेहूँ) के लिए अत्यंत लाभदायक होती है।
4. बिहार की जलवायु को उष्णकटिबंधीय मानसूनी (Tropical Monsoon) प्रकार के अंतर्गत रखा जाता है, जिसमें मई और जून के महीनों में चलने वाली गर्म एवं शुष्क स्थानीय हवाओं को 'लू' कहा जाता है, जिनका प्रभाव दक्षिण बिहार के मैदानी जिलों में सबसे अधिक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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अभिकथन (A): बिहार के कृषि-जलवायु क्षेत्र II की मिट्टी गैर-चुनायुक्त है। कारण (R): कोसी और महानंदा नदियां अम्लीय खनिजों से समृद्ध हैं।
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भारत में प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन, शमन (Mitigation) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशा-निर्देशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत गठित राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के पदेन अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते हैं, और यह निकाय देश में आपदाओं के लिए समेकित, सहयोगात्मक और अग्रसक्रिय दृष्टिकोण अपनाने की रूपरेखा तैयार करता है।
2. बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) द्वारा राज्य में बाढ़, सूखा, भूकंप और वज्रपात जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन (Community-Based Disaster Management) पर विशेष बल दिया गया है, जिसके अंतर्गत 'सुरक्षित बिहार' अभियान चलाया जा रहा है।
3. सेंडाई फ्रेमवर्क (2015-2030) आपदा जोखिम न्यूनीकरण से संबंधित एक वैश्विक समझौता है, जिसका प्राथमिक लक्ष्य वर्ष 2030 तक आपदाओं के कारण होने वाली वैश्विक मृत्यु दर को कम करना और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान को सीमित करना है।
4. चक्रवात 'अम्फान' या 'तौकते' जैसी मानसूनी या उष्णकटिबंधीय आपदाओं के दौरान त्वरित चेतावनी जारी करने और तटीय क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने की प्राथमिक जिम्मेदारी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की अकेले होती है, जिसमें राज्य सरकारों की कोई प्रशासनिक भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और केंद्रीय मंत्रिपरिषद की शक्तियों, दायित्वों एवं संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, तथा 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह जोड़ा गया कि राष्ट्रपति इस मंत्रिपरिषद की सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है, किंतु पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए राष्ट्रपति बाध्य होगा।
2. उपराष्ट्रपति, जो राज्य सभा का पदेन सभापति होता है, के निर्वाचन में संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्य सभा) के निर्वाचित एवं मनोनीत दोनों सदस्य भाग लेते हैं, किंतु राज्यों की विधानसभाओं और विधान परिषदों के सदस्य इसके निर्वाचक मंडल में शामिल नहीं होते हैं।
3. केंद्रीय मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है (अनुच्छेद 75), जिसका अर्थ है कि मंत्रिपरिषद का कोई भी एक मंत्री लोकसभा द्वारा अपने विभाग से संबंधित नीतिगत मामलों पर पराजित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ सकता है।
4. यदि उपराष्ट्रपति का पद उसकी मृत्यु, त्यागपत्र या निष्कासन के कारण रिक्त हो जाता है, तो इस रिक्ति को भरने के लिए संविधान में कोई निश्चित समय-सीमा (जैसे 6 महीने के भीतर) निर्धारित नहीं की गई है, किंतु नए उपराष्ट्रपति का चुनाव 'यथाशीघ्र' कराया जाना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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