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BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियमों तथा इनसे संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 73वें संशोधन द्वारा संविधान में भाग IX जोड़ा गया, जिसके तहत त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था (ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर) का प्रावधान किया गया, किंतु जिन राज्यों की जनसंख्या 20 लाख से कम है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर का गठन न करने की छूट दी गई है।
  2. 2. 74वें संशोधन के अंतर्गत नगरपालिकाओं के तीन प्रकार (नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम) का प्रावधान किया गया है, तथा प्रत्येक नगरपालिका में वार्ड समितियों (Wards Committees) का गठन उस नगरपालिका क्षेत्र की आबादी एक लाख या उससे अधिक होने पर अनिवार्य किया गया है।
  3. 3. संविधान की ग्यारहवीं और बारहवीं अनुसूची में क्रमशः पंचायतों के लिए 29 और नगरपालिकाओं के लिए 18 कार्यात्मक विषयों का उल्लेख किया गया है, जिन पर विधियाँ बनाने की शक्ति राज्य विधानमंडल के विवेक पर निर्भर करती है।
  4. 4. सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा प्रदान करने वाले 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 के माध्यम से अनुच्छेद 19(1)(c) के तहत सहकारी समितियां बनाने के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया गया तथा नीति निर्देशक तत्वों में नया अनुच्छेद 43-ख (Article 43B) जोड़ा गया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। 73वें और 74वें संविधान संशोधन तथा 97वें संविधान संशोधन (सहकारी समितियां) भारतीय स्थानीय शासन और सहकारी संघवाद के आधार स्तंभ हैं। 73वें संशोधन के अनुच्छेद 243-बी के अनुसार 20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों को मध्यवर्ती स्तर के गठन से छूट है। 74वें संशोधन के अनुसार एक लाख या अधिक जनसंख्या वाली नगरपालिकाओं में वार्ड समितियों का गठन अनिवार्य है। ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायतों के लिए 29 और बारहवीं में नगरपालिकाओं के लिए 18 विषय हैं। अधिक जानकारी और तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के पोर्टल पर जाएं।
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