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BPSC TRE 4.0
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मानव शरीर के तंत्र और उनके कार्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मानव पाचन तंत्र में यकृत (Liver) शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है, जो पित्त रस (Bile) का स्राव करती है, हालांकि इसमें किसी भी प्रकार का पाचक एंजाइम नहीं होता है, किंतु यह वसा के पाइसीकरण (Emulsification) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  2. 2. मानव श्वसन तंत्र में गैसों का विनिमय फेफड़ों के भीतर स्थित कुपिकाओं (Alveoli) की पतली झिल्ली के माध्यम से विसरण (Diffusion) प्रक्रिया द्वारा होता है, और रक्त में ऑक्सीजन का परिवहन मुख्य रूप से हीमोग्लोबिन के साथ 'ऑक्सीहीमोग्लोबिन' के रूप में होता है।
  3. 3. मानव परिसंचरण तंत्र में हृदय का दाहिना आलिंद और दाहिना निलय अशुद्ध (कार्बन डाइऑक्साइड युक्त) रक्त को प्राप्त कर उसे फेफड़ों में पंप करता है, जबकि बायां आलिंद और बायां निलय शुद्ध (ऑक्सीजन युक्त) रक्त को शरीर के विभिन्न अंगों में संचारित करता है।
  4. 4. मानव उत्सर्जन तंत्र की इकाई नेफ्रॉन (Nephron) में मूत्र निर्माण की प्रक्रिया तीन चरणों— glomerular filtration (गुच्छीय निस्यंदन), selective reabsorption (चयनात्मक पुनravशोषण) और tubular secretion (नलिकाीय स्रावण)—के माध्यम से पूरी होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन मानव शरीर के प्रमुख तंत्रों (पाचन, श्वसन, परिसंचरण और उत्सर्जन) के संबंध में पूरी तरह से सत्य हैं। यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है जो पित्त का स्राव करती है जिसमें कोई पाचक एंजाइम नहीं होता लेकिन यह वसा के पाइसीकरण में सहायक है। कुपिकाएं श्वसन तंत्र में विसरण द्वारा गैसों का आदान-प्रदान करती हैं। हृदय का दाहिना भाग अशुद्ध रक्त और बायां भाग शुद्ध रक्त प्रवाहित करता है। नेफ्रॉन उत्सर्जन तंत्र की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है जहाँ मूत्र निर्माण की तीनों प्रमुख प्रक्रियाएं (निस्यंदन, पुनअवशोषण और स्रावण) होती हैं। अधिक अभ्यास और तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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