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BPSC TRE 4.0
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असहयोग आंदोलन (1920-22) और उसके स्थगन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) में कांग्रेस के संविधान में परिवर्तन किया गया जिसके तहत 'शांतिपूर्ण और वैध साधनों' द्वारा 'स्वराज' की प्राप्ति को कांग्रेस का लक्ष्य बनाया गया, तथा प्रांतीय कांग्रेस कमेटियों का गठन भाषाई आधार पर किया गया।
- 2. चौरी-चौरा कांड (5 फरवरी 1922) की हिंसक घटना के बाद महात्मा गांधी ने बारडोली में कांग्रेस की बैठक में असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की घोषणा की, जिससे देश के कई युवा नेताओं जैसे सुभाष चंद्र बोस और चित्तरंजन दास ने इस निर्णय का पूर्ण समर्थन किया।
- 3. आंदोलन के स्थगन के पश्चात चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने गया अधिवेशन (1922) के दौरान कांग्रेस के भीतर ही 'स्वराज पार्टी' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य परिषदों में प्रवेश कर सरकार की नीतियों में बाधा डालना था।
- 4. असहयोग आंदोलन के दौरान पहली बार बड़े पैमाने पर महिलाओं, विद्यार्थियों और व्यापारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, किंतु मुस्लिम समुदाय की भागीदारी इस आंदोलन में नगण्य रही क्योंकि खिलाफत आंदोलन का इससे कोई संबंध नहीं था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस ने 'शांतिपूर्ण और वैध साधनों' से स्वराज प्राप्ति का लक्ष्य अपनाया और भाषाई आधार पर प्रांतीय कमेटियों का गठन किया। चौरी-चौरा की घटना के बाद गांधी जी द्वारा आंदोलन वापस लेने पर चित्तरंजन दास, सुभाष चंद्र बोस और जवाहरलाल नेहरू जैसे युवा नेताओं ने गहरी नाराजगी जताई थी (अतः कथन 2 असत्य है)। सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू ने 1922 के गया अधिवेशन के बाद 'स्वराज पार्टी' की स्थापना की थी। कथन 4 असत्य है क्योंकि खिलाफत आंदोलन के जुड़ने के कारण इस आंदोलन में मुसलमानों की भागीदारी अभूतपूर्व थी। अधिक विस्तृत अध्ययन के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर जाएँ।
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पादप आकारिकी और पौधों में जनन (Plant Morphology and Reproduction) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूसला जड़ (Taproot) तंत्र मुख्य रूप से द्विबीजपत्री (Dicots) पौधों में पाया जाता है जो मूलांकुर (Radicle) से विकसित होता है, जबकि अपस्थानिक जड़ें (Adventitious Roots) मूलांकुर के अतिरिक्त पौधे के किसी अन्य भाग से उत्पन्न होती हैं।
2. आवृत्तबीजी (Angiosperms) पौधों में 'दोहरा निषेचन' (Double Fertilization) की प्रक्रिया के दौरान एक नर युग्मक अंड कोशिका (Egg cell) से संलयन कर द्विगुणित युग्मकोद्भिद (Zygote) बनाता है, जबकि दूसरा नर युग्मक द्वितीयक केंद्रक से संलयन कर त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक (PEN) का निर्माण करता है।
3. पुष्प का 'पुंकेशर' (Stamen) मादा जनन अंग है, जिसमें परागकोष (Anther) और वर्तिकाग्र (Stigma) शामिल होते हैं, जबकि स्त्रीकेशर (Pistil) नर जनन अंग का प्रतिनिधित्व करता है।
4. अनिषेक फलन (Parthenocarpy) वह प्रक्रिया है जिसमें बिना निषेचन के ही फल का विकास हो जाता है, और इस प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाले फल सामान्यतः बीज रहित होते हैं, जैसे केला।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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खगोल वैज्ञानिकों द्वारा खोजे गए अत्यधिक ऊर्जा वाले पार्टिकल अमतेरासु (Amaterasu) का नामकरण निम्न आधार पर किया गया
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बिहार के किसान आंदोलनों और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1929 में 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य जमींदारों द्वारा किए जा रहे किसानों के आर्थिक शोषण और बेगार प्रथा के विरुद्ध संगठित संघर्ष करना था।
2. वर्ष 1936 में लखनऊ में आयोजित अखिल भारतीय किसान सभा के पहले सम्मेलन के अध्यक्ष स्वामी सहजानंद सरस्वती चुने गए थे, जबकि इसके महासचिव एन.जी. रंगा को बनाया गया था।
3. वर्ष 1937-38 के दौरान दरभंगा राज के अंतर्गत 'बकाश्त भूमि' (ऐसी भूमि जिस पर किसानों का अधिकार समाप्त हो चुका था और वे बटाईदार के रूप में खेती करते थे) की वापसी को लेकर राहुल सांकृत्यायन के नेतृत्व में 'बकाश्त संघर्ष' चलाया गया था।
4. चंपारण सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी के साथ-साथ राजकुमार शुक्ल ने यूरोपीय नीलहों द्वारा किसानों से जबरन 'तीनकठिया प्रणाली' के तहत खेती कराए जाने के विरुद्ध कानूनी और राजनीतिक संघर्ष की नींव रखी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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दिल्ली सल्तनत और मुगल काल के प्रशासनिक ढांचे, राजस्व प्रणालियों तथा सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सल्तनत काल में 'इक्ता' प्रणाली एक विशिष्ट भू-राजस्व और प्रशासनिक व्यवस्था थी, जिसके तहत सैन्य अधिकारियों (इक्तेदारों) को उनके वेतन के बदले भूमि या उसका राजस्व आवंटित किया जाता था, और अलाउद्दीन खिलजी ने इस व्यवस्था को केंद्रीय नियंत्रण में लाने के लिए 'पैमाइश' की शुरुआत कर भू-राजस्व को बढ़ाकर उपज का आधा (50%) कर दिया था।
2. शेरशाह सूरी द्वारा प्रशासनिक सुधारों के तहत 'जब्ती प्रणाली' और 'दहशाला पद्धति' के प्रारंभिक रूपों को लागू किया गया, जिसमें भूमि की पैमाइश (सिकंदरी गज द्वारा) और उसकी उर्वरता के आधार पर वर्गीकरण किया जाता था, तथा किसानों को 'पट्टा' देने और 'कबूलियत' लेने की प्रथा शुरू की गई।
3. अकबर के शासनकाल में टोडमॉर (राजा टोडरमल) की सहायता से विकसित 'दहशाला बंदोबस्त' (आदाइन-ए-दहशाला) के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और औसत मूल्यों के आधार पर मालगुजारी तय की जाती थी, और इस प्रणाली में राज्य की मांग फसल का ठीक एक-तिहाई (33%) हिस्सा निर्धारित की गई थी।
4. मुगलकालीन 'मनसबदारी व्यवस्था' पूरी तरह से आनुवंशिक थी, जिसमें प्रत्येक मनसबदार को अपने पद के अनुसार 'जात' (व्यक्तिगत पद और प्रतिष्ठा) और 'सवार' (घुड़सवार सैनिकों की संख्या) रखनी पड़ती थी, और जहांगीर के शासनकाल में इस व्यवस्था में 'दो-अस्पा और सिंह-अस्पा' (Do-aspa and Sih-aspa) की नवीन उप-व्यवस्था जोड़ी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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वायुदाब, आर्द्रता एवं पवन संचार तथा चक्रवात के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोरियोलिस बल (Coriolis Force) पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होता है, जो उत्तरी गोलार्ध में पवनों को उनकी मूल दिशा के दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित कर देता है, और यह बल विषुवत वृत्त (Equator) पर अधिकतम तथा ध्रुवों पर शून्य होता है।
2. सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) दिए गए तापमान पर हवा में मौजूद जलवाष्प की वास्तविक मात्रा और उसी तापमान पर हवा की जलवाष्प धारण करने की अधिकतम क्षमता का प्रतिशत अनुपात होती है, और यह तापमान बढ़ने पर घटती है।
3. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) को बंगाल की खाड़ी में 'चक्रवात' (Cyclone), कैरिबियन सागर में 'हरिकेन' (Hurricane) तथा चीन सागर में 'टाइफून' (Typhoon) के नाम से जाना जाता है, और इनके केंद्र में 'चक्रवात की आँख' (Eye of the Cyclone) होती है जो अत्यधिक कम वायुदाब और शांत मौसम का क्षेत्र होती है।
4. पछुआ पवनें (Westerlies) उपोष्ण कटिबंधीय उच्च दाब पेटियों से उप-ध्रुवीय निम्न दाब पेटियों की ओर प्रवाहित होती हैं, और पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में महाद्वीपों के पश्चिमी भागों पर भू-भाग की अधिकता के कारण ये पवनें बहुत अधिक तीव्र और व्यवस्थित रूप से चलती हैं, जिन्हें 'गर्भवती चालीस' (Roaring Forties) कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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