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बिहार में ब्रिटिश शासन के दौरान हुए किसान विद्रोहों और आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मुंगेर जिले में वर्ष 1922-23 के दौरान शाह मुहम्मद जुबेर और स्वामी सहजानंद सरस्वती के प्रयासों से 'किसान सभा' का गठन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य बकाश्त भूमि की समस्या और जमींदारों द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न के विरुद्ध आवाज उठाना था।
  2. 2. स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1936 में लखनऊ में 'अखिल भारतीय किसान सभा' (All India Kisan Sabha) की स्थापना की गई, जिसके प्रथम अध्यक्ष स्वामी सहजानंद सरस्वती स्वयं थे, जबकि इसके महासचिव (General Secretary) एन.जी. रंगा को चुना गया था।
  3. 3. 'बकाश्त आंदोलन' (Bakasht Movement) मुख्य रूप से बिहार में उन जमींदारों के खिलाफ चलाया गया था जिन्होंने किसानों की रैयती जमीन को उनकी गिरवी रखी गई कर्ज़ की अदायगी न होने पर या अन्य कारणों से ज़ब्त कर लिया था, और इस आंदोलन में कार्यानंद शर्मा ने प्रमुख भूमिका निभाई थी।
  4. 4. मोपला विद्रोह (1921), जो किसानों का एक प्रमुख आंदोलन था, बिहार के उत्तरी क्षेत्रों (चंपारण और सारण) में जमींदारी प्रथा के विरुद्ध बड़े पैमाने पर संचालित किया गया था, जिसे कांग्रेस के स्थानीय नेताओं का पूर्ण समर्थन प्राप्त था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। मुंगेर में 1922-23 में शाह मुहम्मद जुबेर और स्वामी सहजानंद सरस्वती के प्रयासों से किसान सभा की नींव पड़ी। वर्ष 1936 में लखनऊ में अखिल भारतीय किसान सभा का गठन हुआ जिसके पहले अध्यक्ष स्वामी सहजानंद सरस्वती और महासचिव एन.जी. रंगा बने। बिहार में बकाश्त (स्वयं जोती जाने वाली) भूमि के अधिकार के लिए कार्यानंद शर्मा के नेतृत्व में बकाश्त आंदोलन चलाया गया था। किंतु कथन 4 असत्य है क्योंकि 'मोपला विद्रोह' (1921) केरल (मालाबार तट) के मप्पिला मुसलमानों द्वारा वहाँ के स्थानीय जमींदारों (जेम्मी) और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध किया गया था, न कि बिहार के उत्तरी क्षेत्रों में। अधिक अभ्यास और अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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