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BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के अंतर्गत संघ की न्यायपालिका (उच्चतम न्यायालय) और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत नियुक्त भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है।
- 2. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों और सीएजी (CAG) दोनों के वेतन, भत्ते और पेंशन भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित (Charged) होते हैं, जिन पर संसद के दोनों सदनों में मतदान किया जा सकता है।
- 3. भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक सेवानिवृत्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के लाभ के पद (Office of Profit) का पात्र नहीं होता है, जबकि उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश कुछ विशिष्ट शर्तों के तहत मध्यस्थता या आयोगों के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर सकते हैं।
- 4. उच्चतम न्यायालय की आरंभिक (Original) अधिकारिता के अंतर्गत केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच या दो या अधिक राज्यों के बीच उत्पन्न होने वाले विवाद आते हैं, किंतु इसमें किसी नागरिक द्वारा सरकार के खिलाफ लाए गए संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के मुकदमे शामिल नहीं होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 148(1) के अनुसार सीएजी को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की तरह साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव के बाद ही हटाया जा सकता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि संचित निधि पर 'भारित व्यय' (Charged Expenditure) पर संसद में बहस तो की जा सकती है, किंतु उन पर लोकसभा में मतदान नहीं किया जाता है। कथन 3 सत्य है क्योंकि सीएजी अपने पद से सेवानिवृत्त होने के बाद केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी भी पद को ग्रहण करने के लिए पूर्णतः अपात्र होता है, जबकि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों पर केवल अदालत में वकालत करने पर प्रतिबंध होता है। कथन 4 सत्य है, अनुच्छेद 131 के तहत उच्चतम न्यायालय की अनन्य मूल अधिकारिता केंद्र-राज्य या राज्यों के आपसी विवादों तक सीमित है। ऐसे और महत्वपूर्ण अभ्यासों के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वर्ष 1916 में स्थापित 'होमरोल लीग आंदोलन' और 'मुस्लिम लीग' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बाल गंगाधर तिलक द्वारा अप्रैल 1916 में स्थापित होमरोल लीग का मुख्यालय बेलगाम में था और इसका कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र (बॉम्बे को छोड़कर), कर्नाटक, मध्य प्रांत और Berar तक सीमित था, जबकि एनी बेसेंट की लीग का कार्यक्षेत्र शेष भारत था।
2. वर्ष 1916 के प्रसिद्ध 'लखनऊ समझौते' (Lucknow Pact) के दौरान कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौता कराने में मुख्य भूमिका बाल गंगाधर तिलक और मोहम्मद अली जिन्ना ने निभाई थी, जिसके तहत कांग्रेस ने पहली बार मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की मांग को औपचारिक रूप से स्वीकार किया था।
3. होमरोल लीग आंदोलन के दौरान ही एनी बेसेंट ने 'न्यू इंडिया' (New India) और 'कॉमनवील' (Commonwealth) समाचार पत्रों के माध्यम से लीग के उद्देश्यों और स्वराज की मांग को जन-जन तक पहुँचाया, तथा उन्हें इसी आंदोलन के दौरान ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था जिसके विरोध में सर एस. सुब्रह्मण्य अय्यर ने अपनी 'नाइटहुड' (Knighthood) की उपाधि वापस कर दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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निम्नलिखित में से कौन-सा जंगल/झाड़ी दावाग्नल भूमध्य सागरीय जलवायु के प्रकार का नहीं है?
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