त्वरित लिंक्स
BPSC TRE 4.0
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भारत में परिवहन प्रणाली और अवसंरचना के विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY), जिसे वर्ष 2000 में शुरू किया गया था, का मुख्य उद्देश्य देश के ग्रामीण और असंबद्ध क्षेत्रों को बारहमासी (All-weather) सड़कों से जोड़ना है, और इसके वित्तपोषण में केंद्र और राज्यों की हिस्सेदारी देश के सभी राज्यों के लिए समान रूप से 50:50 है।
- 2. भारतीय रेल नेटवर्क को विश्व स्तर पर ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए शत-प्रतिशत विद्युतीकरण के लक्ष्य की दिशा में कार्य किया जा रहा है, तथा इसके तहत 'वंदे भारत एक्सप्रेस' जैसी सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनें स्वदेशी तकनीक (ICF चेन्नई) के आधार पर संचालित की जा रही हैं।
- 3. देश के बंदरगाह आधारित विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 'सागरमाला परियोजना' (Sagarmala Programme) की शुरुआत की गई है, जिसके अंतर्गत तटीय क्षेत्रों के औद्योगिक विकास, बंदरगाह आधुनिकीकरण और अंतर्देशीय जलमार्गों के संपर्क को मजबूत करने पर बल दिया जाता है।
- 4. राष्ट्रीय राजमार्ग ग्रिड के विकास के लिए 'स्वर्णिम चतुर्भुज' (Golden Quadrilateral) परियोजना देश के चार महानगरों—दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता—को आपस में जोड़ती है, तथा इसका क्रियान्वयन एवं रख-रखाव भारतीय रेलवे बोर्ड द्वारा किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) में पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य की वित्तीय हिस्सेदारी 90:10 होती है, जबकि सामान्य राज्यों के लिए यह 60:40 होती है, 50:50 सभी के लिए समान नहीं है। कथन 4 असत्य है क्योंकि 'स्वर्णिम चतुर्भुज' परियोजना का क्रियान्वयन और रख-रखाव भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा किया जाता है, न कि भारतीय रेलवे बोर्ड द्वारा। कथन 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। इस प्रकार के उच्च-स्तरीय प्रश्नों का अभ्यास करने के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की अध्यादेश निर्माण की शक्ति (अनुच्छेद 123) और राज्यपाल की अध्यादेश निर्माण की शक्ति (अनुच्छेद 213) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की शक्ति और प्रभाव वही होता है जो संसद द्वारा पारित किसी अधिनियम या राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम का होता है, किंतु ऐसा प्रत्येक अध्यादेश संसद या राज्य विधानमंडल के पुनर्समेकन (Re-assembly) के ठीक छह सप्ताह बाद स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, यदि उससे पहले ही दोनों सदनों द्वारा उसका अनुमोदन न कर दिया जाए।
2. राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति संसद की विधायी शक्ति के सह-विस्तारित (Co-extensive) है, अर्थात् राष्ट्रपति उस विषय पर भी अध्यादेश प्रख्यापित कर सकता है जिस पर संसद कानून बना सकती है, किंतु संविधान के अनुच्छेद 123 के अनुसार राष्ट्रपति किसी भी परिस्थिति में अपनी इस शक्ति का प्रयोग अपने मंत्रिमंडल की लिखित सलाह के बिना कर सकता है।
3. राज्यपाल को अध्यादेश प्रख्यापित करने के लिए कुछ विशेष मामलों में राष्ट्रपति के पूर्व-निर्देश (Prior Instructions) की आवश्यकता होती है, जैसे यदि राज्य विधानमंडल का ऐसा विधेयक जिसके लिए राष्ट्रपति की संस्तुति आवश्यक होती, उसे कानून बनाने के लिए प्रस्तुत किया जाता, तो राज्यपाल बिना राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति के उस विषय पर अध्यादेश जारी नहीं कर सकता है।
4. अध्यादेश निर्माण की शक्ति कोई 'विवेकशील शक्ति' (Discretionary Power) नहीं है, बल्कि यह कार्यपालिका के प्रमुख के रूप में मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से प्रयोग की जाने वाली शक्ति है, और न्यायालय द्वारा इस बात की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है कि क्या अध्यादेश प्रख्यापित करते समय राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा mala fide (दुराशय) या असंवैधानिक तरीकों का उपयोग किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार सरकार द्वारा प्रशासनिक पारदर्शिता, ई-शासन और नागरिकों को विभिन्न डिजिटल सेवाएं प्रदान करने के लिए शुरू किए गए प्रमुख पोर्टलों और मोबाइल एप्लीकेशन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा स्कूली शिक्षा में बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN) की प्रगति की मॉनिटरिंग तथा शिक्षकों और छात्रों के डिजिटल डेटा प्रबंधन के लिए 'ई-शिक्षाकोश' (e-Shikshakosh) पोर्टल और मोबाइल ऐप का व्यापक संचालन किया जा रहा है।
2. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा भूमि विवादों के निपटारे और डिजिटल भूमि प्रबंधन को सुगम बनाने के लिए 'बिहार भूमि' (Biharbhoomi) पोर्टल संचालित किया जाता है, जिसके माध्यम से कोई भी नागरिक अपनी जमाबंदी पंजी, भू-नक्शा और ऑनलाइन दाखिल-खारिज की स्थिति देख सकता है।
3. राज्य में लोक शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निवारण के लिए 'बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम' के तहत 'बिहार लोक शिकायत' पोर्टल और मोबाइल ऐप की सुविधा दी गई है, जिसके जरिए नागरिक घर बैठे अपनी शिकायतें दर्ज कराकर उनकी लाइव ट्रैकिंग कर सकते हैं।
4. पंचायती राज संस्थाओं के कार्यों में डिजिटल पारदर्शिता और शत-प्रतिशत ऑनलाइन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए 'ई-ग्राम स्वराज' पोर्टल के साथ-साथ बिहार सरकार ने 'पंचायती राज डैशबोर्ड' का उपयोग शुरू किया है, जिसके तहत ग्रामीण विकास कार्यों की राशि का वितरण ग्राम पंचायत की संस्तुति के बिना सीधे राज्य मुख्यालय से ठेकेदारों को किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों, महाजनपदों तथा प्रारंभिक मौर्य काल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगारा और समुद्रगुप्त के 'प्रयाग प्रशस्ति' अभिलेख में सीमावर्ती राज्यों और आटविक राज्यों (वन राज्यों) की नीतियों का उल्लेख मिलता है, जिसे हरिषेण द्वारा संस्कृत की चंपू शैली में उत्कीर्ण कराया गया था।
2. छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों में से 'अश्मक' एकमात्र ऐसा महाजनपद था जो गोदावरी नदी के तट पर दक्षिण भारत में स्थित था, जिसकी राजधानी पोटली या पोतन थी।
3. मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार मौर्य प्रशासन में नगर का प्रशासन छह समितियों द्वारा संचालित होता था, और प्रत्येक समिति में पाँच सदस्य होते थे जो व्यापार, उद्योग, विदेशी नागरिकों की देखरेख और कर संग्रह जैसे कार्य संभालते थे।
4. जैन ग्रंथों के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भद्रबाहु से जैन धर्म की दीक्षा ली थी और कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में संलेखना पद्धति द्वारा अपने प्राण त्यागे थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में 'महाजनपद काल' और 'मौर्योत्तर काल' की राजनीतिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. अंग महाजनपद की राजधानी चंपा थी, जो व्यापार का एक प्रमुख केंद्र था और यह महाजनपद वर्तमान बिहार के मुंगेर तथा भागलपुर जिलों के क्षेत्र में विस्तृत था।
2. सातवाहन वंश के शासकों ने सबसे पहले शीशे के सिक्के जारी किए थे, और उनकी राजकीय भाषा प्राकृत थी तथा उनकी प्रशासनिक व्यवस्था में मातृसत्तात्मक प्रभाव (जैसे माताओं के नाम पर राजाओं के नाम रखना) स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
3. कुषाण शासक कनिष्ठ के शासनकाल में गंधार कला और मथुरा कला दोनों का अत्यधिक विकास हुआ, किंतु गंधार कला पर ग्रीक-रोमन (हेलेनिस्टिक) शैली का स्पष्ट प्रभाव था, जबकि मथुरा कला पूरी तरह से स्वदेशी लाल बलुआ पत्थर पर आधारित थी।
4. गुप्तोत्तर काल में भूमि अनुदान की प्रथा (Agrahar grants) में भारी वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप कृषकों की स्थिति में सुधार हुआ और सामंती व्यवस्था (Feudalism) का पूर्ण रूप से पतन हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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संघनन क्या है?
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