त्वरित लिंक्स
BPSC TRE 4.0
1 views
जीव जगत के जैविक वर्गीकरण (Biological Classification) और विशेष रूप से 'मोनेरा जगत' (Kingdom Monera) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मोनेरा जगत के सभी जीव प्रोकैरियोटिक (Prokaryotic) होते हैं, जिनमें सुस्पष्ट केंद्रक (True Nucleus) और झिल्लीबद्ध कोशिकांग (Membrane-bound organelles) का अभाव होता है, किंतु इनका आनुवंशिक पदार्थ कोशिका द्रव्य में बिना केंद्रक आवरण के बिखरा रहता है जिसे न्यूक्लियोइड (Nucleoid) कहा जाता है।
- 2. साइनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria), जिन्हें नील-हरित शैवाल भी कहा जाता है, मोनेरा जगत के अंतर्गत आते हैं और इनमें प्रकाश संश्लेषण के लिए क्लोरोफिल-ए पाया जाता है, तथा कुछ विशिष्ट जातियाँ वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) करने में सक्षम होती हैं।
- 3. माइकोप्लाज्मा (Mycoplasma) पादप जगत के सबसे छोटे ज्ञात जीव हैं, जिनमें कोशिका भित्ति (Cell Wall) पाई जाती है और वे बिना ऑक्सीजन के जीवित नहीं रह सकते, जिसके कारण इन्हें 'पादप जगत का जोーカー' भी कहा जाता है।
- 4. आर्कीबैक्टीरिया (Archaebacteria) अत्यंत विषम और प्रतिकूल वातावरणीय परिस्थितियों (जैसे अत्यधिक गर्म झरने, उच्च लवणीय क्षेत्र और दलदली स्थानों) में जीवित रहने के लिए अनुकूलित होते हैं, क्योंकि इनकी कोशिका भित्ति की रासायनिक संरचना सामान्य बैक्टीरिया से भिन्न होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। मोनेरा जगत के अंतर्गत सभी प्रोकैरियोटिक जीव आते हैं जिनमें केंद्रक झिल्ली नहीं होती और आनुवंशिक सामग्री न्यूक्लियोइड के रूप में होती है। साइनोबैक्टीरिया (नील-हरित शैवाल) प्रोकैरियोटिक होते हैं, क्लोरोफिल-ए रखते हैं और नाइट्रोजन स्थिरीकरण (जैसे हेटरोसिस्ट के माध्यम से एनाबेना या नोस्टॉक) कर सकते हैं। आर्कीबैक्टीरिया अत्यधिक विषम परिस्थितियों जैसे हेलोफाइल (लवणीय क्षेत्र), थर्मोएसिडोफाइल (गर्म झरने) और मेथेनोजेन (दलदली क्षेत्र) में जीवित रहने में सक्षम होते हैं क्योंकि इनकी कोशिका भित्ति में peptidoglycan नहीं होता बल्कि branched chain lipids होते हैं। कथन 3 असत्य है क्योंकि माइकोप्लाज्मा (PPLO) में 'कोशिका भित्ति (Cell Wall) पूर्णतः अनुपस्थित' होती है, और वे ऑक्सीजन के बिना भी जीवित रह सकते हैं (वैकल्पिक अवायवीय)। ऐसी ही उच्च स्तरीय परीक्षा तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
→
बिहार तथा भारत में सिंचाई प्रणालियों, प्रमुख नदी घाटी परियोजनाओं और जल संसाधन प्रबंधन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोसी बहुउद्देशीय परियोजना (Kosi Project) भारत और नेपाल की एक संयुक्त परियोजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य कोसी नदी के विनाशकारी बाढ़ को नियंत्रित करना, जलविद्युत का उत्पादन करना तथा पूर्वी कोसी मुख्य नहर प्रणाली के माध्यम से बिहार और नेपाल के तराई क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा प्रदान करना है।
2. सोन नहर प्रणाली (Sone Canal System) बिहार की सबसे पुरानी नहर प्रणालियों में से एक है, जिसकी शुरुआत डेहरी-ऑन-सोन से की गई थी और यह सोन नदी के पूर्वी तथा पश्चिमी तटों से निकलकर रोहतास, भोजपुर, औरंगाबाद और पटना जिलों के कृषि क्षेत्रों को सिंचित करती है।
3. गंडक परियोजना (Gandak Project), जिसे 'वैशाली और चंपारण की जीवन रेखा' भी कहा जाता है, भारत और नेपाल की संयुक्त परियोजना है, जिसके अंतर्गत त्रिवेणी घाट पर एक बैराज का निर्माण किया गया है और इससे निकलने वाली नहरें बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश को भी जल प्रदान करती हैं।
4. दक्षिण बिहार के पठारी और शुष्क क्षेत्रों में जल संकट से निपटने के लिए बिहार सरकार द्वारा शुरू की गई 'हर खेत तक सिंचाई का पानी' योजना के अंतर्गत केवल बड़ी बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं पर निर्भर रहा गया है, और इसमें सौर ऊर्जा आधारित सूक्ष्म लिफ्ट सिंचाई योजनाओं या चेक डैमों के निर्माण के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
बिहार के कृषि उद्योग, व्यापार और आधारभूत संरचना के आधुनिकीकरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार सरकार द्वारा राज्य में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों (Food Processing Industries) को बढ़ावा देने के लिए 'बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति (खाद्य प्रसंस्करण)' के तहत निवेशकों को पूंजीगत सब्सिडी और विभिन्न कर रियायतें प्रदान की जा रही हैं, जिससे मखाना, लीची और मक्का आधारित उद्योगों का तेजी से विकास हुआ है।
2. राज्य में कृषि विपणन और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने के लिए ग्रामीण हाटों को 'ई-नाम' (e-NAM) मंडियों के साथ एकीकृत किया जा रहा है, तथा कृषि उपज के बेहतर भंडारण के लिए 'बिहार राज्य गोदाम विनियामक प्राधिकरण' के अंतर्गत आधुनिक साइलो (Silos) और गोदामों का निर्माण किया जा रहा है।
3. बिहार के ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में परिवहन नेटवर्क को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 'मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना' के माध्यम से कृषि उत्पादों को सीधे शहरी बाजारों और मुख्य आर्थिक गलियारों से जोड़ने के लिए ग्रामीण सड़कों और पुलों का एक विशाल नेटवर्क तैयार किया गया है।
4. राज्य में कृषि साख और संस्थागत वित्तपोषण को बढ़ावा देने के लिए सहकारिता बैंकों और पैक्स (PACS) का डिजिटलीकरण किया गया है, जिसके माध्यम से किसानों को न्यूनतम ब्याज दरों पर ऋण और उर्वरक उपलब्ध कराए जाते हैं, और पैक्स को बहुउद्देशीय व्यापारिक केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
लन्दन में जनरल ओ. डायर को गोली किसने मारी थी?
→
अकार्बनिक रसायन (Inorganic Chemistry) के अंतर्गत संक्रमण धातुओं (Transition Metals), उनके परिसरों (Complex Compounds) और समन्वय रसायन (Coordination Chemistry) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्नर के उपसहसंयोजन सिद्धांत (Werner's Coordination Theory) के अनुसार, संक्रमण धातु आयनों में दो प्रकार की संयोजकताएँ पाई जाती हैं - प्राथमिक संयोजकता (जो आयननीय होती है और ऑक्सीकरण संख्या को दर्शाती है) तथा द्वितीयक संयोजकता (जो अनआयननीय होती है और समन्वय संख्या को निर्धारित करती है)।
2. क्रिस्टल फील्ड सिद्धांत (Crystal Field Theory - CFT) के अनुसार, जब लिगेंड धातु आयन के संपर्क में आते हैं, तो धातु की 'd' कक्षकों का अपभ्रंश (Degeneracy) समाप्त हो जाता है और वे ऊर्जा के आधार पर विभाजित (Split) हो जाते हैं, जिसमें ऑक्टाहेड्रल (अष्टफलकीय) क्षेत्र में $t_{2g}$ कक्षक उच्च ऊर्जा स्तर पर और $e_g$ कक्षक निम्न ऊर्जा स्तर पर चले जाते हैं।
3. 'प्रभावी परमाणु क्रमांक' (Effective Atomic Number - EAN) नियम के अनुसार, कई समन्वय यौगिकों में धातु आयन और लिगेंडों द्वारा साझा किए गए इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या निकटतम अक्रिय गैस (Noble Gas) के परमाणु क्रमांक के बराबर होने पर यौगिक अत्यधिक स्थायी हो जाता है।
4. काइरैलिटी (Chirality) और ऑप्टिकल आइसोमेरिज्म (प्रकाशिक समावयवता) मुख्य रूप से उन अष्टफलकीय परिसरों में देखी जाती है जो सममित (Symmetrical) प्रकृति के होते हैं और जिनमें समतल (Plane of symmetry) या केंद्र (Center of symmetry) विद्यमान होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
पृथ्वी की आंतरिक संरचना, ज्वालामुखी उद्गार के प्रकार और भूकंपीय तरंगों के संचलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूकंप के उद्गम बिंदु को 'फोकस' (Focus) या हाइपोसेंटर कहा जाता है, जो पृथ्वी के भीतर स्थित होता है, जबकि इसके ठीक ऊपर धरातल पर स्थित बिंदु को 'अधिकरण' (Epicentre) कहा जाता है जहाँ सबसे पहले भूकंपीय तरंगें पहुँचती हैं।
2. प्राथमिक तरंगें (P-Waves) अनुप्रस्थ (Transverse) प्रकृति की होती हैं जो केवल ठोस माध्यम से गुजर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-Waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) प्रकृति की होती हैं और ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में गमन कर सकती हैं।
3. हवाई द्वीप पर पाया जाने वाला 'कििलाउएआ' (Kilauea) ज्वालामुखी ढाल (Shield) ज्वालामुखी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो अत्यधिक तरल और कम चिपचिपे बेसिक लावा (Basaltic lava) के शांत उद्गार से निर्मित होता है।
4. विस्फोटे उद्गारों के आधार पर 'पेलियन तुल्य' (Peléean type) ज्वालामुखी उद्गार सबसे अधिक विनाशकारी और भयंकर माने जाते हैं, जिनमें अत्यधिक गाढ़ा लावा, ज्वलनशील गैसों के बादल और पाइरोक्लास्टिक पदार्थ तीव्र गति से बाहर निकलते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.