त्वरित लिंक्स
BPSC TRE 4.0
1 views
भारत के सामान्य परिचय, भौगोलिक विस्तार और अक्षांशीय-देशांतीय स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत की मुख्य भूमि का विस्तार 8°4' उत्तर से 37°6' उत्तरी अक्षांशों के बीच तथा 68°7' पूर्व से 97°25' पूर्वी देशांतरों के बीच फैला हुआ है, जिसके कारण इसके अक्षांशीय और देशांतीय विस्तार में लगभग 30 डिग्री का अंतर है।
- 2. भारत का कुल क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किलोमीटर है, जो विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 2.4 प्रतिशत है, जबकि इसकी जनसंख्या विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 17.5 प्रतिशत से अधिक है।
- 3. भारत की मानक समय रेखा (82°30' पूर्वी देशांतर), जो उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से गुजरती है, देश के कुल पाँच राज्यों (उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश) से होकर गुजरती है।
- 4. कर्क रेखा ($23°30'$ उत्तरी अक्षांश) भारत के लगभग मध्य से गुजरती है और यह देश के कुल आठ राज्यों से होकर गुजरती है, जिनमें पश्चिम से पूर्व की ओर सही क्रम: गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और मिजोरम है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। भारत की मुख्य भूमि का अक्षांशीय विस्तार 8°4' उत्तर से 37°6' उत्तर तथा देशांतीय विस्तार 68°7' पूर्व से 97°25' पूर्व तक है। भारत का क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किमी है जो विश्व का 2.4% है। मानक समय रेखा (82.5° E) 5 राज्यों से तथा कर्क रेखा 8 राज्यों से गुजरती है। ऐसे ही महत्वपूर्ण प्रश्नों के अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
→
मध्यकालीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, दिल्ली सल्तनत और मुगल काल की प्रशासनिक व्यवस्था, भू-राजस्व प्रणालियों तथा सैन्य सुधारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सल्तनत काल में अलाउद्दीन खिलजी द्वारा सेना में भ्रष्टाचार रोकने के लिए घोड़ों को दागने (दाग) और सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा की शुरुआत की गई थी, तथा उसने उपज का आधा भाग (50%) भू-राजस्व के रूप में सीधे नगद में वसूलने का आदेश दिया था।
2. सल्तनत काल के दौरान 'इक्ता व्यवस्था' एक प्रांतीय प्रशासनिक व्यवस्था थी, जिसे मोहम्मद बिन तुगलक द्वारा पहली बार वंशानुगत बनाया गया था, जिसके कारण इक्तदारों को अपने क्षेत्र से कर वसूलने के साथ-साथ सेना रखने का भी अधिकार मिल गया था।
3. मुगल सम्राट अकबर द्वारा लागू की गई 'दहसाला व्यवस्था' (या ज़ब्ती प्रणाली) टोडरमल के मार्गदर्शन में विकसित की गई थी, जिसके अंतर्गत पिछले दस वर्षों के दौरान विभिन्न फसलों के औसत उत्पादन और औसत बाजार मूल्य का आकलन करके भू-राजस्व का निर्धारण किया जाता था।
4. मुगल प्रशासनिक व्यवस्था में 'मनसबदारी प्रणाली' सैन्य और नागरिक दोनों अधिकारियों के लिए अनिवार्य थी, जिसे मंगोलों की दशमलव पद्धति पर आधारित किया गया था, और इसमें 'जात' पद पद की प्रतिष्ठा और वेतन को तथा 'सवार' पद घुड़सवार सैनिकों की संख्या को दर्शाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
कथन (A): पटना कलम में अग्रभूमि और पृष्ठभूमि का अभाव होता है। कारण (R): पटना कलम मुगल पेंटिंग की एक उपशाखा है।
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तथा केंद्रीय मंत्रिपरिषद के संवैधानिक उपबंधों और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, और राष्ट्रपति अपनी शक्तियों का प्रयोग करते समय इस सलाह के अनुसार कार्य करेगा, किंतु राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद से ऐसी सलाह पर 'पुनर्विचार' करने के लिए कह सकता है, तथा पुनर्विचार के पश्चात जो सलाह दी जाती है, राष्ट्रपति उसके अनुसार कार्य करने के लिए पूर्णतः बाध्य होता है।
2. अनुच्छेद 75(3) के अनुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि यदि लोकसभा में किसी एक मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, भले ही नीतिगत मतभेद केवल उस एक विभाग से संबंधित हों।
3. उपराष्ट्रपति, जो राज्य सभा का पदेन सभापति होता है, जब कभी संविधान के अनुच्छेद 65 के अधीन राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या उसके कृत्यों का निर्वहन करता है, तब वह राज्य सभा के सभापति के रूप में किसी भी कर्तव्य का पालन नहीं करता है और उसे उस अवधि में राज्य सभा के सभापति के रूप में मिलने वाले वेतन या भत्ते प्राप्त नहीं होते हैं।
4. यदि उपराष्ट्रपति का निर्वाचन उच्चतम न्यायालय द्वारा शून्य (Void) घोषित कर दिया जाता है, तो उपराष्ट्रपति के रूप में उस विवादित अवधि के दौरान उसके द्वारा किए गए आधिकारिक और प्रशासनिक कार्य अवैध (Invalid) हो जाते हैं और उन्हें न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
बिहार की कला, संस्कृति एवं लोक परंपराओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'विदेशिया' लोक नाट्य शैली के प्रणेता भिखारी ठाकुर हैं, जिन्हें ग्रामीण समाज में पलायन, स्त्री विमर्श और सामाजिक कुप्रथाओं के सजीव मंचन के लिए 'भोजपुरी का शेक्सपियर' कहा जाता है।
2. बिहार के लोक पर्व 'छठ पूजा' में प्रकृति की आराधना के तहत कार्तिक और चैत्र मास में षष्ठी तिथि को डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, और यह पर्व पूर्णतः किसी मूर्तिपूजा पर आधारित न होकर सूर्य ऊर्जा और जल संरक्षण के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है।
3. 'झिझिया नृत्य' मिथिला क्षेत्र का एक प्रसिद्ध अनुष्ठानिक लोक नृत्य है, जो अत्यधिक वर्षा और बाढ़ के समय फसल सुरक्षा के लिए भगवान इंद्र को प्रसन्न करने हेतु महिलाओं द्वारा सिर पर जलते हुए दीयों का घड़ा रखकर किया जाता है।
4. मंजूषा कला (Manjusha Art), जिसे 'अंगिका कला' या 'स्नेक पेंटिंग' के रूप में भी जाना जाता है, मुख्य रूप से भागलपुर (अंग क्षेत्र) की एक लोक चित्रकला शैली है, जो मुख्य रूप से बिहुला-विषहरी की पौराणिक कथा पर आधारित है और इसमें केवल गुलाबी, पीले तथा हरे रंगों का प्रयोग किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
बंगाल विभाजन (1905) और इसके विरोध में प्रारंभ किए गए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन का निर्णय लॉर्ड कर्ज़न द्वारा 20 जुलाई 1905 को घोषित किया गया था, तथा 16 अक्टूबर 1905 को इसे लागू किए जाने के दिन पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, 'बंदे मातरम' गाया और birbirat (आपसी भाईचारे) के प्रतीक के रूप में एक-दूसरे की कलाई पर राखियाँ बांधीं।
2. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल के राष्ट्रीय शिक्षा परिषद (National Council of Education) की स्थापना 15 अगस्त 1906 को की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य साहित्यिक, वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा को स्वदेशी नियंत्रण के तहत देना था, तथा सतीश चंद्र मुखर्जी का 'डॉन सोसाइटी' (Dawn Society) इसमें विशेष रूप से सक्रिय था।
3. कांग्रेस के 1905 के बनारस अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी, पहली बार औपचारिक रूप से पूरे ब्रिटिश भारत में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का विस्तार करने का प्रस्ताव पारित किया गया था, हालांकि नरमपंथियों और चरमपंथियों के बीच वैचारिक मतभेद इस बात पर था कि यह आंदोलन केवल बंगाल तक सीमित रहना चाहिए या पूरे देश में फैलना चाहिए।
4. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों (Atmashakti) पर भी बल दिया गया, जिसके तहत आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय ने 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' जैसी स्वदेशी उद्योगों की नींव रखी, और अश्विनी कुमार दत्त ने बंगाल के बरिशाल में 'स्वदेश बांधव समिति' के माध्यम से जन-जागरण का कार्य किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.