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BPSC TRE 4.0
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प्रकाश के अपवर्तन (Refraction of Light) और पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical Angle) से अधिक हो जाता है, तो प्रकाश का अपवर्तन होने के बजाय वह सघन माध्यम में ही पूर्णतः परावर्तित हो जाता है, जिसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।
- 2. हीरे का चमकना, मृगशिरा (Mirage) का बनना और ऑप्टिकल फाइबर (Optical Fibre) का कार्य करना प्रकाश के पूर्ण आंतरिक परावर्तन के प्रमुख व्यावहारिक उदाहरण हैं।
- 3. तारों कािमटिमाना और पानी से भरे बर्तन में डूबी हुई पेंसिल का टेढ़ा या ऊपर उठा हुआ दिखाई देना प्रकाश के पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण होता है।
- 4. अपवर्तन की घटना में प्रकाश की चाल और तरंगदैर्ध्य बदल जाती है, किंतु प्रकाश की आवृत्ति (Frequency) अपरिवर्तित रहती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है और आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक होता है, तो पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है (कथन 1)। हीरे की चमक, मृगचमरी और ऑप्टिकल फाइबर इसी सिद्धांत पर काम करते हैं (कथन 2)। अपवर्तन के दौरान आवृत्ति नहीं बदलती, केवल चाल और तरंगदैर्ध्य बदलते हैं (कथन 4)। किंतु कथन 3 असत्य है क्योंकि तारों का टिमटिमाना और पेंसिल का उठा हुआ दिखना वायुमंडलीय अपवर्तन (Atmospheric Refraction) के कारण होता है, पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण नहीं। अधिक अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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बिहार के प्रागैतिक ऐतिहासिक (Protohistoric) स्थलों में से एक 'चिरांद' (Chirand), जो अपनी नौपाषाण युगीन (Neolithic) संस्कृति और विशेष रूप से प्रचुर मात्रा में पाए गए हड्डी के उपकरणों (Bone Artifacts) के लिए प्रसिद्ध है, वर्तमान बिहार के किस जिले में स्थित है?
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बिहार के जनजातीय आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संथाल हूल (1855-56) के दौरान सिद्धू और कान्हा ने ब्रिटिश सत्ता और उनके सहयोगियों (दिकुओं) के खिलाफ 'सुबा राज' (अपना राज) स्थापित करने की घोषणा की थी, और यह विद्रोह मुख्य रूप से राजमहल की पहाड़ियों के इर्द-गिर्द 'दामिन-ए-कोह' क्षेत्र में केंद्रित था।
2. बिरसा मुंडा द्वारा संचालित 'उलगुलान' (महान हलचल) आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मुंडा राज की स्थापना और पारंपरिक खूंटकट्टी व्यवस्था (सामूहिक भू-स्वामित्व) को पुनः बहाल करना था, तथा इस आंदोलन ने ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों और ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण प्रयासों के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया था।
3. ताना भगत आंदोलन, जिसकी शुरुआत वर्ष 1914 में जतरा भगत के नेतृत्व में उरांव जनजाति के बीच हुई थी, एक अहिंसक और सुधारवादी आंदोलन था, जिसने आगे चलकर असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के साथ सक्रिय रूप से अपनी एकजुटता दिखाई थी।
4. मुंडा और संथाल विद्रोहों की पृष्ठभूमि में ब्रिटिश प्रशासन को मजबूर होकर 'छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (Tenant Act) 1908' पारित करना पड़ा, जिसने आदिवासियों की जमीन के गैर-आदिवासियों को हस्तांतरण को प्रतिबंधित कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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केंद्रीय बजट एवं नवीनतम आर्थिक समीक्षा के समष्टि आर्थिक संकेतकों (Macroeconomic Indicators) और राजकोषीय प्रबंधन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केंद्रीय बजट में राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) के मार्ग का कड़ाई से पालन करते हुए राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.5% से नीचे लाने का लक्ष्य वर्ष 2025-26 तक निर्धारित किया गया है।
2. आर्थिक समीक्षा के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था में पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) पर निरंतर जोर दिया गया है, जिससे दीर्घकालिक अवसंरचना विकास को बढ़ावा मिल सके।
3. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत केंद्र सरकार ने राजस्व घाटे को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य रखा है, तथा वर्तमान में राजस्व घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 1% से भी नीचे आ गया है।
4. चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) और विदेशी मुद्रा भंडार के मोर्चे पर, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार देश के कुल बाह्य ऋण का 100% से अधिक हिस्सा कवर करने में सक्षम है, जो बाहरी झटकों के खिलाफ अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ स्थिति को दर्शाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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पृथ्वी के भू-आकृतिक स्वरूपों के अंतर्गत पर्वत, पठार तथा मरुस्थल के निर्माण, विशेषताओं और उनके वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विश्व के अधिकांश नवीन वलित पर्वत (Young Fold Mountains), जैसे कि हिमालय, रॉकीज़ और एंडीज़, अभिसारी प्लेट किनारों (Convergent Plate Boundaries) पर स्थित हैं, जहाँ विवर्तनिक प्लेटों के टकराने के कारण संपीडनकारी बलों (Compressional Forces) से भू-पर्पटी में वलन पड़ जाते हैं।
2. 'अन्तः पर्वतीय पठार' (Intermontane Plateaus), जैसे कि तिब्बत का पठार और बोलिविया का पठार, चारों तरफ से उच्च पर्वतीय श्रेणियों से घिरे होते हैं और इनका निर्माण पर्वत निर्माणकारी प्रक्रमों के दौरान पटल विरूपण (Diastrophism) और क्षैतिज संपीड़न के परिणामस्वरूप होता है।
3. विश्व के उष्ण कटिबंधीय मरुस्थल मुख्यतः महाद्वीपों के पश्चिमी margins (पश्चिमी तटों) पर व्यापारिक हवाओं के प्रभाव और ठंडी महासागरीय धाराओं की उपस्थिति के कारण पाए जाते हैं, जो वर्षा लाने में असमर्थ होती हैं।
4. दक्कन का पठार (Deccan Plateau) एक अंतरापर्वतीय पठार का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसका निर्माण ज्वालामुखी के दरारी उद्गार (Fissure Eruption) से हुए बेसाल्ट लावा के निक्षेपण के कारण क्रमिक रूप से हुआ है।
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भारतीय संविधान की उद्देशिका (प्रस्तावना) तथा संघ एवं राज्य क्षेत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संविधान की उद्देशिका में अब तक केवल एक बार वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संशोधन किया गया है, जिसके तहत इसमें 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए थे, और सर्वोच्च न्यायालय ने 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में यह स्पष्ट किया था कि उद्देशिका संविधान का अभिन्न अंग है तथा इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते संविधान का 'मूल ढांचा' (Basic Structure) प्रभावित न हो।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार 'भारत, अर्थात इंडिया, राज्यों का संघ है' (Union of States), जिसका तात्पर्य यह है कि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है और किसी भी राज्य को संघ से अलग होने का कोई अधिकार नहीं है।
3. नए राज्यों के निर्माण, उनके क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन से संबंधित विधेयक (अनुच्छेद 3 के तहत) को संसद में पेश करने से पहले राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति की आवश्यकता अनिवार्य होती है, और ऐसा विधेयक प्रस्तुत करने से पहले राष्ट्रपति उस राज्य के विधानमंडल को अपने विचार व्यक्त करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा देते हैं, तथा विधानमंडल द्वारा दी गई सिफारिश या सलाह को मानना राष्ट्रपति और संसद के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होता है।
4. अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा 'संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना' कर सकती है, जो कि उन बाहरी क्षेत्रों से संबंधित है जो भारत के भू-भाग का हिस्सा नहीं थे (जैसे सिक्किम का भारतीय संघ में विलय)।
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