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BPSC TRE 4.0
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यूरोपीय वाणिज्यिक कंपनियों के भारत आगमन और उनके प्रारंभिक व्यापारिक केंद्रों (फैक्ट्रियों) की स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत में सबसे पहले आने वाले पुर्तगालियों ने वर्ष 1498 में कालीकट में अपना पहला व्यापारिक केंद्र स्थापित किया था, तथा वर्ष 1503 में कोचीन में पुर्तगालियों ने भारत का पहला यूरोपीय दुर्ग (किल्ला) बनवाया था।
- 2. डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) ने अपनी पहली व्यापारिक कोठी वर्ष 1605 में मसूलीपट्टम में स्थापित की थी, और उन्होंने भारत में वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मुख्य रूप से पुलिकट को अपना प्रमुख व्यापारिक केंद्र बनाया जहाँ उन्होंने पैगोडा सिक्के भी ढाले।
- 3. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनी पहली 'अस्थायी' फैक्ट्री वर्ष 1611 में मसूलीपट्टम में स्थापित की थी, जबकि उनकी पहली 'स्थाई' पश्चिमी फैक्ट्री वर्ष 1613 में सूरत में स्थापित हुई थी।
- 4. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी (Compagnie des Indes Orientales) की स्थापना कॉलबर्ट के प्रयासों से 1664 में हुई थी, और फ्रांसिस कैरो ने वर्ष 1668 में सूरत में फ्रांसीसियों की पहली फैक्ट्री स्थापित की, जबकि मार्कारा ने 1669 में मसूलीपट्टम में दूसरी फैक्ट्री स्थापित की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। वास्को डी गामा के 1498 में कालीकट पहुँचने के साथ पुर्तगाली आगमन हुआ और उन्होंने कोचीन में 1503 में पहला दुर्ग बनाया। डच कंपनी ने 1605 में मसूलीपट्टम में पहली फैक्ट्री खोली और पुलिकट को मुख्यालय बनाया। अंग्रेजों ने 1611 में मसूलीपट्टम (अस्थायी) और 1613 में सूरत (स्थाई) में फैक्ट्री स्थापित की। फ्रांसीसियों ने 1664 में कॉलबर्ट के अधीन कंपनी बनाई और 1668 में सूरत तथा 1669 में मसूलीपट्टम में अपनी फैक्ट्रियां स्थापित कीं। ऐसी और महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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पादप आकारिकी और आवृतबीजी (Angiosperm) पौधों में जनन प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आवृतबीजी पौधों में निषेचन के उपरान्त बीजांड (Ovule) विकसित होकर बीज में तथा अंडाशय (Ovary) परिपक्व होकर फल में परिवर्तित हो जाता है, जिसमें फल की भित्ति को 'पेरिकार्प' (Pericarp) कहा जाता है।
2. 'द्वि-निषेचन' (Double Fertilization) की क्रिया आवृतबीजी पौधों की एक विशिष्ट और अद्वितीय विशेषता है, जिसमें एक नर युग्मक अंड कोशिका के साथ मिलकर द्विगुणित युग्मज बनाता है और दूसरा नर युग्मक केंद्रीय कोशिका के द्वितीयक केंद्रक के साथ मिलकर त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक का निर्माण करता है।
3. पुष्प के आवश्यक चक्रों में पुंकेसर (Androecium) और जायांग (Gynoecium) शामिल होते हैं, जबकि बाह्यदलपुंज (Calyx) और दलपुंज (Corolla) को सहायक चक्र कहा जाता है क्योंकि ये सीधे जनन प्रक्रिया में भाग नहीं लेते हैं।
4. आलू, अदरक और अरबी जैसे पौधे भूमिगत तनों (क्रमशः कंद, प्रकंद और घनकंद) के रूप में रूपांतरित होते हैं, जिनमें वर्धिनी कलिकाएँ (Axillary/Vegetative Buds) पाई जाती हैं, और ये सभी वास्तव में पौधों की जड़ के रूपांतरण के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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आयरन को जंग लगने से रोकने के लिए कौन सी प्रक्रिया लाभकारी नहीं है?
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बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों और उनकी अवस्थिति/विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बोधगया में स्थित महाबोधि मंदिर परिसर, जिसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है, वह पवित्र स्थान है जहाँ गौतम बुद्ध को पीपल के वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्ति हुई थी और इस परिसर का मुख्य मंदिर वास्तुकला की नागर शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
2. राजगीर में स्थित 'विश्व शांति स्तूप' (Global Peace Pagoda) रत्नागिरी पहाड़ी पर स्थित है, जिसका निर्माण जापानी बौद्ध भिक्षु फुजी गुरु द्वारा करवाया गया था, और यह सफेद संगमरमर से निर्मित दुनिया के सबसे ऊंचे शांति स्तूपों में से एक है।
3. नालंदा जिले में स्थित प्राचीन नालंदा महाविहार के अवशेषों के साथ-साथ 'नवादा' जिले में अवस्थित 'ककोलत जलप्रपात' बिहार के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में शामिल है, जहाँ कोडरमा पठार से गिरने वाली जलधारा एक खूबसूरत प्राकृतिक कुंड का निर्माण करती है।
4. वैशाली का ऐतिहासिक महत्व इस बात से है कि यहाँ सम्राट अशोक द्वारा निर्मित 'अशोक स्तंभ' (लौरिया नंदनगढ़) स्थित है, जिस पर कोई लेख नहीं उत्कीर्ण है, तथा यह वैशाली के सिंह स्तंभ के रूप में पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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वायुमंडल में वायुदाब पेटियों के खिसकाव (Shift), आर्द्रता के वितरण और पवन संचार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन होने के साथ-साथ सभी वायुदाब पेटियाँ और पवन प्रणालियाँ उत्तर और दक्षिण की ओर खिसकती हैं, जिसके कारण भूमध्यरेखीय शांत पेटी (डोलड्रम) ग्रीष्मकाल में उत्तर की ओर खिसक जाती है और भारतीय उपमहाद्वीप में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन में सहायक होती है।
2. 'पछुआ पवनें' (Westerlies) दोनों गोलार्द्धों में उपोष्ण उच्च दाब पेटियों से उप-ध्रुवीय निम्न दाब पेटियों की ओर प्रवाहित होती हैं, और पृथ्वी के घूर्णन जनित कोरियोलिस बल के प्रभाव से उत्तरी गोलार्द्ध में इनकी सामान्य दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व होती है।
3. निरपेक्ष आर्द्रता (Absolute Humidity) वायु के प्रति इकाई आयतन में उपस्थित जलवाष्प का कुल भार होती है, जो तापमान में परिवर्तन के साथ बदलती रहती है, जबकि विशिष्ट आर्द्रता (Specific Humidity) वायु के प्रति इकाई द्रव्यमान में जलवाष्प के भार को दर्शाती है और यह तापमान तथा दाब में होने वाले परिवर्तनों से पूर्णतः स्वतंत्र होती है।
4. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) की उत्पत्ति के लिए समुद्री सतह का तापमान न्यूनतम 20°C होना आवश्यक है, और इनकी ऊर्जा का मुख्य स्रोत संघनन की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Condensation) होती है, जिसके कारण तट से टकराने के बाद इनकी तीव्रता में वृद्धि होती जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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कौन सा अधिनियम भारत को औपचारिक रूप से स्वतंत्रता प्रदान करता है?
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