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BPSC TRE 4.0
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रॉलेट एक्ट (1919), खिलाफत आंदोलन और असहयोग आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. रौलट सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी ने 'ऑल इंडिया होम रूल लीग' का उपयोग करने का प्रयास किया और इस अधिनियम के विरोध में 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल, उपवास तथा जुलूसों का आयोजन किया गया, जो मुख्य रूप से शहरों तक सीमित था।
- 2. खिलाफत आंदोलन की शुरुआत अली बंधुओं (मौलाना मोहम्मद अली और शौकत अली), मौलाना आजाद तथा हकीम अजमल खान द्वारा तुर्की के खलीफा के पद और उसके साम्राज्य के विघटन के विरोध में की गई थी, तथा नवंबर 1919 में दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय खिलाफत सम्मेलन के अध्यक्ष पद पर महात्मा गांधी को चुना गया था।
- 3. वर्ष 1920 में नागपुर में आयोजित कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का पुरजोर विरोध चित्तरंजन दास, मदन मोहन मालवीय और एनी बेसेंट जैसे नेताओं द्वारा किया गया था, क्योंकि वे परिषदों के बहिष्कार के पक्ष में नहीं थे।
- 4. असहयोग आंदोलन के दौरान चौरी-चौरा कांड (5 फरवरी 1922) की घटना के पश्चात महात्मा गांधी ने बारोली में कांग्रेस की कार्य समिति की बैठक में आंदोलन को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की, जिससे क्षुब्ध होकर सुभाषचंद्र बोस ने इसे 'राष्ट्रीय आपदा' करार दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए कथनों में से कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। कथन 3 आंशिक रूप से विचारणीय है क्योंकि कलकत्ता के विशेष अधिवेशन (सितंबर 1920) में चित्तरंजन दास ने असहयोग के प्रस्ताव का विरोध किया था, किंतु नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) में उन्होंने स्वयं असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का समर्थन किया था। इस प्रकार की उच्च स्तरीय तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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पृथ्वी के वायुमंडलीय दाब, आर्द्रता, पवन संचार तथा चक्रवातों की गतिशीलता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायुमंडल का दाब समुद्र तल पर सबसे अधिक होता है और जैसे-जैसे हम ऊँचाई की ओर बढ़ते हैं, वायुदाब तेजी से घटता है क्योंकि वायुमंडल का घनत्व कम हो जाता है।
2. 'कोरिऑलिस बल' (Coriolis Force) पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होता है, जो उत्तरी गोलार्ध में पवनों को उनकी मूल दिशा के दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित कर देता है, और यह बल विषुवत वृत्त (Equator) पर अधिकतम होता है।
3. शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात (Temperate Cyclones) मुख्य रूप से ध्रुवीय और उष्णकटिबंधीय वायुराशियों के मिलने से बनने वाले 'वाताग्र' (Fronts) के सहारे उत्पन्न होते हैं, और इनका क्षेत्रफल उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की तुलना में बहुत बड़ा होता है।
4. सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) वायु में मौजूद जलवाष्प की वास्तविक मात्रा और उसी तापमान पर वायु की जलवाष्प धारण करने की अधिकतम क्षमता का अनुपात होती है, जिसे प्रतिशत (%) में व्यक्त किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय संविधान में संशोधन करके शिक्षा का अधिकार कब जोड़ा गया?
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लंबाई की सबसे बड़ी इकाई कौन सी है?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत भाग-III (मूल अधिकार), भाग-IV (राज्य के नीतिनिदेशक तत्व - DPSP) तथा भाग-IVक (मूल कर्त्तव्य) के अंतर्संबंधों और उनकी न्यायोचित प्रकृति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल अधिकार (Article 12-35) न्यायोचित (Justiciable) प्रकृति के हैं और इनका हनन होने पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) या उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226) की शरण ली जा सकती है, जबकि राज्य के नीतिनिदेशक तत्व (Article 36-51) गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) हैं और उन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता है।
2. स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की सिफारिशों पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़े गए मूल कर्त्तव्य (Article 51A) प्रकृति से गैर-न्यायोचित हैं और इनके उल्लंघन पर संविधान स्वयं किसी प्रकार के दंड या कानूनी कार्रवाई का प्रावधान नहीं करता है, किंतु संसद विधि बनाकर इन्हें प्रभावी बना सकती है।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'मिनर्वा मिल्स वाद (1980)' के निर्णय में यह स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया था कि भारतीय संविधान की नींव मूल अधिकारों (भाग-III) और नीतिनिदेशक तत्वों (भाग-IV) के बीच संतुलन के 'रॉक-सॉलिड' (Rock-solid) संतुलन पर टिकी है, और इनमें से किसी एक को दूसरे पर पूर्ण प्राथमिकता देना संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) का उल्लंघन होगा।
4. अनुच्छेद 31-C के अनुसार यदि संसद कोई ऐसी विधि बनाती है जो नीतिनिदेशक तत्वों के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) को कार्यान्वित करने के लिए है, तो इस आधार पर उस विधि को इस न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक इतिहास, उसके अधिवेशनों और ब्रिटिश शासन के प्रति उसकी नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक ह्यूम (A.O. Hume) द्वारा कांग्रेस की स्थापना का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के खिलाफ एक सशस्त्र विद्रोह की योजना बनाना था, जिसे बाद में डफरिन ने 'सुरक्षा वाल्व' (Safety Valve) सिद्धांत के रूप में प्रचारित किया।
2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का समर्थन किया गया, किंतु इसे केवल बंगाल तक ही सीमित रखने पर सहमति बनी, जबकि 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार 'स्वराज' (Self-Government) के लक्ष्य को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया।
3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच वैचारिक मतभेदों के कारण हुआ, जिसमें अध्यक्ष पद को लेकर हुए विवाद के पश्चात रास बिहारी घोष को अधिवेशन का अध्यक्ष चुना गया।
4. कांग्रेस के शुरुआती दौर (1885-1905) के नेताओं ने 'प्रार्थना, याचिका और विरोध' (Prayer, Petition and Protest) की नीति का अनुसरण किया था, और उनके दबाव के परिणामस्वरूप ही ब्रिटिश संसद द्वारा 1892 का भारतीय परिषदों अधिनियम (Indian Councils Act, 1892) पारित किया गया था, जिसमें पहली बार अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली की शुरुआत की गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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