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BPSC TRE 4.0
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पृथ्वी की पर्पटी (Crust) में पाए जाने वाले विभिन्न खनिज पदार्थों, चट्टानों के चक्र (Rock Cycle) और बिहार के भूवैज्ञानिक संदर्भ में मृदा तंत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. आग्नेय चट्टानें (Igneous Rocks) पिघले हुए मैग्मा या लावा के ठंडे होने और जमने से बनती हैं, और इनमें जीवाश्म (Fossils) का पूर्ण अभाव होता है क्योंकि अत्यधिक तापमान के कारण जीव-अवशेष नष्ट हो जाते हैं।
  2. 2. रूपांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks) अत्यधिक ताप (Heat) और दाब (Pressure) के प्रभाव से अपने मूल रूप में परिवर्तन के पश्चात बनती हैं, उदाहरण के लिए चूना पत्थर का संगमरमर (Marble) में और बलुआ पत्थर का क्वार्ट्जाइट में बदलना।
  3. 3. बिहार के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र (विशेषकर सोमेश्वर और दून घाटी की पहाड़ियों) में टर्पियरी युग की अवसादी (Sedimentary) चट्टानें पाई जाती हैं, जिनमें बलुआ पत्थर, चूना पत्थर और चिक्का मिट्टी की परतें प्रमुख हैं।
  4. 4. बिहार के दक्षिण-पूर्वी सीमावर्ती जिलों (जैसे बांका, जमुई और नवादा) में पाई जाने वाली 'लाल-पीली मृदा' मुख्य रूप से प्राचीन आर्कियन युगीन ग्रेनाइट और नीस चट्टानों के अपक्षय (Weathering) और वियोजन से विकसित हुई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। पृथ्वी की पपड़ी में आग्नेय, अवसादी और रूपांतरित चट्टानों का चक्र निरंतर चलता रहता है। आग्नेय चट्टानों में मैग्मा के शीतलन से निर्माण होने के कारण जीवाश्म नहीं पाए जाते हैं। अत्यधिक ताप व दाब से अवसादी या आग्नेय चट्टानें रूपांतरित चट्टानों (जैसे चूना पत्थर से संगमरमर) में बदल जाती हैं। बिहार के भूगर्भीय इतिहास में उत्तर-पश्चिमी शिवालिक क्षेत्र में टर्पियरी कालीन अवसादी चट्टानें तथा दक्षिण-पूर्वी पठारी व सीमावर्ती भागों में आर्कियन युग की ग्रेनाइट और नीस चट्टानों से लाल-पीली व लेटेराइट मिट्टियों का विकास हुआ है। परीक्षा से जुड़ी संपूर्ण तैयारी और अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल का उपयोग करें।
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