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जीव जगत के वर्गीकरण (Biological Classification) और मोनेरा जगत (Kingdom Monera) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. आर.एच. व्हिटेकर (R.H. Whittaker) द्वारा वर्ष 1969 में प्रस्तावित पाँच-जगह (Five-Kingdom) वर्गीकरण प्रणाली मुख्य रूप से कोशिका संरचना, पोषण की विधि, शारीरिक संगठन और प्रजनन पर आधारित थी, जिसमें प्रोकैरियोटिक जीवों को 'मोनेरा जगत' में रखा गया है।
  2. 2. मोनेरा जगत के अंतर्गत आने वाले सभी जीव वास्तविक केंद्रक (True Nucleus) और झिल्ली-बद्ध कोशिका अंगों (Membrane-bound organelles) से युक्त होते हैं, तथा इनमें आनुवंशिक पदार्थ केंद्रक झिल्ली से घिरा होता है।
  3. 3. नील-हरित शैवाल (Cyanobacteria) और माइकोप्लाज्मा (Mycoplasma) मोनेरा जगत के प्रमुख उदाहरण हैं, जिनमें माइकोप्लाज्मा को सबसे छोटी जीवित कोशिका माना जाता है जिसमें कोशिका भित्ति (Cell Wall) का पूर्ण अभाव होता है।
  4. 4. अधिकांश बैक्टीरिया ( जीवाणु ) विषमपोषी (Heterotrophic) होते हैं, किंतु कुछ जीवाणु स्वपोषी (Autotrophic) भी होते हैं जो रासायनिक ऊर्जा या प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से अपना भोजन स्वयं संश्लेषित करते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सत्य है क्योंकि आर.एच. व्हिटेकर ने 1969 में पाँच-जगह वर्गीकरण दिया जिसमें प्रोकैरियोटिक जीवों को मोनेरा में रखा गया। कथन 2 असत्य है क्योंकि मोनेरा जगत के जीव प्रोकैरियोटिक होते हैं, अर्थात् उनमें वास्तविक केंद्रक (True Nucleus) और झिल्ली-बद्ध कोशिका अंगक नहीं पाए जाते हैं। कथन 3 सत्य है; सायनोबैक्टीरिया और माइकोप्लाज्मा मोनेरा के अंतर्गत आते हैं और माइकोप्लाज्मा में कोशिका भित्ति नहीं होती। कथन 4 भी सत्य है क्योंकि अधिकांश जीवाणु विषमपोषी होते हैं जबकि कुछ रसायन-संश्लेषी या प्रकाश-संश्लेषी स्वपोषी होते हैं। अधिक अध्ययन सामग्री के लिए हमारी वेबसाइट बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पर विजिट करें।
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